
क्या विद्यार्थियों को अब शिक्षक की जरूरत नहीं रही?
[यह पोस्ट किसी के विरुद्ध नहीं है । विद्या क़सम !] क्या विद्यार्थियों को अब शिक्षक की जरूरत नहीं रही? ——- हितेन्द्र पटेल

[यह पोस्ट किसी के विरुद्ध नहीं है । विद्या क़सम !] क्या विद्यार्थियों को अब शिक्षक की जरूरत नहीं रही? ——- हितेन्द्र पटेल

मेरे रचनात्मक संसार से कुछ समाचार प्रिय मित्रों, आज अपने रचनात्मक संसार की कुछ बातें आपसे साझा करने का मन हुआ। पुराने मित्र मेरी लेखन-यात्रा

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कर बांका की शिक्षा और शिक्षकों का मान बढ़ाने वाली खुशबू जी को बहुत बहुत बधाई। #teacheraward #education प्रिय मित्र डॉ. राहुल

वरिष्ठ पत्रकार भाई कुमार कृष्णन हुए डाॅ विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ सम्मान से सम्मानित जाने-माने और प्रख्यात पत्रकार भाई कुमार कृष्णन को बिहार हिंदी साहित्य

शिक्षक दिवस की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। -सुधांशु शेखर, असिस्टेंट प्रोफेसर (दर्शनशास्त्र) एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर, सुपौल (भू. ना. मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर, मधेपुरा)

कोई स्कूल का शिक्षक क्यों बनना चाहेगा जब वह स्कूल और वहां के विद्यार्थी शिक्षक दिवस पर याद करते समय प्राथमिकता क्रम में उन्हें सबसे

शिक्षण रोजी-रोजगार का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक धर्म है। हमें इस धर्म के निर्वहण हेतु हमेशा तत्पर रहना चाहिए। यह बात कुलपति डाॅ.

पुरानी यादें : बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ इकट्ठा की गई राशि और सामग्री कुलपति को समर्पित —+- 4 सितंबर, 2018 को बीएनएमयू , मधेपुरा की

*आजाद पुस्तकालय, कतराहा, मधेपुरा ( बिहार )* —————– *सम्मान-पत्र* मधेपुरा जिलांतर्गत मुरलीगंज प्रखंड के हरिपुरकला गांव के में जन्मे *प्रोफेसर राम किशोर प्रसाद रमण (आर.

*आजाद स्मृति आदर्श शिक्षक सम्मान से सम्मानित हुए पूर्व कुलपति प्रो. आर.के.पी. रमण* आजाद पुस्तकालय, कतराहा द्वारा शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को
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