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BNMU। मीडिया। 12 मई, 2018। एनएसएस को बनाएँ जनांदोलन

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BNMU। सुधांशु का सफर (फ्राॅम माधवपुर टू मधेपुरा)

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————————-सुधांशु का सफर——————-
——————(फ्राॅम माधवपुर टू मधेपुरा)——————

मेरे अभिन्न मित्र राहुल कुमार, संवाददाता, दैनिक जागरण, बांका ने आज मेरे बारे में लिखकर मुझे झकझोर दिया। ऐसे में मैं अपनी कुछ बातें शेयर करने को मजबूर हो गया हूँ। यह सब मैंने अपने उन छोटे भाईयों एवं बहनों के लिए लिखा है, जो किसी कारणवश ज्यादा अंक नहीं ला पाए हैं। यदि उन्हें थोङी भी प्रेरणा मिले, तो मैं अपने प्रयास को सफल मानूंगा।

————————माधवपुर की मिट्टी——————-

सुधांशु शेखर का जन्म खगड़िया जिला के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत अपने ननिहाल माधवपुर गाँव में हुआ। इनके नाना जी राम नारायण सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी किसान और नानी सिया देवी एक घरेलू धार्मिक महिला थी। इनका पूरा व्यक्तित्व माधवपुर की मिट्टी से ही बना है।

———————शुरूआती लापरवाही————–
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सुधांशु शेखर की शुरूआती पढाई लिखाई माधवपुर गाँव के दूरन सिंह मध्य विद्यालय, माधवपुर से हुई। यह एक बोरिस पब्लिक स्कूल (बोरी-चट्टी वाला ग्रामीण सरकारी विद्यालय) था। यहाँ इन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। फिर आठवीं से दसवीं तक की पढ़ाई बगल के श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय, नयागांव से हुई। वैसे बचपन से ही इनकी गिनती मेधावी छात्र के रूप में होती रही है। लेकिन यह कुछ-कुछ ‘अंधे में काना राजा’ की तरह था। (साथ पढ़ने वाले मित्रों से क्षमाप्रार्थना।)

सुधांशु शेखर की सबसे बङी कमी यह थी कि ये कभी कुछ रटते नहीं थे और कभी परीक्षा को गंभीरता से नहीं लेते। (कृपया, इनकी नकल न करें। आप ज्यादा से ज्यादा चीजों को याद करें और परीक्षा को गंभीरता से लें।) परिणामतः वे मैट्रिक में महज चार अंकों से प्रथम श्रेणी से चुक गये। फिर इनका किसी अच्छे काॅलेज में नामांकन नहीं हो पाया और एक वर्ष बर्बाद हो गया। तदुपरांत इनके पिता श्री लाल बिहारी सिंह ने इनका नामांकन इनकी इच्छा के विपरीत एसएसपीएस काॅलेज, शंभुगंज (बांका) में करा दिया। इससे इनके युवा मन-मस्तिष्क को गहरा आघात लगा। इनकी पढ़ाई कुप्रभावित हुई और परिणाम फिर द्वितीय श्रेणी।

————————-पीङा का दौर——
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फिर दो वर्षों तक ये काफी उधेरबुन में रहे। दो-दो सकेण्ड डीविजन का दंश और घर में कोई भी गाइड करने वाला नहीं, इसकी पीङा। अपने आपसे नजर मिलाना मुश्किल हो गया था। न खाने की फिक्र और न सोने की चिंता।हालात यह था कि दिनभर तास खेलकर समय गुजारते थे और रात-रात भर जगकर दार्शनिक ओशो रजनीश को पढ़ते रहते थे। यहीं से पत्र-पत्रिकाओं में लिखने लगे और अखबारों में लिखने के सुहाने भ्रम में रहकर अपने अंदर की पीड़ा को छुपाने का यत्न करते रहे।

————————-सपनों की उङान——
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इसी बीच प्रोफेसर डॉ. रामाश्रय यादव ने तिलकामान्झी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के कुलपति का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने स्नातक प्रतिष्ठा में नामांकन हेतु काॅमन इंटरेंस टेस्ट आयोजित किया। इसमें डाॅ. शेखर का चयन प्रतिष्ठित टी. एन. बी. काॅलेज, भागलपुर में दर्शनशास्त्र (प्रतिष्ठा) के लिए हो गया। फिर तो डाॅ. शेखर के सपनों को पंख लग गये। यहाँ इन्होंने प्रतिष्ठा में 68 प्रतिशत अंक प्राप्त किया। तदुपरांत स्नातकोत्तर में भी इन्हें 74 प्रतिशत अंक मिले।

आगे इन्होंने रास्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में भी सफलता प्राप्त की। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर से पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की। फिर यूजीसी, नई दिल्ली के प्रोजेक्ट फेलो रहे। कई किताबों का संपादन एवं लेखन किया।

————————–कहाँ आ गये ?————-
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असिस्टेंट प्रोफेसर की सभी अहर्ताएं पूरी हो गयीं। लेकिन बहाली के लिए विज्ञापन नहीं आ रहा था। किसी अन्य जाॅब में जाने की इच्छा नहीं थी। इंटर के समय से ही शुरू हुई पत्रकारिता एवं लेखन भी अब उबाऊ हो चली थी। लोगों के प्रश्न भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आने लगे थे, “क्या करता है ? कितना पढ़ेगा ? रेलवे-बैंकिंग किसी चीज की नौकरी कर लेता। लेख और किताब लिखने से क्या होने वाला है ?” कभी-कभी इन्हें खुद भी लगता था, “जाने कहाँ आ गये ?” कभी सोचते कि पिता जी ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। कभी लगता कि खुद कैरियर को ‘सिरियसली’ नहीं लिए। नहीं तो बीपीएससी या एसएससी आदि तो हो ही जाता! क्या जरूरत थी किताबें जमा करने की-लेखन एवं शोध करने की!!

————————मरता क्या नहीं करता—————-
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आखिर इन्होंने सोचा, “बनना तो शिक्षक ही है। काॅलेज में न सही, स्कूल क्या बुरा है।” बस इन्होंने बी. एड. में नामांकन करा लिया। नेट और पी-एच. डी. के बाद बी. एड. करने वाले ये अपने तरह के एकमात्र विद्यार्थी थे। बी. एड. करने के बाद ये कुछ महिनों के लिए एक सरकारी विद्यालय में +2 शिक्षक बने।

————————–थोड़ी खुशी, थोड़ा गम————-
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फिर 2014 में बिहार लोक सेवा आयोग से असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हेतु विज्ञापन आया, तो ये उसके एक प्रबल दावेदार बनकर उभरे। इन्हें एकेडमिक में 85 में लगभग 75 पाइंट था। लेकिन यहाँ भी एक बार फिर इन्हें गहरा धक्का लगा। साक्षात्कार बोर्ड के चेयरमेन इनकी पी-एच. डी. टाॅपिक (वर्ण-व्यवस्था और सामाजिक न्याय : डाॅ. भीमराव अंबेडकर के विशेष संदर्भ में’) से भङक गये और इन्हें चंद मिनटों में चलता कर दिया। फिर तो जो होना था, वही हुआ। जहाँ इनके सामान्य मित्रों को 15 में 12-14 अंक मिले, वहीं इनको महज 7 अंकों से संतोष करना पङा। फिर भी साक्षात्कार बोर्ड को धन्यवाद, क्योंकि यदि और एक अंक भी कम मिलता, तो चयन मुश्किल था। इस तरह इन्हें वांछित विश्वविद्यालय नहीं मिल पाया। लेकिन ये बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के लिए चयनित होने में सफल रहे।

———————निराशा का कोहरा———–
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फिर एक बार इनको निराशा ने घेर लिया। सभी विश्वविद्यालयों में इनके मित्र इनके साथ अपनी ज्वाइनिंग का फोटो शेयर करने लगे, लेकिन बीएनएमयू, मधेपुरा में ज्वाइनिंग प्रक्रिया काफी लचर थी। ये लगातार विश्वविद्यालयका चक्कर लगाते रहे, लेकिन बात नहीं बनी।आखिर में 9 मई 2017 को यहाँ डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन हुआ। ये सेंट्रल लाइब्रेरी के बरामदे पर लगी कुर्सी पर बैठकर न्यूज पेपर पढ़ने लगे, तो एक चपरासी ने कुर्सी पर से उठा दिया। खैर डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद आगे की प्रक्रिया बताने वाला कोई नहीं था। इन्होंने अपने अन्य मित्रों के साथ एक पदाधिकारी से बात की, तो उन्होंने कहा, “बीएनएमयू में इतनी जल्दी काम होता है! दो-चार माह बाद ही ज्वाइनिंग होगी, तो क्या बिगङ जाएगा !!”

——————-मधेपुरा की महक————————
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उसी बीच तत्कालीन महामहिम कुलाधिपति रामनाथ कोविंद साहेब ने कृपापूर्वक तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के पूर्व प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. अवध किशोर राय को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति की महती जिम्मेदारी दी। डॉ. राय ने 29 मई 2017 को पदभार ग्रहण किया। उन्होंने इनका और इनके अन्य साथियों का दर्द समझा। फिर तो मात्र चार दिन में सारी प्रक्रिया पूरी हो गयी और इन्होंने 3 जून 2017 को टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में योगदान कर लिया। तदुपरांत अगस्त 2017 में बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी भी बनाए गए। मधेपुरा में इनके कार्यों की महक दूर-दूर तक फैल रही है।

———————————संदेश—————————-
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परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर अपना मूल्यांकन नहीं करें।आप स्वयं अपना आत्म मूल्यांकन करें। आप दुनिया में अद्वितीय हैं। उसी काम में लगें जो आप अच्छे तरीके से कर सकते हैं। दूसरों से अपनी तुलना नहीं करें और दूसरों की नकल से दूर रहें।

-डाॅ. सुधांशु शेखर
जनसंपर्क पदाधिकारी, बीएनएमयू, मधेपुरा

Jai Hind। नानी के हाथ का गोदना

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नानी के हाथ का गोदना
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नानी के हाथ का गोदना बचपन से ही मेरे लिए आकर्षण एवं कौतुहल का विषय रहा है। आज एक बार फिर मेरी नजर गोदना पर पड़ी।

नानी के दाएं हाथ में ‘सिताराम’ (सीताराम) और बाएं हाथ में ‘जय हिन्द’ लिखा है।

नानी ने बताया कि गोदना वाला बाएं हाथ में नाना जी का नाम लिखवाने बोल रहा था। लेकिन नानी ने ‘जय हिन्द’ लिखना पसंद किया; क्योंकि नानी को पता था कि स्वतंत्रता सेनानी नाना जी ‘अपने नाम’ से अधिक ‘जय हिन्द’ देखकर प्रसन्न होंगे।

इससे हम ‘जय हिन्द’ की महत्ता एवं लोकप्रियता का सहज ही अनुमान लगा सकते हैं।

नोट : हमारी हरएक छोटी-छोटी बातें हमारी जीवन-दृष्टि को प्रतिबिम्बित करती हैं और उसका समाज एवं राष्ट्र पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

BNMU। बीएनएमयू संवाद के एक वर्ष पूरे

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बीएनएमयू संवाद के एक वर्ष पूरे

कोरोना महामारी ने हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों पर काफी नकारात्मक प्रभाव डाला है। इससे शिक्षा-व्यवस्था पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ा है और ऑफलाइन शैक्षणिक एवं सृजनात्मक गतिविधियाँ थम-सी गई है। लेकिन कोरोना आपदा को अवसर में बदलते हुए कुछ संस्थानों एवं व्यक्तियों ने ऑनलाइन शिक्षण एवं सृजन को एक नया आयाम देने का प्रयास किया है। इस कड़ी में बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने ठीक एक वर्ष पूर्व कोरोना काल में लागू लाॅकडाउन के समय का सदुपयोग करते हुए बीएनएमयू संवाद नामक एक यू-ट्यूब चैनल की शुरूआत की। इसके माध्यम से उन्होंने बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत की सकारात्मक सूचनाओं एवं गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया।

यू-ट्यूब चैनल बीएनएमयू संवाद के एक वर्ष पूरे होने पर बुधवार को डाॅ. शेखर ने इसकी उपलब्धियों एवं कमियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि अब तक इस चैनल के लगभग 4870 सबस्क्राइबर हो चुके हैं। साथ ही लोग इस चैनल को कुल एक लाख बासठ हजार आठ सौ बार देख चुके हैं। इस पर तीन सौ से अधिक विडियो अपलोड किए जा चुके हैं। इनमें से कई विडियो हजार से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। एक विडियो को पाँच हजार चार सौ व्यू मिला है।

बीएनएमयू संवाद के माध्यम से एक राष्ट्रीय सम्मेलन, एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार, 7 परिचर्चा, 10 राष्ट्रीय वेबिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा चुका है। इसके अलावा इस यू-ट्यूब चैनल पर दर्जनों व्याख्यानों का आयोजन हो चुका है। इसमें पूर्व सांसद एवं संस्थापक कुलपति प्रोफेसर डाॅ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, पूर्व सांसद एवं पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर डाॅ. रामजी सिंह, कुलपति प्रोफेसर डाॅ. राम किशोर प्रसाद रमण, प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह, पूर्व कुलपति प्रोफेसर डाॅ. अवध किशोर राय, पूर्व प्रभारी कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी, पूर्व प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. फारूक अली, अकादमिक निदेशक प्रोफेसर डाॅ. एम. आई. रहमान, प्रधानाचार्य डाॅ. के. पी. यादव, बीएनमुस्टा के महासचिव प्रोफेसर डाॅ. नरेश कुमार, सिंडिकेट सदस्य डाॅ. जवाहर पासवान आदि के व्याख्यान हो चुके हैं। इस चैनल पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण किया गया है। कई कलाकारों को इसमें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का अवसर भी मिला।

उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी कमी एक स्थाई कर्मी का नहीं होना है। यदि एक-दो व्यक्ति इसमें स्थाई रूप से कार्य कर रहे होते, तो आज यह चैनल काफी आगे होता। इसके अलावा विडियो क्वालिटी भी अभी उच्च स्तरीय नहीं है।

उन्होंने आशा व्यक्त की है कि आने वाले दिनों में कमियों को दूर किया जाएगा और सब्सक्रिप्शन बढ़ेंगे। उन्होने इसमें प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों विशेष रूप से तकनिकी सहयोगी मणिष कुमार एवं सौरभ कुमार चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है।

बीएनएमयू संवाद के एक वर्ष पूरे

कोरोना महामारी ने हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों पर काफी नकारात्मक प्रभाव डाला है। इससे शिक्षा-व्यवस्था पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ा है और ऑफलाइन शैक्षणिक एवं सृजनात्मक गतिविधियाँ थम-सी गई है। लेकिन कोरोना आपदा को अवसर में बदलते हुए कुछ संस्थानों एवं व्यक्तियों ने ऑनलाइन शिक्षण एवं सृजन को एक नया आयाम देने का प्रयास किया है। इस कड़ी में बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने ठीक एक वर्ष पूर्व कोरोना काल में लागू लाॅकडाउन के समय का सदुपयोग करते हुए बीएनएमयू संवाद नामक एक यू-ट्यूब चैनल की शुरूआत की। इसके माध्यम से उन्होंने बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत की सकारात्मक सूचनाओं एवं गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया।

यू-ट्यूब चैनल बीएनएमयू संवाद के एक वर्ष पूरे होने पर बुधवार को डाॅ. शेखर ने इसकी उपलब्धियों एवं कमियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि अब तक इस चैनल के लगभग 4870 सबस्क्राइबर हो चुके हैं। साथ ही लोग इस चैनल को कुल एक लाख बासठ हजार आठ सौ बार देख चुके हैं। इस पर सात सौ से अधिक विडियो अपलोड किए जा चुके हैं। इनमें से कई विडियो हजार से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। एक विडियो को पाँच हजार चार सौ व्यू मिला है।

बीएनएमयू संवाद के माध्यम से एक राष्ट्रीय सम्मेलन, एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार, 7 परिचर्चा, 10 राष्ट्रीय वेबिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा चुका है। इसके अलावा इस यू-ट्यूब चैनल पर दर्जनों व्याख्यानों का आयोजन हो चुका है। इसमें पूर्व सांसद एवं संस्थापक कुलपति प्रोफेसर डाॅ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, पूर्व सांसद एवं पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर डाॅ. रामजी सिंह, कुलपति प्रोफेसर डाॅ. राम किशोर प्रसाद रमण, प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह, पूर्व कुलपति प्रोफेसर डाॅ. अवध किशोर राय, पूर्व प्रभारी कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी, पूर्व प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. फारूक अली, अकादमिक निदेशक प्रोफेसर डाॅ. एम. आई. रहमान, प्रधानाचार्य डाॅ. के. पी. यादव, बीएनमुस्टा के महासचिव प्रोफेसर डाॅ. नरेश कुमार, सिंडिकेट सदस्य डाॅ. जवाहर पासवान आदि के व्याख्यान हो चुके हैं। इस चैनल पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण किया गया है। कई कलाकारों को इसमें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का अवसर भी मिला।

उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी कमी एक स्थाई कर्मी का नहीं होना है। यदि एक-दो व्यक्ति इसमें स्थाई रूप से कार्य कर रहे होते, तो आज यह चैनल काफी आगे होता। इसके अलावा विडियो क्वालिटी भी अभी उच्च स्तरीय नहीं है।

उन्होंने आशा व्यक्त की है कि आने वाले दिनों में कमियों को दूर किया जाएगा और सब्सक्रिप्शन बढ़ेंगे। उन्होने इसमें प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों विशेष रूप से तकनिकी सहयोगी मणिष कुमार एवं सौरभ कुमार चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है।

BNMU। व्याख्यान। विषय – वर्तमान कोरोना काल में युवाओं का आपद्धर्म # वक्ता – प्रो. डॉ आभा सिंह

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*शोध बिहार द्वारा आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में आपका हार्दिक स्वागत है।*

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विषय – *वर्तमान कोरोना काल में युवाओं का आपद्धर्म*

वक्ता – *प्रो. डॉ आभा सिंह*

प्रतिकुलपति, बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा

समय – सायंकाल 5:30
दिनांक-14-05-2021

पेज लिंक – https://www.facebook.com/shodhbihar/

BNMU। एनएसएस को बनाएं जनांदोलन : प्रति कुलपति

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एनएसएस को जनांदोलन बनाएं : प्रति कुलपति

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र से जोड़ना है। सभी विद्यार्थी पढाई के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ें। इसे जनांदोलन बनाएं। यह बात प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली ने कही। वे शुक्रवार को एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारियों की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

प्रति कुलपति ने कहा कि एनएसएस को समाज एवं राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनें। हम पहले अपने जीवन में बदलाव लाएं। फिर समाज में बदलाव आएगा।

प्रति कुलपति ने कहा कि हमहम अंधेरे को कोसने की बजाय एक चिराग जलाएं। सकारात्मक सोच रखें और अपने विचारों एवं कार्यों के बीच समन्वय लाएं। भेदभाव को भूलकर सबों के हित में काम करें।

उन्होंने कहा कि 1947 में हमें राजनीति आजादी मिल गयी, लेकिन सामाजिक आजादी नहीं मिली। फिर आजादी के बाद समाज सुधार का काम भी नहीं हुआ। हम समाज सुधार में अपनी महती भूमिका निभाएं। दहेजबंदी, शराबबंदी एवं ऐसे अन्य कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग लें।

प्रति कुलपति ने हम सभी श्रम का सम्मान करें। अपना काम स्वयं करें। समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करें। उन्होंने महाविद्यालयों में राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन की भावनाओं के अनुरूप साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये। सभी प्रधानाचार्य अपने शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को स्वच्छाग्रह के लिए प्रेरित करें। जगह-जगह डस्टबिन एवं पिकदान लगाए जाएं। नियमित रूप से स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

वित्त परामर्शी सुरेश चन्द्र दास ने कहा कि एनएसएस सहित सभी प्रकार के एकाउंट का सही रूप में संचालन हो। कैसबुक मेंटेन किया जाए। ससमय उपयोगिता प्रणाम पत्र जमा किया जाए।

एनएसएस समन्वयक डाॅ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में एनएसएस को गतिशील बनाया जा रहा है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी महाविद्यालय अविलंब अपने एनएसएस एकाउंट को पीएफएमएस द्वारा रजिस्टर्ड कराया जाए। सभी पदाधिकारियों को स्वच्छ भारत समर इटर्नशिप प्रोग्राम के क्रियान्वयन एवं संचालन हेतु दिशा-निर्देश दिए गए। सभी महाविद्यालयों को 21 जून को चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित करने के निर्देश दिये गये। राष्ट्रीय सेवा योजना के आंतरिक एवं बाह्य स्रोत की राशि का वास्तविक विवरणी प्राप्त करना है। महाविद्यालय द्वारा एनएसएस मद में ली जाने वाली राशि एनएसएस के आंतरिक खाते में जमा करने का निर्णय लिया गया। सभी इकाईयों द्वारा संपादित कार्यक्रमों का उपयोगिता प्रणाम पत्र जमा कराना है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वित्त परामर्शी एवं डीएसडब्लू के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टीम सभी महाविद्यालयों की एनएसएस इकाईयों का भौतिक सत्यापन करेगी। जो कार्यक्रम पदाधिकारी शुक्रवार की बैठक में बिना सूचना के अनुपस्थित हैं, उन्हें कारणपृच्छा (सो काउज) की जाएगी। पार्वती साइंस कालेज, मधेपुरा, के. पी. काॅलेज, मुरलीगंज और डिग्री काॅलेज, सुपौल के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी एवं प्रधानाचार्य को शनिवार को पूर्वाह्न 10 बजे प्रति कुलपति कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

इस अवसर पर डीएसडब्लू डाॅ. योगेन्द्र प्रसाद यादव, प्रभारी कुलसचिव डॉ. कपिल प्रसाद, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के डाॅ. विजया कुमारी एवं डाॅ. उपेन्द्र यादव, सीएम साइंस काॅलेज के संजय कुमार सहित विभिन्न महाविद्यालयों के कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित थे।

11 मई, 2018

BNMU। मेसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्सेज से संबंधित बैठक

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“मेसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्सेज” से संबंधित बैठक
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बीएनएमयू, मधेपुरा के केंद्रीय पुस्तकालय में शुक्रवार को मेसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्सेज के क्रियान्वयन को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।

इसकी अध्यक्षता प्रति कुलपति डाॅ. फारूक अली ने की।

इस अवसर पर बीएनएमयू में मेसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्सेज के कुछ पाठ्यक्रमों को एडाप्ट करने पर विचार किया गया।

सभी संकायों के संकायाध्यक्ष को यह जिम्मेदारी दी गयी है कि वे अपने-अपने संकायों से संबंधित पाठ्यक्रमों का चयन करें। अगली बैठक में चयनित पाठ्यक्रमों पर विचार किया जाएगा। फिर उन पर एकेडमिक काउंसिल में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

संचालन नोडल ऑफिसर डाॅ. अशोक कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद ने की।

इस अवसर पर वित्त परामर्शी सुरेश चन्द्र दास,
डाॅ. एस. एन. विश्वास, डाॅ. राणा जयराम सिंह, डाॅ. आर. के. पी. रमण, डाॅ. नरेश कुमार, डाॅ. विनय कुमार चौधरी, डाॅ. एच. एल. एस. जौहरी, डाॅ. अरूण कुमार, डाॅ. बी. एन. पाण्डेय, डाॅ. प्रज्ञा प्रसाद, डाॅ. विमल सागर, डाॅ. मनोरंजन प्रसाद, डाॅ. मुकेश कुमार सिंह, डाॅ. पी. एन. सिंह, डाॅ. सिद्धेश्वर काश्यप, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

BNMU। 19 मई : मतदान (पूर्वाह्न 7-अपराह्न 01 बजे तक)

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19 मई : मतदान (पूर्वाह्न 7-अपराह्न 01 बजे तक)
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विश्वविद्यालय चुनाव समिति की बैठक बुधवार को देर शाम प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली की अध्यक्षता में हुई। इसमें पूर्व घोषित कार्यक्रमानुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव संपन्न होने पर संतोष व्यक्त किया गया। इसके साथ ही सेंट्रल पैनल के चुनाव की महत्वपूर्ण तिथियाँ घोषित की गयीं।

छात्र-संघ चुनाव : सेंट्रल पैनल
महत्वपूर्ण तिथियाँ
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1. 16 मई : प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन (पूर्वाह्न 11 बजे), आपत्ति (पूर्वाह्न 11.30 बजे), अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन (पूर्वाह्न 12 बजे), नामांकन पत्र भरना (अपराह्न 2-3 बजे से), नामांकन पत्र की स्क्रूटनी एवं नाम वापसी (अपराह्न 4-4.30 बजे तक) प्रत्याशियों की अंतिम सूची (अपराह्न 5 बजे)
2. 19 मई : मतदान (पूर्वाह्न 7-अपराह्न 01 बजे तक) तथा मतगणना एवं रिजल्ट (अपराह्न 2 बजे से), प्रमाण पत्र वितरण एवं शपथ ग्रहण : रिजल्ट के तुरंत बाद।

बैठक में मुख्य चुनाव अधिकारी डाॅ. जितेन्द्र कुमार सिंह, पुस्तकालय के प्रोफेसर इंचार्ज डाॅ. अशोक कुमार एवं पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर उपस्थित थे।

11 मई, 2018

BNMU। बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें

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बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें
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मेरी माय (नानी) अभी अपने मायके से लौटी है। अंदर से बहुत खुश है; क्योंकि करीब बारह वर्षों बाद वहां गयी थी। (नानी की तबियत खराब है और लंबी यात्रा की थकान भी है, इसलिए चेहरा थोड़ा उतरा है।) नानी कई दिनों से अपने मायके जाने की जिद कर रही थी, लेकिन मामा जी तबियत खराब होने के कारण उसे जाने नहीं दे रहे थे। नानी को पता था कि मैं भी स्वास्थ्य कारणों से उसके कहीं जाने का समर्थन नहीं करूँगा। इसलिए नानी ने मुझे ‘डायरेक्ट’ नहीं बताया, लेकिन उसने मेरी बड़ी बहन से अपनी इच्छा जाहिर की। बहन ने भी डर के मारे मुझे कुछ नहीं बताया। उसने मेरे जीजा जी से चर्चा की।


… आखिर जीजा जी के माध्यम से नानी के मायके जाने की ख्वाहिश मेरे पास पहुंची। तदुपरांत मैंने नानी का पक्ष लिया और फिर … सारी बाधाएं एवं बहाने दूर। नानी खुशी-खुशी मायके जाकर लौटी। नानी के साथ बड़े मामा जी, मम्मी और बड़ी मौसी ने भी अपने ननिहाल की यात्रा की।
… और इस तीर्थ यात्रा के श्रवण कुमार बने मेरे जीजा जी विभाकर कुमार सिंह एवं बड़े भाई गुड्डू सिंह।

नोट : प्रायः नये संबंधों के साथ पुराने संबंधों में स्थिलता आ जाती है । यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है। लेकिन हमें यथासंभव पुराने संबंधों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए । खासकर युवाओं को यह सोचना चाहिए कि जैसे उनके लिए उनकी दोस्ती-यारी और नातेदारी प्रिय है, वैसे ही बुजुर्गों के लिए उनके संबंधों का महत्व है । अतः बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें । …

11 मई, 2017

BNMU। विश्वविद्यालय ने माँगी अतिथि शिक्षकों से संबंधित सूचनाएँ

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