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RRC क्विज प्रतियोगिता का परिणाम जारी

क्विज प्रतियोगिता का परिणाम जारी

बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में गत 23 सितंबर (शुक्रवार) को आयोजित प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता का परिणाम जारी कर दिया गया है। जिला नोडल पदाधिकारी सह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि इसमें स्नातकोत्तर मनोविज्ञान तृतीय सेमेस्टर की छात्रा शिवानी प्रिया ने प्रथम तथा बीसीए के अमित कुमार ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। दोनों को क्रमशः 8 एवं 7 अंक प्राप्त हुआ। मेघा कुमारी, रितिक रोशन, राजा कुमार, रोशन कुमार राज चारों संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे। चारों को 6-6 अंक प्राप्त हुआ।

उन्होंने बताया कि सभी विजेताओं को 28 सितंबर (बुधवार) को महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. कैलाश प्रसाद यादव के हाथों सम्मानित किया जाएगा। न्यू इंडिया @75 कैंपेन में भाग लेने वाले वैसे प्रतिभागी, जो अब तक अपना प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्राप्त नहीं कर सके हैं, वे भी इस अवसर पर उपस्थित होकर अपना प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि महाविद्यालय स्तर पर चुने गए दो प्रतिभागी 11 अक्टूबर (बुधवार) को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होंगे। आगे प्रमंडल एवं राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतियोगिता होगी।

BNMU प्री-आरडी कैम्प के लिए चयन

प्री-आरडी कैम्प के लिए चयन

बीएन मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर, मधेपुरा में पूर्व गणतंत्र दिवस परेड (प्री-आरडी परेड) के लिए रविवार को स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं का चयन किया गया। इसमें सभी कॉलेजों के चयनित एनएसएस स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर प्रति कुलपति डॉ. आभा सिंह ने सभी चयनित प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

चयन समिति में अध्यक्ष कुलानुशासक डॉ. बीएन विवेका ने कि वैसे प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिन्होंने पूर्व में आयोजित किसी भी आरडी परेड में भाग नहीं लिया था।शारीरिक रूप से स्वस्थ स्वयंसेवक, जिनकी उंचाई 165-180 सेंटीमीटर तथा स्वयंसेविका, जिनकी उंचाई 155-170 सेंटीमीटर हो, परेड (20 मिनट तक), दौड़ (1.5 किलोमीटर 10 मिनट में) आदि मापदंड को पूर्ण किया।

उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया में स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं को सभी मापदंडों से गुजारा गया और तदुपरांत सर्वसम्मति से चयन किया गया।

सदस्य-सचिव समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने बताया
कि चयनित विद्यार्थी 26 जनवरी 2023 को नई दिल्ली में आयोजित परेड में भाग लेंगे। इसमें भाग लेने के लिए स्वयंसेवकों को पूर्व गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेना होगा, जो संभवतः अक्टूबर-नवंबर में आयोजित होगा।

चयन समिति के सदस्य के रूप में परिसंपदा पदाधिकारी डॉ. गजेन्द्र कुमार, उपकुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर, एनसीसी पदाधिकारी कै. गौतम कुमार ने चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर डॉ. शंकर कुमार मिश्र, ले. गुड्डू कुमार, डॉ. नारायण कुमार, सोएब आलम, रूपा कुमारी, समीमा खातून, ललिता कुमारी, डॉ. चंद्रशेखर मिश्र, डॉ. कपिलदेव कुमार पासवान, विद्यानंद यादव, शंभु कुमार, रत्नाकर भारती, लाल बहादुर यादव आदि उपस्थित थे।

25. 09. 2022

BNMU एनएसएस डे पर कार्यक्रम आयोजित* राष्ट्र के लिए जीने की प्रेरणा देता है एनएसएस : प्रधानाचार्य

*एनएसएस डे पर कार्यक्रम आयोजित*

राष्ट्र के लिए जीने की प्रेरणा देता है एनएसएस : प्रधानाचार्य

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) युवाओं को अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र से जोड़ता है। इसके माध्यम से हम अपने युवाओं को देश का आदर्श नागरिक बना सकते हैं।

यह बात प्रधानाचार्य डाॅ. कैलाश प्रसाद यादव ने कही। वे शनिवार को राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस (एनएसएस डे) पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय की एनएसएस प्रथम इकाई के तत्वावधान में किया गया।

*राष्ट्र के लिए जीने की प्रेरणा देता है एनएसएस*
उन्होंने कहा कि एनएसएस का‌ सूत्र वाक्य “मैं नहीं, आप” है। इससे हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र के लिए जीने की प्रेरणा मिलती है। यह युवाओं में मानवीय मूल्यों, नैतिक संस्कारों एवं सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देता है।

*राष्ट्र को कुछ दें*
उन्होंने कहा कि हमारा जीवन हमारे परिवार, समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर है। हम पूरे जीवन अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र से बहुत कुछ प्राप्त करते है। हमें भी राष्ट्र को कुछ देने का प्रयास करना चाहिए।

*देश में हैं 36 लाख से अधिक स्वयंसेवक*

कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि एनएसएस का संचालन भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा किया जाता है। देशभर में एनएसएस की लगभग 40 हज़ार ईकाइयाँ संचालित हैं और इसमें लगभग 36 लाख से अधिक स्वयंसेवक हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास है। इस दिशा में एनएसएस का काफी महत्व है, जो हमारे समग्र व्यक्तित्व के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

*व्यक्तित्व का तो विकास करेगा ही स्नातक की डिग्री भी दिलाएगा*
उन्होंने बताया कि आज हमारी नई शिक्षा नीति में एनएसएस को पाठ्यक्रम का अंग बना दिया गया है। आज स्नातक की पढ़ाई के दौरान दो वैकल्पिक विषयों के साथ-साथ तीसरा वैकल्पिक विषय के रूप में एनएसएस का चुनाव किया जा सकता है। इस प्रकार एनएसएस विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का तो विकास करेगा ही स्नातक की डिग्री भी दिलाएगा।

*होगा नए भारत का निर्माण*
उन्होंने कहा कि युवा समाज एवं राष्ट्र के आधार स्तंभ हैं। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही समाज-परिवर्तन एवं राष्ट्र-निर्माण का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। हमारे देश की हालत बदलेगी और नए भारत का निर्माण होगा।

*सेवा में ही शक्ति है*

अतिथियों का स्वागत करते हुए मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने कहा कि एनएसएस हमें आम लोगों से जोड़ता है और हमें सेवा की प्रेरणा देता है। यह बताता है कि सेवा ही सबसे बड़ी शक्ति है। हम सेवा के जरिए ही अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने राष्ट्रनायक स्वामी विवेकानंद, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और महाविद्यालय के संस्थापक महामना कीर्ति नारायण मंडल के चित्र पर पुष्पांजलि किया।

इस अवसर पर अतिथि व्याख्याता डॉ. राकेश कुमार, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, कि‌नशु कुमारी, प्रेरणा, मिथिलेश, अमित, विमल कुमार, खुशबू , मोनिका जोशी, शिवानी प्रिया, नूतन, पूनम, डिंपल कुमारी, कोमल कुमारी, जुगनू कुमारी, पुनीता, राजेश कुमार उदय कुमार, प्रवेश कुमार, अमित कुमार, कुमारी खुशबू, कोमल, जूही कुमारी, झूमा कुमारी, राहुल कुमार, राजेश कुमार, सोनम, ऐश्वर्या आनंद, अंजली कुमारी आदि उपस्थित थे।

BNMU सम्मान समारोह सह परिचर्चा का आयोजन। उच्च शिक्षा : वर्तमान एवं भविष्य पर परिचर्चा* मुहब्बत के दम पर ही विश्वगुरु बनेगा भारत : प्रोफेसर चंद्रशेखर

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय
लालूनगर, मधेपुरा-852113 (बिहार)
*सम्मान समारोह सह परिचर्चा का आयोजन*
*उच्च शिक्षा : वर्तमान एवं भविष्य पर परिचर्चा*
मुहब्बत के दम पर ही विश्वगुरु बनेगा भारत : प्रोफेसर चंद्रशेखर
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भारत ने दुनिया को प्रेम एवं अहिंसा का संदेश दिया है। इसी संदेश के कारण हम दुनिया में विश्वगुरु थे और आगे भी हम प्रेम एवं मुहब्बत के दम पर ही विश्वगुरु बनेंगे। हम नफरत के दम पर विश्वगुरु नहीं बन सकेंगे।

यह बात बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने कही।

वे शनिवार को बीएनएमयू, मधेपुरा में आयोजित सम्मान समारोह सह परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत को जाति-व्यवस्था ने गर्त में ढकेल दिया। जाति के कारण ही भारत विश्वगुरु के पद से च्युत हुआ है। हम जातिवाद को मिटा देंगे, तो पुनः विश्वगुरु बन जाएंगे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे बड़ा औजार है। शिक्षा दुनिया से अंधकार को मिटाकर प्रकाश ला सकते हैं। डॉ. अंबेडकर इसके सबसे बड़े प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान की भूमि है। हमारे नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय में दुनिया भर से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। लेकिन दुर्भाग्यवश हम अपनी विरासत को बचा नहीं पाए।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरू को ईश्वर माना गया है। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे सबों के बीच ज्ञान बांटने का काम करें।

उद्घाटनकर्ता सह अध्यक्ष कुलपति प्रोफेसर आरकेपी रमण ने कहा कि शिक्षा मंत्री हमारे विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य हैं। आपका इस विश्वविद्यालय से गहरा लगाव है। आप यहाँ लंबे समय तक अधिषद् (सीनेट) के भी सदस्य रहे हैं और आप पहले से ही विश्वविद्यालय के चप्पे-चप्पे से परिचित हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को विश्वविद्यालय की सभी बातें पता हैं और वे स्वयं हमेशा विश्वविद्यालय के विकास के लिए चिंतित रहते हैं। अतः आशा है कि वे विश्वविद्यालय की मांगों एवं उनकी अधूरी योजनाओं को पूरा करेंगे।

उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से स्नातकोत्तर विभागों में पद सृजित करने और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की मांग की। साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों को मान्यता दिलाने और विभिन्न अधूरी योजनाओं को पूरा करने की जरूरत बताई।

विषय प्रवेश करते हुए प्रति कुलपति प्रोफेसर आभा सिंह ने कहा कि शिक्षा को एक व्यावसाय का रूप दे दिया गया है। ऐन केन प्रकारेण लोग शिक्षक बन रहे हैं। शिक्षकों के लिए एक प्रतियोगिता परीक्षा हो।


उन्होंने कहा कि कक्षाओं का संचालन हो। शिक्षक छात्रों पर आरोप लगाते हैं और छात्र शिक्षक पर। दोनों से प्रति माह फीडबैक लिया जाए। शिक्षित लोग रोजगार के योग्य नहीं हैं।

स्वागत भाषण देते हुए कुलसचिव प्रोफेसर मिहिर कुमार ठाकुर ने कहा कि यह बीएनएमयू के लिए सबसे बेहतर समय है। आज माननीय शिक्षा मंत्री से लेकर माननीय कुलपति, माननीय प्रति कुलपति एवं कुलसचिव तक सभी इसी विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य हैं। सभी मधेपुरा एवं कोसी की धरती से हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथियों/पदाधिकारियों का अंगवस्त्रम्, पौधा एवं स्मृतिचिह्न से स्वागत किया गया। सबों ने महामना भूपेंद्र नारायण मंडल, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, पूर्व कुलपति महावीर प्रसाद यादव एवं पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा/ प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि की। शिक्षाशास्त्र विभाग की शिक्षिका एवं छात्राओं ने कुलगीत एवं स्वागत प्रस्तुत किया।

संचालन आईक्यूएसी के निदेशक प्रोफेसर नरेश कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर राजकुमार सिंह ने किया। राष्ट्रगान जन गण मन के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी नरेंद्र प्रसाद सिन्हा, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. उषा सिन्हा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. बीएन विवेका, डॉ. अशोक कुमार यादव, डॉ. ललन प्रसाद अद्री, डॉ. अरुण कुमार झा, डॉ. गजेन्द्र कुमार, डॉ. भूपेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. दीनानाथ मेहता, डॉ. अभय कुमार, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. कृष्णनंदन यादव, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. एसके पोद्दार, डॉ. अर्जुन प्रसाद यादव, डॉ. इम्तियाज अंजुम, डॉ. अरूण कुमार, डॉ. मनोज कुमार मनोरंजन, डॉ. अबुल फजल, डॉ. कामेश्वर कुमार, डॉ. शंकर कुमार मिश्र, डॉ. सुधांशु शेखर, शंभु नारायण यादव, डॉ. राजेश्वर राय, अखिलेश्वर नारायण, संजीव कुमार और बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित थे।

BNMU सम्मान समारोह सह परिचर्चा 24 सितंबर, 2022 को

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में शनिवार को अपराह्न दो बजे से सम्मान समारोह और उच्च शिक्षा : वर्तमान एवं भविष्य विषय पर परिचर्चा आयोजित है। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति डॉ. आर. के. पी. रमण करेंगे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि प्रति कुलपति डॉ. आभा सिंह होंगे। कुलसचिव डॉ. मिहिर कुमार ठाकुर स्वागताध्यक्ष होंगे।

उप कुलसचिव स्थापना डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू डॉ. राजकुमार सिंह की पुस्तक सोशल जस्टिस एंड रिजर्वेशन इन इंडियन पालिटी का लोकार्पण भी होगा।

BNMU रेड रिबन क्लब प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता संपन्न

*क्विज प्रतियोगिता आयोजित*

बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में शुक्रवार को प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में एड्स एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित प्रश्न पुछे गए। इसमें विभिन्न संगठनों का फूल फार्म और विभिन्न दिवसों की आयोजन तिथि से संबंधित प्रश्न शामिल थे। विद्यार्थियो ने बताया कि प्रश्नोत्तरी में डब्ल्यूएचओ, आरआरसी, नाको, एड्स आदि से संबंधित प्रश्नों की प्रधानता थी।

जिला नोडल पदाधिकारी सह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर बताया प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का परिणाम 26 सितंबर को जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले के अन्य महाविद्यालयों में भी दस अक्टूबर तक प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। महाविद्यालय स्तर पर चुने गए दो प्रतिभागी जिला स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेंगे। तदुपरांत 11 अक्टूबर को जिला स्तरीय प्रतियोगिता होगी। आगे प्रमंडल एवं राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतियोगिता होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. कैलाश प्रसाद यादव ने की। अतिथियों का स्वागत मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने की। क्विज मास्टर की भूमिका शोधार्थी सारंग तनय ने निभाई। कार्यक्रम के आयोजन में बीसीए विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. भारती, अतिथि व्याख्याता डॉ. राकेश कुमार, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान ने सहयोग किया।

प्रतियोगिता में मेघा कुमारी, अनुप्रिया, ममता कुमारी, सत्यम कुमार, नूतन कुमारी, विष्णु कुमार, राज कुमार, मिथिलेश कुमार, अमित कुमार, अभिमन्यु कुमार, राजा कुमार, राकेश कुमार, विमल कुमार, रोशन कुमार राज, रितिक रोशन, संदीप कुमार गुप्ता, राकेश कुमार, अमित कुमार, अमित कुमार, मिथलेश कुमार मंडल, विमल कुमार, राजेश कुमार, राहुल कुमार, उदय कुमार, प्रवेज कुमार, अमित कुमार, मिथिलेश कुमार मंडल, अमित कुमार, अभिमन्यु सिंह, अंकित राज, सुनील कुमार, अमित कुमार, उदय कुमार, राजा कुमार, विमल कुमार, राकेश कुमार, रोशन कुमार राज, अमित कुमार, राकेश कुमार, संदीप कुमार गुप्ता, रितिक रोशन, शैलेंद्र कुमार, विकास कुमार, कोमल कुमारी, निशा कुमारी, कोमल भारती, खुशबू कुमारी, खुशबू कुमारी, पुनीत कुमार, नूतन कुमारी, अंजली कुमारी, खुशी कुमारी, ऐश्वर्या आनंद, उमा कुमारी, प्रेरणा भारती पूनम कुमारी मनीषा कुमारी, शिवानी प्रिया, मनीषा जोशी, कोमल कुमारी, डिंपल कुमारी, ब्यूटी कुमारी, अंजली कुमारी, नेहा कुमारी आदि ने भाग लिया।

RRC प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 23 सितंबर, 2022 को

क्विज प्रतियोगिता आज

बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 : 30 बजे से प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। जिला नोडल पदाधिकारी सह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. कैलाश प्रसाद यादव करेंगे। उन्होंने बताया कि जिले के अन्य महाविद्यालयों में भी दस अक्टूबर तक प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। महाविद्यालय स्तर पर चुने गए दो प्रतिभागी जिला स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेंगे। तदुपरांत 11 अक्टूबर को जिला स्तरीय प्रतियोगिता होगी। आगे प्रमंडल एवं राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतियोगिता होगी।

BNMU समाज-परिवर्तन का दर्शन विषयक संवाद आयोजित। परिवर्तन शाश्वत सत्य है : डॉ. पूनम सिंह।

*परिवर्तन शाश्वत सत्य है : डॉ. पूनम सिंह*

परिवर्तन शाश्वत सत्य है और यह प्रकृति का नियम है। संपूर्ण ब्रह्मांड एवं पूरी प्रकृति परिवर्तनशील है। चारों ओर हरवक्त परिवर्तन हो रहा है और मानव भी इस परिवर्तन से अछूता नहीं है।

यह बात दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्षा एवं दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्षा प्रोफेसर डॉ. पूनम सिंह ने कही।

वे गुरुवार को ‘समाज-परिवर्तन का दर्शन’ विषयक ऑनलाइन-ऑफलाइन संवाद में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं।यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत दर्शनशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में किया गया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणि है और वही समाज का मूल है। पूरा समाज मनुष्य पर ही निर्भर करता है। जैसा मनुष्य होगा, वैसा ही समाज भी होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य से ही समाज बनता है। समाज-परिवर्तन के लिए मानव-परिवर्तन आवश्यक है। मानव ही परिवर्तन का प्रथम कारक है। पहले मानव‌ में में परिवर्तन होगा, तभी समाज-परिवर्तन होगा।

उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन दो प्रकार से होता है। यह क्रमिक रूप में हो, तो उसे विकास कहते हैं और एकाएक हो, तो वह क्रांति कहलाती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र सिन्हा ने कहा कि समाज बहुआयामी है और इसके कई पक्ष हैं। इसमें आर्थिक, राजनीति, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि पक्ष प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए समाज के सभी पक्षों में परिवर्तन जरूरी है। सिर्फ आर्थिक पक्ष में परिवर्तन से समाज-परिवर्तन नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर परिवर्तन से संबंधित दो सिद्धांत हैं- पूंजीवाद सिद्धांत एवं मार्क्सवाद का सिद्धांत। यह दोनों सिद्धांत एकांगी है। इन दोनों सिद्धांतों में आर्थिक पक्ष पर जोर दिया गया है, लेकिन अन्य पक्ष की उपेक्षा हुई है।

मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय, बोधगया की पूर्व कुलपति डॉ. कुसुम कुमारी ने कहा कि समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में व्यक्ति आधारभूत तत्व होता है। श्रेष्ठ व्यक्ति से श्रेष्ठ परिवार, श्रेष्ठ परिवार से श्रेष्ठ समाज और श्रेष्ठ समाज से श्रेष्ठ राष्ट्र निर्मित होता है।

उन्होंने कहा कि समाज-परिवर्तन में दर्शन की महती भूमिका है। दार्शनिकों की यह जिम्मेदारी है कि वे परिवर्तन को सही दिशा दें।

विशिष्ट अतिथि डॉ. आलोक टंडन ने कहा कि दार्शनिक जगत में समाज-दर्शन को दोयम दर्जे का माना गया है और इसकी उपेक्षा हुई है। हमारी परंपरा में व्यक्ति परिवर्तन के बहुत उदाहरण मिलते हैं, लेकिन समाज-परिवर्तन का ठोस अभिक्रिम नजर नहीं आता है। हमारे यहां समाज परिवर्तन के सामूहिक प्रयास कम हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि केवल व्यक्ति के बदलने से समाज नहीं बदलता है। समाज को बदलने के लिए उसके मूल ढांचे में बदलाव जरूरी है।

प्रधानाचार्य डाॅ. कैलाश प्रसाद यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन आयोजन सचिव डाॅ. सुधांशु शेखर और धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार ने किया। श्याम प्रिया, अमरेश कुमार अमर एवं डॉ. प्रियंका सिंह ने प्रश्न पुछे।

इस अवसर पर डॉ. विनोद नंद ठाकुर, डॉ. प्रभाष कुमार, डॉ. अनिल ठाकुर, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, चंदन कर्ण, डॉ. शंभु पासवान, प्रेम कुमार, डॉ. अमरेन्द्र कुमार, डॉ. शिवेंद्र प्रसाद सिंह, अमित कुमार मिथलेश कुमार मंडल विमल कुमार राजेश कुमार राहुल कुमार उदय कुमार प्रवेज कुमार अमित कुमार, दिलीप कुमार, दिलीप कुमार दिल, विनय कुमार विश्वास, डॉ. सविता कुमारी, डॉ. उज्जवल कुमार, कुमारी अर्चना, सारंग तनय, डॉ. अनिल ठाकुर, रूपा सिंह, मिथिलेश कुमार, मुकेश कुमार, पल्लवी राय, पूनम यादव, राजकुमार, प्रिंस यादव, रमेश, रंजन यादव, धनेश्वर खातून, शाहिदा खानम, शोभा कुमारी, सोनू कुमार, गौरव कुमार सिंह, गौतम कुमार, अभिषेक पांडेय, विद्यानंद यादव, विनय कुमार, सोनू कुमार, सपना जायसवाल, रोशन रंजन, श्वेता कुमारी, आदि उपस्थित थे।

डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्किल के तहत कुल बारह संवाद होने हैं। इसमें अप्रैल 2022) में सांस्कृतिक स्वराज (डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा, नई दिल्ली), मई में गीता का दर्शन (प्रो. जटाशंकर, यह प्रयागराज), जून में मानवता के लिए (प्रो. एन. पी. तिवारी), जुलाई में भारतीय दर्शन में जीवन-प्रबंधन (प्रो. इंदु पांडेय खंडुरी) और अगस्त में प्रौद्योगिकी और समाज (डॉ. आलोक टंडन) विषयक संवाद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। छठ संवाद गुरुवार को आयोजित हुआ।

ICPR समाज-परिवर्तन का दर्शन विषयक संवाद संपन्न। परिवर्तन शाश्वत सत्य है : डॉ. पूनम सिंह

*परिवर्तन शाश्वत सत्य है : डॉ. पूनम सिंह*

परिवर्तन शाश्वत सत्य है और यह प्रकृति का नियम है। संपूर्ण ब्रह्मांड एवं पूरी प्रकृति परिवर्तनशील है। चारों ओर हरवक्त परिवर्तन हो रहा है और मानव भी इस परिवर्तन से अछूता नहीं है।

यह बात दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्षा एवं दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्षा प्रोफेसर डॉ. पूनम सिंह ने कही।

वे गुरुवार को ‘समाज-परिवर्तन का दर्शन’ विषयक ऑनलाइन- ऑफलाइन संवाद में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं।यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत दर्शनशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में किया गया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणि है और वही समाज का मूल है। पूरा समाज मनुष्य पर ही निर्भर करता है। जैसा मनुष्य होगा, वैसा ही समाज भी होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य से ही समाज बनता है। समाज-परिवर्तन के लिए मानव-परिवर्तन आवश्यक है। मानव ही परिवर्तन का प्रथम कारक है। पहले मानव‌ में में परिवर्तन होगा, तभी समाज-परिवर्तन होगा।
उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन दो प्रकार से होता है। यह क्रमिक रूप में हो, तो उसे विकास कहते हैं और एकाएक हो, तो वह क्रांति कहलाती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र सिन्हा ने कहा कि समाज बहुआयामी है और इसके कई पक्ष हैं। इसमें आर्थिक, राजनीति, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि पक्ष प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए समाज के सभी पक्षों में परिवर्तन जरूरी है। सिर्फ आर्थिक पक्ष में परिवर्तन से समाज-परिवर्तन नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर परिवर्तन से संबंधित दो सिद्धांत हैं- पूंजीवाद सिद्धांत एवं मार्क्सवाद का सिद्धांत। यह दोनों सिद्धांत एकांगी है। इन दोनों सिद्धांतों में आर्थिक पक्ष पर जोर दिया गया है, लेकिन अन्य पक्ष की उपेक्षा हुई है।

मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय, बोधगया की पूर्व कुलपति डॉ. कुसुम कुमारी ने कहा कि समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में व्यक्ति आधारभूत तत्व होता है। श्रेष्ठ व्यक्ति से श्रेष्ठ परिवार, श्रेष्ठ परिवार से श्रेष्ठ समाज और श्रेष्ठ समाज से श्रेष्ठ राष्ट्र निर्मित होता है।

उन्होंने कहा कि समाज- परिवर्तन में दर्शन की महती भूमिका है। दार्शनिकों की यह जिम्मेदारी है कि वे परिवर्तन को सही दिशा दें।

विशिष्ट अतिथि डॉ. आलोक टंडन ने कहा कि दार्शनिक जगत में समाज-दर्शन को दोयम दर्जे का माना गया है और इसकी उपेक्षा हुई है। हमारी परंपरा में व्यक्ति परिवर्तन के बहुत उदाहरण मिलते हैं, लेकिन समाज-परिवर्तन का ठोस अभिक्रिम नजर नहीं आता है। हमारे यहां समाज परिवर्तन के सामूहिक प्रयास कम हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि केवल व्यक्ति के बदलने से समाज नहीं बदलता है। समाज को बदलने के लिए उसके मूल ढांचे में बदलाव जरूरी है।

प्रधानाचार्य डाॅ. कैलाश प्रसाद यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन आयोजन सचिव डाॅ. सुधांशु शेखर और धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार ने किया। श्याम प्रिया, अमरेश कुमार अमर एवं डॉ. प्रियंका सिंह ने प्रश्न पुछे।

इस अवसर पर डॉ. विनोद नंद ठाकुर, डॉ. प्रभाष कुमार, डॉ. अनिल ठाकुर, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, डॉ. उज्जवल कुमार, अमित कुमार, मिथलेश कुमार मंडल, विमल कुमार, राजेश कुमार, राहुल कुमार, उदय कुमार, प्रवेज कुमार, अमित कुमार, दिलीप कुमार दिल, कुमारी अर्चना,चंदन कर्ण, डॉ. शंभु पासवान, प्रेम कुमार, डॉ. अमरेन्द्र कुमार, डॉ. शिवेंद्र प्रसाद सिंह, विनय कुमार विश्वास, डॉ. सविता कुमारी, सारंग तनय, माधव कुमार, मुकेश कुमार, पल्लवी राय, पूनम यादव, राजकुमार, प्रिंस यादव, रमेश, रंजन यादव, धनेश्वर खातून, शाहिदा खानम, शोभा कुमारी, सोनू कुमार, गौरव कुमार सिंह, गौतम कुमार, अभिषेक पांडेय, विद्यानंद यादव, विनय कुमार, सोनू कुमार, सपना जायसवाल, रोशन रंजन, श्वेता कुमारी, आदि उपस्थित थे।

डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्किल के तहत कुल बारह संवाद होने हैं। इसमें अप्रैल 2022) में सांस्कृतिक स्वराज (डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा, नई दिल्ली), मई में गीता का दर्शन (प्रो. जटाशंकर, यह प्रयागराज), जून में मानवता के लिए (प्रो. एन. पी. तिवारी), जुलाई में भारतीय दर्शन में जीवन-प्रबंधन (प्रो. इंदु पांडेय खंडुरी) और अगस्त में प्रौद्योगिकी और समाज (डॉ. आलोक टंडन) विषयक संवाद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। छठ संवाद गुरुवार को आयोजित हुआ।

BNMU विश्व को है शांति की जरूरत : प्रधानाचार्य

विश्व को है शांति की जरूरत : प्रधानाचार्य
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शांति प्रेम एवं सदभाव की आदर्श स्थिति है। इसमें हिंसा एवं बैर अनुपस्थित होता है। आज पूरी दुनिया को शांति की जरूरत है।

यह बात प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) कैलाश प्रसाद यादव ने कही।

वे बुधवार को विश्वशांति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा की राष्ट्रीय सेवा योजना, इकाई प्रथम के तत्वावधान में किया गया।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अब तक हजारों युद्ध हो चुके हैं। आज भी कई देशों के बीच युद्ध की स्थिति है‌। ऐसे में युद्धविराम शांति की पहली शर्त है।

एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने कहा कि हजारों सालों से भारत विश्वगुरु एवं शांतिदूत रहा है। हमने दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम् एवं सर्वेभवन्तु सुखिन: का संदेश दिया है। आज दुनिया को इस संदेश की जरूरत है।

अतिथियों का स्वागत मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने किया। संचालन कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर और धन्यवाद ज्ञापन अतिथि व्याख्याता डॉ. राकेश कुमार ने किया।

इस अवसर पर शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, कोमल कुमारी, मोनिका कुमारी, जूही कुमारी, खुशबू, झूमा कुमारी, अंजली कुमारी, प्रेरणा भारती, शिवानी प्रिया, पूनम कुमारी, पुनिता कुमारी, नूतन कुमारी, जुगनू कुमारी, सोनम कुमारी, खुशबू कुमारी, सुरुचि कुमारी, किंशु कुमारी, ऐश्वर्या कुमारी, कुमारी खुशबू, कोमल आदि उपस्थित थे।