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स्वयंसेवक को मिलेगा ईएलपी में भाग लेने का अवसर

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*स्वयंसेवक को मिलेगा ईएलपी में भाग लेने का अवसर*

बीएनएमयू , मधेपुरा के स्वयंसेवकों को माय भारत पोर्टल के माध्यम से डाक अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम अर्थात एक्सपीरियंस लर्निंग प्रोग्राम (ईएलपी) में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस राष्ट्रव्यापी पहल में भाग लेने की अंतिम तिथि 8 जून, 2025 तक निर्धारित है। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि बीएनएमयू के कुलपति प्रो. बी. एस. झा तथा एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक गिरधर उपाध्याय के निदेशानुसार सभी महाविद्यालयों को पत्र भेजकर इस कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।

*दो लाख से अधिक युवाओं को शामिल करने का लक्ष्य*

डॉ. शेखर ने बताया कि ईएलपी में भारत के सभी शाखा डाकघरों में दो लाख से अधिक युवाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक डाकघर दो युवकों को अवसर प्रदान करेगा। यह देश में सबसे बड़े जमीनी स्तर के शिक्षण अनुभवों में से एक होगा।

*मैट्रिक उत्तीर्ण होंगे पात्र*

उन्होंने बताया कि ईएलपी में भाग लेने हेतु न्यूनतम योग्यता हाई स्कूल पास है। इसकी अवधि 15 दिनों की होगी। प्रतिभागियों को 15 दिनों के संरचित प्रशिक्षण के माध्यम से भारतीय डाक के कामकाज का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

उन्होंने बताया कि ईएलपी में मुख्य डाकघर संचालन, सेवाओं और ग्राहक प्रोटोकॉल पर बुनियादी अभिविन्यास की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही पार्सल छंटाई और वितरण, काउंटर सहायता और दस्तावेज़ प्रबंधन जैसे दैनिक कार्यों में सहायता करना सीखाया जाएगा। इसकू अलावा वित्तीय समावेशन योजनाओं, बचत खाते, बीमा और फिलैटली जैसी प्रमुख डाक योजनाओं का प्रचार और जागरूकता आदि से संबंधित जानकारी दी जाएगी।

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बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में प्रस्तावित संशोधन के विरुद्ध विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं शिक्षक हितों की रक्षा के लिए आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (FUTAB) के तत्वावधान में बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक 

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

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विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।