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BNMU। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श

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*नई शिक्षा नीति पर सेमिनार/ वेबिनार आयोजित

क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरूआत है नई शिक्षा नीति : कुलपति

भारत की नई शिक्षा नीति भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई, 2020 को घोषित की गई है। यह शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरूआत है। हमें इसके सम्यक् क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर ठोस पहल करने की जरूरत है।

यह बात कुलपति प्रो. (डॉ.) राम किशोर प्रसाद रमण ने कही वे शनिवार को भारतीय शिक्षण मंडल एवं नीति आयोग के संयुक्त सौजन्य से शिक्षाशास्त्र विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित सेमिनार/ वेबिनार में अध्यक्षीय अभिभाषण दे रहे थे। इसका विषय “नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” था।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच सहयोग एवं समन्वय की जरूरत है। मौजूदा कानूनों में सुधार करने और कई नए कानूनों का निर्माण करना भी आवश्यक है। वित्तीय संसाधनों में वृद्धि एवं उसका समुचित प्रबंधन करने, पाठ्यक्रमों में बदलाव, नए शिक्षण संस्थानों की स्थापना और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति एवं उनका समुचित प्रशिक्षण भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा ही किसी भी देश एवं उसके नागरिकों की प्रगति का मुख्य आधार है। इसलिए भारत सरकार ने मौजूदा शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित बदलावों के लिए नई शिक्षा नीति की घोषणा की है। यह विद्यार्थियों को जाब सीकर नहीं, बल्कि जाॅब क्रिएटर बनाएगी।

 

भारतीयता पर आधारित है नई शिक्षा नीति : मुख्य अतिथि

मुख्य अतिथि नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, डालटनगंज (झारखंड) के कुलपति प्रो. (डॉ.) राम लखन सिंह ने कहा कि युगों-युगों से भारत में गुरूकुल शिक्षा पद्धति चल रही थी। हमारी यह प्राचीन शिक्षा पद्धति काफी विकसित थी और हम विश्वगुरू कहलाते थे। 1830 में केवल बिहार एवं बंगाल में एक लाख से अधिक गुरूकुल थे।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीति ने हमारी शिक्षा-पद्धति को हाशिये पर ला खड़ा किया। विशेषकर 1835 में आई मैकाले की शिक्षा नीति ने भारतीय शिक्षा नीति को काफी नुकसान पहुंचाया। अब पुनः भारत एवं भारतीयता को केंद्र में रखकर एक शिक्षा नीति बनाई गई है। यह नई शिक्षा नीति वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। यह हमारी प्राचीन शिक्षा नीति को पुनः प्रतिष्ठत करने का प्रयास है। इस शिक्षा नीति का क्रियान्वयन हमारी मुख्य चुनौति है। इसके क्रियान्वयन के लिए हमें शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचनाओं का विकास करना होगा और शिक्षकों कमी दूर करनी होगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत की भाषा, संस्कृति एवं परिवेश पर काफी ध्यान दिया गया है। हम मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और अपने परिवेश का प्रकटीकरण कर सकेंगे।

उन्होंने विवेकानन्द को उद्धृत करते हुए कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हमारे अंदर अतर्निहित क्षमताओं का प्रकटीकरण है।

भारतीय संस्कृति पर आधारित है नई शिक्षा नीति : उद्घाटनकर्ता

उद्धाटनकर्ता भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचन्द्र सिन्हा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय दर्शन एवं संस्कृति पर काफी ध्यान दिया गया है। यह भारतीय जीवन मूल्यों को केंद्र में रखकर बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर काफी ध्यान दिया गया है। मातृभाषा के माध्यम से ही सृजनात्मकता आती है। अन्य भाषाओं में सृजनशिलता नहीं आ पाती है। टी एस इलियट की तरह का कोई भारतीय अंग्रेजी में नहीं लिख पाया। संस्कृत में कालीदास, वाचस्पति मिश्र, मंडन मिश्र एवं गंगेश उपाध्याय की रचनाओं का काफी महत्व है। यदि ये लोग अंग्रेजी में लिखते तो शायद यह नहीं हो सकती।

रचनात्मकता केंद्रीय है नई शिक्षा नीति : प्रति कुलपति 

विशिष्ट अतिथि बीएनएमयू, मधेपुरा की प्रति कुलपति प्रो. (डॉ.) आभा सिंह ने भारत की मूल विशेषता उसकी आध्यात्मिकता है। आध्यात्मिकता एवं दर्शन ही रचनात्मकता का आधार है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति की यह बड़ी विशेषता है कि यह रटंत विद्या को छोड़कर रचनात्मकता पर जोर देती है। रचनात्मकता की शुरूआत बचपन से ही होती है। अतः स्कूली शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करानी होगी। पाठ्यक्रमों में सम्यक् परिवर्तन लाना होगा और मूल्याकंन पद्धति में आमूल-चूल बदलाव लाने होंगे। हमें श्रेष्ठ प्रतिभाओं को शिक्षण पेशे से जोड़ना होगा। इसके लिए शिक्षण पेशे को प्रतिष्ठा के साथ-साथ सुविधाओं से भी जोड़ना होगा।

उन्होंने कहा कि आज पारंपरिक शिक्षा हाशिए पर है। वोकेशनल एवं प्रोफेशनल कोर्स की बाढ़ आ गई है। लेकिन इन कोर्सों के बाद भी विद्यार्थियों को कोई अच्छा रोजगार नहीं मिल पाता है।

नई शिक्षा नीति से विश्वगुरू बनेगा भारत : मुख्य वक्ता

मुख्य वक्ता कोलहन विश्वविद्यालय, धनबाद (झारखंड) के डॉ. सुशील कुमार तिवारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूलमंत्र मानता है। शिक्षा में स्वदेशी भाव का जागरण ही इसका मुख्य उद्देश्य है। यह शिक्षा के क्षेत्र की सभी समस्याओं के सम्यक् समाधान का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि भारत में पुनः विश्व गुरु बनने की क्षमता है। नई शिक्षा नीति पुनः भारत को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। भारतीय शिक्षा का पुनरुत्थान करेगी और नालंदा, विक्रमशिला एवं तक्षशिला के गौरब को पुनः स्थापित करेगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षक को आचार्य कहते हैं। हमारे यहाँ आचार्यों का महत्व राजाओं से भी अधिक था। हमें पुनः शिक्षकों के अंदर आत्म गौरवबोध लाना है और समाज में शिक्षकों को समुचित प्रतिष्ठा दिलानी है।

इस अवसर पर सम्मानित वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के ओमप्रकाश सिंह, मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) उषा सिन्हा, पूर्व डीएसडब्लू प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र श्रीवास्तव एवं अकादमिक निदेशक प्रो. (डॉ.) एम. आई. रहमान ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में पार्वती विज्ञान महाविद्यालय की हेमा कुमारी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय निरीक्षक कला डाॅ. ललन प्रसाद अद्री ने की। संचालन जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने किया।

इस अवसर पर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सिंह, डाॅ. विनय कुमार चौधरी, डाॅ. अरूण कुमार, डाॅ. राम सिंह यादव, शिक्षण मंडल के विस्तारक आनंद कुमार, शोधार्थी सौरभ कुमार, अमरेश कुमार अमर, सौरभ कुमार चौहान, माधव कुमार, संजीव कुमार, मुकेश कुमार, संतोष कुमार आदि उपस्थित थे।

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NEP। 27 फरवरी को सामिनार/वेबिनार : नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

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भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर, मधेपुरा-852113 (बिहार)

भारतीय शिक्षण मंडल एवं नीति आयोग के संयुक्त सौजन्य से
राष्ट्रीय वेबिवनार/सेमिनार

*”नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ”*

तिथि : 27. 02. 2021(शनिवार)
समय : पूर्वाह्न 11:30 बजे से
स्थान : लैंग्वेज लैब, शिक्षाशास्त्र विभाग, ओल्ड कैम्पस, बीएनएमयू, मधेपुरा

उद्धाटनकर्ता : प्रो. (डॉ.) रमेशचन्द्र सिन्हा, अध्यक्ष, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली

अध्यक्षता : प्रो. (डॉ.) राम किशोर प्रसाद रमण, माननीय कुलपति, बीएनएमयू, मधेपुरा

मुख्य अतिथि : प्रो. (डॉ.) राम लखन सिंह, माननीय कुलपति, नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, डाल्टनगंज (झारखंड)
प्रो. (डॉ.) आभा सिंह, माननीया प्रति कुलपति, बीएनएमयू, मधेपुरा
मुख्य वक्ता : प्रो. (डॉ.) सुशील तिवारी, कोलहन विश्वविद्यालय, धनबाद (झारखंड)
सम्मानित वक्ता : प्रो. (डॉ.) उषा सिन्हा, अध्यक्ष, मानविकी संकाय, बीएनएमयू, मधेपुरा

प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र श्रीवास्तव, बीएनएमयू, मधेपुरा
प्रो. (डॉ.) एम. आई. रहमान, बीएनएमयू, मधेपुरा
स्वागत वक्तव्य : प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार, प्रोफेसर इंचार्ज, शिक्षाशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा

धन्यवाद ज्ञापन : डाॅ. कपिलदेव प्रसाद, कुलसचिव, बीएनएमयू, मधेपुरा

संचालन : डाॅ. सुधांशु शेखर, जनसंपर्क पदाधिकारी, बीएनएमयू, मधेपुरा

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BNMU। ट्रेडमार्क बना ‘माय बर्थ-माय अर्थ’

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ट्रेडमार्क बना ‘माय बर्थ-माय अर्थ’

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के शिक्षक संगठन बीएनमुस्टा के पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अभियान ‘माय बर्थ-माय अर्थ’ को ट्रेड मार्क मिल गया है। इस संबंध में भारत सरकार के पंजीकरण विभाग ने पत्र भेजकर बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। पत्र में कहा गया है कि अब ‘माय बर्थ-माय अर्थ’ नाम के साथ टीएम (ट्रेडमार्क) लिखा जा सकेगा।

मालूम हो कि बीएनमुस्टा के महासचिव डाॅ. नरेश कुमार ने जून 2017 में इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत विश्वविद्यालय के शिक्षकों, पदाधिकारियों एवं विविद्यार्थियों के जन्मदिन पर पौधारोपण किया जाता है। इस क्रम में अब तक तीन हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही कई पार्कों का भी निर्माण एवं जीर्णोद्धार भी किया गया है। इस अभियान से यूजीसी के द्वारा निदेशित सभी स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए निर्धारित दो कार्यक्रमों एईसीसी-I एईसीसी-II (दो सौ अंकों) में भी विद्यार्थियों को मदद मिल रही है। विभिन्न विभागों द्वारा विद्यार्थियों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जो पर्यावरण को समृद्ध एवं संरक्षण में मददगार है। इस योजना से प्रभावित होकर अन्य विद्यालय, महाविद्यालय एवं शिक्षण संस्थानों में भी ऐसे प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।

BNMU। एच. एस. काॅलेज, उदाकिसुनगंज में अभिनंदन समारोह आयोजित

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संस्थान को आगे बढ़ाएँ : कुलपति
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हमारे पुरखों ने हमारे क्षेत्र में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय का निर्माण कराया है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।

यह बात कुलपति प्रोफेसर डॉ. राम किशोर प्रसाद रमण ने कही। वे शनिवार को हरिहर साह महाविद्यालय, उदाकिसुनगंज, मधेपुरा में आयोजित अभिनंदन समारोह में उद्घाटनकर्ता के रूप में बोल रहे थे।

कुलपति ने कहा कि महामना हरिहर साह ने उदाकिसुनगंज के लिए शिक्षा का दीप जलाया है। हमें इस दीप को निरंतर जलाए रखना है। हम सबों को मिलकर इस महाविद्यालय को सजाना एवं संवारना है और आगे बढ़ाना है। इसके लिए सभी शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अभिभावकों को मिलकर काम करना है। विश्वविद्यालय इसमें हरसंभव मदद करेगा।

कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को कक्षा में लाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि कक्षा एवं किताब के बिना ज्ञान संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के नींव हैं। विद्यार्थियों के ऊपर ही संस्थान, समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्भर है। यदि विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षा में आने लगेंगे, तो अधिकांश समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा।

प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. आभा सिंह ने कहा कि सभी कार्य के आंतरिक एवं बाह्य दो पक्ष होते हैं। पहले मन में विचार आता है, फिर तदनुरूप कार्य संपादित होता है। इस महाविद्यालय के विकास का संकल्प हम सबों के मन में आ गया है, इसलिए अवश्य ही विकास होगा। महाविद्यालय की ओर से प्रस्ताव मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन नियमानुकूल मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि हमें यह सोचना है कि हम इस स्थिति में कैसे पहुँचे ? हमें अपनी कमियों को दूर करना है और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का सम्यक् निर्वहन करना है। हमारे बच्चों को समुचित मार्गदर्शन मिले और वे देश एवं सामाज के जिम्मेदार नागरिक बनें, यही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रधानाचार्य डॉ. रामनरेश सिंह ने बताया कि यह महाविद्यालय अनुमंडल क्षेत्र का एक मात्र अंगीभूत महाविद्यालय है। इसकी स्थापना 1956 ई. में हुई थी। यहाँ आर्टस के महज सात विषयों यथा- इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू एवं दर्शनशास्त्र की पढ़ाई होती है। यहाँ शिक्षकों के सोलह पद सृजित हैं। लेकिन मात्र चार स्थायी और तीन अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षकों के सभी पद भरने और कला के शेष विषयों सहित विज्ञान एवं वाणिज्य के विभिन्न विषयों की पढ़ाई शुरू करने की माँग की।

महिषी के विधायक गुंजेश्वर साह ने कहा कि इस कॉलेज के विकास के लिए वे स्थानीय विधायक के साथ सदन में मामला उठाएँगे। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में पढ़ाई-लिखेई का माहौल बनना चाहिए। इसके लिए भवन-निर्णय के इंतजार में बैठे रहना जरूरी नहीं है।

स्थानीय विधायक निरंजन कुमार मेहता ने कहा कि कॉलेज के विकास के लिए वे पूर्व में भी विधानसभा में मामला उठाया था। लेकिन तत्कालीन महाविद्यालय प्रशासन द्वारा सहयोग नहीं मिलने के कारण काम नहीं हो सका। वे फिर सदन में आवाज उठाकर इसके विकास के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने अपनी ओर से महाविद्यालय में दो हाॅल के निर्माण का आश्वासन दिया।

कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद ने कहा कि वर्तमान प्रधानाचार्य से उन्हें काफी आशा है। इनके नेतृत्व में महाविद्यालय का विकास होगा।

इसके पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अतिथियों को अंगवस्त्रम्, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप और सरवर मेंहदी ने किया।

इस अवसर पर कुलानुशासक विश्वनाथ विवेका, सिंडिकेट सदस्य लेफ्टिनेंट गौतम कुमार, विकास पदाधिकारी डाॅ. लंदन प्रसाद अद्री,  पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर, एनएसएस समन्वयक डाॅ. अभय कुमार, प्रधानाचार्य त्रय डाॅ. के. एस. ओझा, डॉ. अशोक कुमार एवं डॉ. माधवेन्द्र झा, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, सीनेटर द्वय बुलबुल कुमारी एवं रंजन कुमार, सी. एम. साइंस काॅलेज, मधेपुरा के डाॅ. संजय कुमार परमार, डाॅ. अजय कुमार, डाॅ. अरूण कुमार, डाॅ. एम. एस. रहमान, डाॅ. सुधा कुमारी, अमित कुमार मिश्र, इंजीनियर रीतेश प्रकाश, विश्वविद्यालय के कर्मी पृथ्वीराज यदुवंशी एवं बिमल कुमार आदि उपस्थित थे।

BNMU। 19-20 मार्च, 2021 को होगा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आयाम विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

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https://forms.gle/ARm23xn1vNJ4uyL76

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में 19-20 मार्च, 2021 को *सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आयाम* विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन सुनिश्चित है।

यह सेमिनार शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा संपोषित है।

यह सेमिनार ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों रूपों में आयोजित होगा। इसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा। मात्र पचास अतिथि एवं बाह्य प्रतिभागी ही कार्यक्रम में भौतिक रूप से उपस्थित हो सकेंगे।

* शेष प्रतिभागी गूगल मीट एवं यू-ट्यूब के माध्यम से कार्यक्रम में भाग ले सकेंगे।

*सभी प्रतिभागियों को उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से निःशुल्क स्मारिका एवं सर्टिफिकेट भेज दिया जाएगा।

*सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन गूगल फार्म भरना होगा।

ऑनलाइन पंजीकरण की तिथि 18 मार्च, 2021 और आलेख एवं शोध-सारांश भेजने की अंतिम तिथि 10 मार्च, 2021 तक निर्धारित की गई है।

प्रमुख उप विषय निम्न है-

01. राष्ट्रवाद की भारतीय अवधारणा
02. राष्ट्रवाद की यूरोपीय अवधारणा
03. वैदिककालीन राष्ट्रवाद
04. जैनकालीन राष्ट्रवाद
05. बौद्धकालीन राष्ट्रवाद
06. मुगलकालीन राष्ट्रवाद
07. ब्रिटिशकालीन राष्ट्रवाद
08. राष्ट्रवाद और पुनर्जागरण
09. राष्ट्रवाद और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
10. आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद
11. राष्ट्रवाद और अंतरराष्ट्रीयतावाद
12. भूमंडलीकरण और राष्ट्रवाद
13. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा
14. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के तात्विक-दार्शनिक आयाम
15. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सामाजिक आयाम
16. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आर्थिक आयाम
17. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के राजनीतिक आयाम
18. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के धार्मिक आयाम
19. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सांस्कृतिक आयाम
20. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के शैक्षणिक आयाम
21. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मनोवैज्ञानिक आयाम
22. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के भाषायी आयाम
23. राष्ट्रवाद और राष्ट्रभाषा
24. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समसामयिक संदर्भ
25. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक सहिष्णुता
26. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जातीय अस्मिता
27. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और समसामयिक समस्याएँ
28. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : समकालीन भारतीय दार्शनिकों की दृष्टि में
29. स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद
30. रवीन्द्रनाथ टैगोर का राष्ट्रवाद
31. महात्मा गाँधी का राष्ट्रवाद
32. वीर सावरकर का राष्ट्रवाद
33. डाॅ. भीमराव अंबेडकर का राष्ट्रवाद
34. पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रवाद

– *डाॅ. सुधांशु शेखर*
आयोजन सचिव
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BNMU। कुलपति की अध्यक्षता में सभी पदाधिकारियों की बैठक आयोजित

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आगामी 10 फरवरी को डाॅ. मदन मोहन सभागार, पटना में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श हेतु कुलपति प्रोफेसर डॉ. राम किशोर प्रसाद रमण की अध्यक्षता में एक बैठक केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में आयोजित की गई।

बैठक में विशेष रूप से विश्वविद्यालय अंतर्गत स्थापना, बजट, राज्य योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, केंद्रीय योजना (रूसा), महाविद्यालयों का संबंधन, वित्तरहित महाविद्यालयों को अनुदान, माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका/अवमाननावाद एवं अन्य से संबंधित मामलों पर चर्चा की गई।

कुलपति ने सभी पदाधिकारियों इन मामलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो दिनों के अंदर रिपोर्ट समर्पित करने का निदेश दिया है।

इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. आभा सिंह, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, सीसीडीसी डॉ. इम्तियाज अंजूम, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, अकादमिक निदेशक डॉ. एम. आई. रहमान, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार, वित्त पदाधिकारी रामबाबू महतो, बीएओ डॉ. एम. एस. पाठक, डॉ. नरेश कुमार, ललन प्रसाद अद्री, डॉ. मोहित कुमार घोष, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. गजेन्द्र कुमार, डॉ. अबुल फजल, डॉ. दीनानाथ मेहता, डाॅ. अभय कुमार, डाॅ. एस. के. पोद्दार, डॉ. शंकर कुमार मिश्र, डॉ. सुधांशु शेखर, डाॅ. राजेश्वर राय, डाॅ. विनोद कुमार यादव, कमल किशोर, रीतेश प्रकाश आदि उपस्थित थे।

BNMU। BSTF का गठन। नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की समस्याओं के समाधान पर चर्चा

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सभी मित्रों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ
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बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के अनुशंसोपरांत बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में नियुक्त सभी असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की एक आवश्यक बैठक बुधवार को विश्वविद्यालय केंद्रीय पुस्तकालय में संपन्न हुई।

बैठक में बीपीएससी सेलेक्टेड टीचर्स फोरम का गठन करने का निर्णय लिया गया और फोरम के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया। मैथिली विभाग, रमेश झा महिला महाविद्यालय, सहरसा के डाॅ. अभय कुमार को अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के डाॅ. सुधांशु शेखर को महासचिव एवं इतिहास विभाग, एम. एल. टी. काॅलेज, सहरसा के डाॅ. विवेक कुमार को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पूरी कार्यकारिणी के गठन हेतु अध्यक्ष एवं महासचिव को अधिकृत किया गया है।

अध्यक्ष एवं महासचिव ने बताया कि यह फोरम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अंतर्गत कार्य करेगा और संघ को रचनात्मक सहयोग देगा। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन में सहयोग करना है। फोरम नियमित रूप से ऑनलाइन क्लास, वेबिनार, सेमिनार आदि का आयोजन करेगा। नियमित रूप से गूगल मीट पर व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन होगा और एक बुलेटिन का भी प्रकाशन किया जाएगा।

शीघ्र ही फोरम की नियमावली (उद्देश्य एवं कार्य आदि) का निर्धारण किया जाएगा।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि फोरम नव नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की ससमय सेवासंपुष्टि, पीएच. डी. करने का अवसर, पीएच. डी. कराने का अवसर दिलाने हेतु प्रयास करेगा। साथ ही भविष्य निधि यथा एनपीएस, ओपीएस लागू करने, प्रोन्नति की आगामी प्रक्रिया में स्थान दिलाने एवं अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राध्यापकों की तरह पीएच. डी. वेतन वृद्धि का लाभ दिलाने हेतु संघर्ष किया जाएगा।

इसके अलावा एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी एवं एनसीसी ऑफिसर को प्रतिमाह पैकेट भत्ता का भुगतान, सुगमतापूर्वक मातृत्व अवकाश, शैक्षणिक अवकाश एवं अन्य अवकाशों का लाभ दिलाने, सेमिनार, कान्फ्रेंस, वर्कशाप आदि में भाग लेने के लिए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय द्वारा समुचित प्रोत्साहन राशि और महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में आवास की सुविधा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता मैथिली विभाग, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के डाॅ. उपेन्द्र प्रसाद यादव ने की।

संचालन दर्शनशास्त्र विभाग, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के डाॅ. सुधांशु शेखर ने किया।

इस अवसर पर स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, आरएम कॉलेज, सहरसा से डॉ. कविता कुमारी, डॉ. अमीश कुमार, आरजेएम काॅलेज, सहरसा से डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. बरुण कुमार, डॉ. संगीता सिन्हा, डॉ. अनिता कुमारी, एसएनएसआरकेएस काॅलेज, सहरसा से डॉ. कपिलदेव पासवान, एमएलटी कॉलेज, सहरसा से डॉ. संजीव कुमार झा, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. अभिषेकनाथ, डॉ. मयंक भार्गव, विनीत शर्मा, डॉ. बलबीर कुमार झा, बीएसएस कॉलेज, सुपौल से डॉ. सुमित कुमार, डॉ. शुभाशीष दास, एलएनएमएस काॅलेज, वीरपुर से डॉ. रामजी द्विवेदी, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. अभिजीत द्विवेदी, एचपीएस कॉलेज, निर्मली से डाॅ. रणधीर कुमार, डाॅ. पंकज कुमार, डॉ. कृष्णा चौधरी, डॉ. अतुलेश्वर झा, कुमार गंगेश गूंजन, डॉ. तुकीर हासमी, सुदिप्तो घोष, डॉ. रंजीत कुमार सिंह, एमएचएम काॅलेज, सोनवर्षा से डॉ. नानटून पासवान, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. मुन्ना कुमार, डॉ. ओमकारनाथ मिश्र, डॉ. श्याममोहन मिश्रा, केपी काॅलेज, मुरलीगंज से डाॅ. कविता गुप्ता, डाॅ. अमरेन्द्र कुमार, एचएस काॅलेज, उदाकिसुनगंज से डाॅ. अजय कुमार, टीपी कॉलेज, मधेपुरा से डाॅ. उपेन्द्र प्रसाद यादव, डॉ. स्वर्ण मणि, डॉ. विजया कुमारी, दीपक कुमार राणा, गुड्डू कुमार, खुशबू शुक्ला, डॉ. रोहिणी, डॉ. यासमीन रसीदी आदि उपस्थित थे।

BNMU। बैठक तीन फरवरी को

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सम्मान समारोह तीन को

बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के अनुशंसोपरांत बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में नियुक्त सभी असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की एक आवश्यक बैठक 03 फरवरी, 2021 (बुधवार) को पू. 11 बजे से विश्वविद्यालय केंद्रीय पुस्तकालय में सुनिश्चित है। जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि यह बैठक दो सत्रों में आयोजित होगी। प्रथम सत्र में सम्मान समारोह आयोजित है। इसमें माननीय कुलपति प्रोफेसर डॉ. आर. के. पी. रमण, माननीय प्रति कुलपति डाॅ. आभा सिंह एवं कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद का सम्मान किया जाएगा। नवनियुक्त शिक्षकों की टीम ने तीनों अतिथियों से मिलकर उन्हें आमंत्रण पत्र समर्पित किया। टीम में जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर, मनोविज्ञान विभाग के डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, आरजेएम काॅलेज, सहरसा के डाॅ. अभय कुमार, एमएलटी काॅलेज, सहरसा के डाॅ. संजीव कुमार झा, डाॅ. विवेक कुमार विनित शर्मा आदि शामिल थे।

जनसंपर्क पदाधिकारी ने बताया कि बैठक के द्वितीय सत्र में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के अनुशंसोपरांत बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में नियुक्त सभी असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की समस्याओं के समाधान पर विचार- विमर्श किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक उन्नयन में असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों की भूमिका निर्धारित की जाएगी। इसमें भाग लेने के लिए सभी असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों को वाट्सप के माध्यम से सूचना दी गई है। इस बैठक में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।

BNMU। हीरा की महत्ता…

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हीरा की महत्ता…
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बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (दर्शनशास्त्र) का परीक्षाफल दिसंबर 2016 में प्रकाशित किया गया और मैं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के लिए चयनित हुआ। यह सूचना मिलने पर मेरे एक परिचित प्राध्यापक ने मुझसे कहा कि जब मैं मधेपुरा जाऊँ, तो मैं सामान्य शाखा के प्रशाखा पदाधिकारी हेमंत कुमार उर्फ हेमंत हीरा से अवश्य मिलूँ; क्योंकि उनके शब्दों में, “हीरा के पास विश्वविद्यालय की सभी समस्याओं का समाधान है।”

मैंने इस विश्वविद्यालय में अपने तीन वर्ष 9 माह के कार्यकाल में इस बात को बड़ी सिद्दत से महसूस किया। उन्हें नियमों-परिनियमों की काफी जानकारी थी और उन्हें तथ्यों एवं परिस्थितियों को अपने मनोनुकूल बनाने में महारथ था। खास बात यह कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाती थी, उसे वे बखूबी निभाते थे।

हीरा बाबू शुरू से ही मुझे अपना छोटा भाई मानते थे और हमेशा मुझे उचित सलाह देते थे। मैं भी समय- समय पर उनसे मिलकर या उन्हें फोन करके उनका मार्गदर्शन लेता था। वे मुझे अक्सर कहते थे अपना विनम्र व्यवहार बनाए रखिए और निरंतर ज्ञानार्जन कीजिए। यही आपकी असली पूंजी होगी। कुलपति बदलते रहेंगे और पद भी आते-जाते रहेगा। लेकिन व्यवहार कुशलता और कार्यदक्षता का महत्व हमेशा बना रहेगा।

इधर, जब मुझे उपकुलसचिव अकादमिक की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली, तो मेरी उनसे निकटता काफी बढ़ गई। दरअसल उन्हें भी प्रभारी, निकाय एवं प्राधिकार के रूप में हमारे अकादमिक शाखा में ही एक छोटी-सी जगह उपलब्ध कराई गई थी। वे बाहर बरामदे में बैठकर देर रात तक काम करते रहते थे और कम्यूटर ऑपरेटर को इस्ट्रक्शन देकर लिखाते रहते थे। मैं अंदर में बैठकर उनके मुखारविंद से विभिन्न नियमों-परिनियमों का भाष्य और बीच-बीच में विश्वविद्यालय के विभिन्न ‘देवी-देवताओं’ के गुण-कर्म पर टीका-टिप्पणी सुनकर अपना ज्ञानवर्धन करता था।

हीरा बाबू के रहने से हमारी शाखा में हमेशा रौनक बनी रहती थी। वे हमेशा किसी-न-किसी बात को लेकर हमारे अकादमिक निदेशक प्रोफेसर डॉ. एम. आई. रहमान एवं मुझसे चर्चा करते थे और हमारे बीच अक्सर हँसी-मजाक भी होती थीं।

हीरा बाबू से हमें अकादमिक शाखा के अपने कार्यों में भी सहयोग मिलता था। गत वर्ष दूर्गा-पूजा एवं दीपावली की छुट्टी के बीच यहाँ के शोधार्थियों को 5 प्वाइंट सर्टिफिकेट वितरित करने में उनका सहयोग अविस्मरणीय है। साथ ही दिसंबर 2020 में आयोजित एकेडमिक काउंसिल की बैठक के आयोजन में भी मुझे उनसे काफी मदद मिली।

मैं यहाँ यह विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूँ कि हीरा बाबू चाय के काफी शौकीन थे। उन्होंने अकादमी शाखा में चाय बनाने की सभी व्यवस्था कर रखी थी और हमें प्रत्येक दिन उनके हाथों की बनी चाय पीने मिलती थीं। हम उनके आग्रह को कभी भी टाल नहीं पाते थे। एक-दो बार तो उनके कहने पर मैंने सहर्ष बिना चीनी वाली फिकी चाय भी पी ली थीं।

यहाँ मैं विशेष रूप से हीरा बाबू से जुड़े अपने हालिया दो संस्मरण का जिक्र करना चाहता हूँ, जिससे यह लगता है कि उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था। एक दिन जब मैं जल्दबाजी में उनकी चाय पिए बिना ही जाने लगा, तो उन्होंने कहा, “सुधांशु बाबू पी लीजिए, जब तक हैं। हम चले जाएँगे, तो याद कीजिएगा।” इसी तरह एक दिन वे अकादमी शाखा में मेरे सहयोगी बिमल किशोर बिमल को उनका बकाया रूपया जबरन लौटाने लगे और हँसते हुए बोले, “बिमल कर्जा नय राखबौ। अब हमरा जाय के दिन नजदीक आए गेल छौ।”

हेमंत हीरा जी लंबे समय से अस्वस्थ थे। इसके बावजूद वे निरंतर कार्य करते रहे। उन्होंने डाक्टर द्वारा आराम करने की सलाह को भी ‘इग्नोर’ कर सीनेट की बैठक के आयोजन में मदद किया। वे सीनेट के अधिवेशन के लिए बनी लेखनी एवं कार्यालयी कार्य समिति के वरीय सदस्य थे, जिसके संयोजन की जिम्मेदारी मुझे दी गई थी।

मुझे आज विशेषरूप से दो बातों का हमेशा के लिए मलाल रहेगा- एक, मुझे उनके ऐतिहासिक संस्मरणों को रिकार्ड करने या बीएनएमयू संवाद पर प्रसारित करने का अवसर नहीं मिल पाया। दो, उनके जीते जी अकादमिक शाखा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव दूर नहीं हो पाया।

अंत में, मैं हेमंत हीरा जी के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति दें।

सादर नमन।
– सुधांशु शेखर, जनसंपर्क पदाधिकारी एवं उप कुलसचिव अकादमिक, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा

BNMU। भूपेन्द्र नारायण मंडल की जयंती पर कार्यक्रम

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आज दिनांक 1 फरवरी रोज सोमवार को दिन के 2:00 बजे केपी कॉलेज मुरलीगंज प्रांगण में कॉलेज के शिक्षक एवं छात्रों द्वारा बी एन मंडल का 118 वी जयंती कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य श्री महेंद्र मंडल की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य श्री महेंद्र मंडल ने कहा कि भूपेंद्र नारायण मंडल जमींदार परिवार में जन्म लेकर गरीब ,पिछड़े, और दलितों की लड़ाई लड़ते रहे और देश स्तर पर समाजवादी नेता के रूप में अपना पहचान बनाए । उनके जीवन एवं कृतित्व हम शिक्षक एवं छात्रों को प्रेरणा लेने की जरूरत है।
कार्यक्रम पदाधिकारी एनएसएस केपी कॉलेज डॉ अमरेंद्र कुमार ने कहा कि आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के साथ बीएन मंडल का अहम योगदान रहा है जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
जयंती समारोह में वनस्पति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक सह समाजसेवी डॉ राजीव जोशी ने कॉलेज, विश्वविद्यालय के छात्रों से अपील किया कि जिस महामानव का आज जयंती मना रहे हैं उनके नाम से मधेपुरा को विश्वविद्यालय प्राप्त हुई यह गौरव की बात है । उनके उनके बताए रास्ते पर चलकर ही समाज को आगे एवं विकास के पथ पर लाया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ.त्रिदेव निराला, डॉ सुशांत कुमार, डॉ चंद्रशेखर आजाद, डॉ प्रतिक कुमार, पंकज शर्मा, डा रविंद्र कुमार , डॉ. मो.अली अहमद मंसूरी, डॉ एसके झा, डॉ राजेश कुमार, डॉ.शिबा शर्मा, प्रधान सहायक नीरज कुमार निराला, देवाशीष देव, गजेंद्र दास ,सिंटू, अभिमन्यु , शाहीन ,आदिल सुनील, आदि छात्र छात्राएं सम्मिलित शामिल थे।
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