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BNMU। दर्शन परिषद् अधिवेशन का गूगल फार्म एवं अन्य सूचनाएँ

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सूचना एवं आमंत्रण

42 वाँ वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन
दर्शन परिषद्, बिहार
(05-07 मार्च, 2021)

आयोजक : बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा (बिहार)

प्रायोजक : भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली
(शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली)

केंद्रीय विषय : ‘शिक्षा, समाज एवं संस्कृति’
(Education, Society and Culture)
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प्रिय आत्मन्!
हर्षपूर्वक सूचित करना है कि कोरोना संक्रमण के खतरों की वजह से स्थगित दर्शन परिषद्, बिहार का 42 वां वार्षिक अधिवेशन सम्मिश्र पद्धति (ऑफलाइन एवं ऑनलाइन) से 5-7 मार्च, 2021 को सुनिश्चित है। इसमें दर्शनशास्त्र सहित सभी विषयों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी और दर्शन में रूचि रखने वाले लेखक, पत्रकार, समाजकर्मी एवं आम नागरिक भाग ले सकते हैं। अधिवेशन में शैक्षणिक कार्यक्रमों का विवरण पूर्ववत है।

# अन्य प्रमुख सूचनाएँ :

01. अधिवेशन के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। एहतियात के तौर पर इसमें मात्र एक सौ अतिथि एवं बाह्य प्रतिभागी ही ऑफलाइन आमंत्रित किए जाएँगे। शेष प्रतिभागियों के लिए ऑनलाइन गूगल मीट का लिंक कार्यक्रम के एक दिन पूर्व उपलब्ध कराया जाएगा।

02. सभी प्रतिभागियों को उनके पते पर निःशुल्क रजिस्टर्ड डाक से स्मारिका एवं सर्टिफिकेट भेज दी जाएगी।

03. सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन गूगल फार्म भरना होगा। जिन प्रतिभागियों ने पूर्व में ऑफलाइन पंजीयन फार्म भरा है, उनके लिए भी गूगल फार्म भरना ज़रूरी होगा। गूगल फार्म का लिंक है- https://forms.gle/SDPUeBw8XjYcFUfYA

04. ऑनलाइन पंजीकरण और आलेख एवं शोध-सारांश भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी, 2021 तक निर्धारित की गई है।

05. सम्मेलन के शुभ अवसर पर एक स्मारिका का प्रकाशन सुनिश्चित है। इस हेतु कम-से-कम पाँच सौ शब्दों का शोध-सारांश (Abstract) और अधिकतम पाँच हज़ार शब्दों का शोध-आलेख (Full Paper) सादर आमंत्रित हैं।

06. प्रतिभागी सम्मेलन की चिंतनधारा ‘शिक्षा, समाज एवं संस्कृति’ के किसी भी आयाम पर अथवा अपनी पसंद के किसी भी विषय पर हिंदी या अंग्रेजी में शोध-सार/ शोध-आलेख भेज सकते हैं।
जो प्रतिभागी पूर्व में शोध-सार/ शोध-आलेख भेज चुके हैं, वे भी पुनः शोध-सार/ शोध-आलेख भेज दें, तो बड़ी कृपा होगी।

07. कृपया, हिंदी फाँट Krutidev010/ ShivaMedium एवं अंग्रेजी फाँट Times New Roman/ Arial का प्रयोग करें।
पीडीएफ या स्कैन फाइन नहीं भेजें।

08. पंजीयन शुल्क :
विद्यार्थी एवं शोधार्थी – 700/- और शिक्षक एवं अन्य – 1000/-

09. जो प्रतिभागी पूर्व में पंजीयन शुल्क जमा करा चुके हैं, वे गूगल फार्म में निर्धारित स्पेस में शुल्क की रसीद/ प्रमाण संलग्न करने का कष्ट करना चाहेंगे।

10. कृपया, स्मारिका में अपने संस्थान का विज्ञापन देकर इस ज्ञान-यज्ञ में सहयोग करने का कष्ट करना चाहेंगे।
विज्ञापन सहयोग राशि :
बैक कवर पेज- 50,000/-,
इनर कवर पेज- 30,000/-,
इनर फुल पेज- 20,000/-,
इनर हाफ पेज- 10,000/- एवं
इनर क्वार्टर पेज- 5,000/-

11. भुगतान विधि :
Cash/Cheque/DD/RTGS/NEEFT/
PayTM/PhonePay

12. भुगतान विवरण :
A/C Name : 42 nd Annual Conference,
Darshan Parishad, Bihar,
A/C No. : 38776988596,
IFS Code- SBIN0010339,
State Bank of India, BNMU Campus,
Madhepura- 852113 (Bihar),
PayTM / PhonePay- 7209030819

13. अधिक जानकारी के लिए :
Visit- www.bnmusamvad.com,
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E.mail- [email protected]

# निवेदक :

डाॅ. श्यामल किशोर
महामंत्री, दर्शन परिषद्, बिहार
अध्यक्ष, स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग
टी. पी. एस. काॅलेज, पटना (बिहार)

डाॅ. सुधांशु शेखर
आयोजन सचिव, 42 वाँ अधिवेशन
असिस्टेंट प्रोफेसर (दर्शनशास्त्र) एवं जनसंपर्क पदाधिकारी
बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा (बिहार)

https://forms.gle/SDPUeBw8XjYcFUfYA

BNMU। शहीद चुल्हाय मंडल को नमन

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मधेपुरा के मनहारा गाँव में स्वतंत्रता संग्राम के शहीद सेनानी चुल्हाय मंडल जी की जयंती पर शत-शत नमन.💐
भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अगस्त क्रांति के अमर शहीद चुल्हाय मंडल की 101वीं जयंती के अवसर पर उन्हें याद रखना हम युवाओं की जिम्मेदारी है शहीद चुल्हाय ने आजादी के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दी जिसे हम सबों को मिलकर अक्षुण्ण रखना होगा तथा उनके सपनों का भारत बनाना होगा |
शहीद चुल्हाय वसूल के पक्के आदमी थे, उन्होंने जान गवां दी लेकिन अंग्रेजों से समझौता नहीं किया |


यूँ तो मधेपुरा सामाजिक परिवर्तन की धरती रही है लेकिन आज से क्रान्तिवीर शहीदों की धरती भी कही जायेगी | उन्होंने कहा कि अगस्त क्रांति में मधेपुरा-सहरसा के कुल 9 शहीदों में केवल दो शहीदों- चुल्हाय मंडल और धीरो राय का शव उनके परिवार को नहीं उपलब्ध कराया गया | नेपाल के ‘बकरो के टापू’ पर डॉ.लोहिया और जयप्रकाश क्रमशः ट्रांसमीटर ऑपरेटर एवं आजाद दस्ते को ट्रेनिंग देने में लगे थे | इनसे निर्देश प्राप्त कर 25 जनवरी 1943 का मनहरा गांव आये प्रखर सेनानी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल | उन्हीं के मशविरानुसार एक धोती ओढ़े-पहने 26 जनवरी को सवेरे मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग परिसर में पहुंच गये क्रांतिवीर शहीद चुल्हाय और ज्योंहि तिरंगा लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ बोले कि गोरे सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया | पहले तो रस्सी से पैरों को छान दिया और मार-मारकर लहू-लुहान कर दिया | फिर डाकबंगला रोड होकर घसीटते हुए डाकबंगला परिसर के ऊंचे दरख्त में उन्हें उल्टा लटका दिया गया और दो दिन-दो रात तक उस कड़ाके की ठंड में बिना वस्त्र के लाठियों की वर्षा में नहाता रहा चुल्हाय | उस क्रांतिवीर चुल्हाय की नाक-आँख-कान और मुँह से खून निकलता रहा……. और वह हमेशा बन्दे मातरम……. बोलता ही रह गया | अधमरा हो जाने पर जब चुल्हाय को 29 जनवरी को जेल ले जाया जा रहा था तब रास्ते में तीन जगह उसके मुंह से खून का ‘थक्का’ गिरा……..| 30 जनवरी की रात को कदाचित वह शहीद हो गया था फिर भी इलाज कराने के बहाने बाहर लेकर चला गया | उसकी लाश भी घरवालों को नहीं मिली | जब देश 16 अगस्त को आजादी का जश्न मना रहा था तब मधेपुरावासियों ने वहाँ-वहाँ शहीद चुल्हाय द्वार बनाकर श्रद्धांजलि निवेदित किया, जहाँ-जहाँ खून का थक्का गिरा था………| और उसके बाद से लगभग चार दशक तक वह शहीद इतिहास के पन्नों से गायब हो गया | मधेपुरा उसकी शहादत को भी भूल गया |
लम्बे अंतराल के बाद मधेपुरा जिला उद्घाटन की तिथि 9 मई 1981 को सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के अध्यक्षीय भाषण में “शहीद चुल्हाय मंडल” का नाम पहली बार सुना और तब से इस शहीद के क्रिया-कलापों को बुद्धिजीवियों तक पहुंचाने हेतु कुछ विद्वानों ने भू .ना.मंडल विश्वविद्यालय में “शहीद चुल्हाय उद्यान” बनाकर एवं डाक बंगला रोड का नामकरण “शहीद चुल्हाय मार्ग।

– राहुल यादव, अध्यक्ष, माया, मधेपुरा, बिहार

BNMU। मीडिया रिपोर्ट। अधिषद् की बैठक

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BNMU। मीडिया रिपोर्ट। दर्शन परिषद् का अधिवेशन 5 मार्च, 2021 को

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BNMU। दर्शन परिषद्, बिहार का सम्मेलन 5 मार्च, 2021 को

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दर्शन परिषद्, बिहार का सम्मेलन 5 मार्च, 2021 को

दर्शन परिषद्, बिहार का 42 वां वार्षिक अधिवेशन वर्ष 5-7 मार्च, 2021 को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित किया जाएगा। यह अधिवेशन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा संपोषित है। इसका केंद्रीय विषय ‘शिक्षा, समाज एवं संस्कृति’ है। इस पर देश के कई राज्यों के वरिष्ठ प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी गहन विचार-विमर्श करेंगे। यह जानकारी आयोजन सचिव सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने दी।

उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में पहली बार दर्शन परिषद् का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। साथ ही वर्तमान कुलपति प्रोफेसर डाॅ. राम किशोर प्रसाद रमण एवं प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह के कार्यकाल में आयोजित होने वाला यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। कुछ दिनों पूर्व ही अपने सीनेट अभिभाषण में कुलपति ने इसकी घोषणा की थीं।

*गत वर्ष मार्च में ही होना था अधिवेशन*

मालूम हो कि पूर्व में यह अधिवेशन मार्च 2020 में ही आयोजित होने वाला था और इसके लिए आयोजन समिति ने सभी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं। लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरों के मद्देनजर इसे आखिरी समय में स्थगित करना पड़ा था।

*विचार-विमर्श के बाद तय की गई है तिथि*
डाॅ. शेखर ने बताया कि बीएनएमयू प्रशासन एवं दर्शन परिषद्, बिहार के पदाधिकारियों के बीच विचार-विमर्श बाद 5-7 मार्च की तिथि तय की गई है। इस संबंध में कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने दर्शन परिषद्, बिहार के महामंत्री डॉ. श्यामल किशोर को पत्र भी प्रेषित कर दिया है। आगे विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों में कार्यरत दर्शनशास्त्र के शिक्षकों एवं शोधार्थियों से गहन विचार-विमर्श कर आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी।

*आलेख भेजने की तिथि 31 जनवरी तक*
यह अधिवेशन ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों रूपों में आयोजित होगा। इसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा। मात्र एक सौ अतिथि एवं बाह्य प्रतिभागी ही कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाएँगे। शेष प्रतिभागियों को उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से निःशुल्क स्मारिका एवं सर्टिफिकेट भेज दी जाएगी। सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन गूगल फार्म भरना होगा। जिन प्रतिभागियों ने पूर्व में पंजीयन करा लिया है, उनके लिए भी गूगल फार्म भरना ज़रूरी होगा।

*कार्यक्रम विवरण*
अधिवेशन का केंद्रीय विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति है। इसके प्रधान सभापति तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. केदारनाथ तिवारी होंगे। साथ ही अधिवेशन में पाँच विभागों यथा- तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, समाज दर्शन, धर्म दर्शन एवं नीति दर्शन के अंतर्गत शोध-पत्र की प्रस्तुति होगी। बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाँच विद्वान इन विभागों की अध्यक्षता करेंगे।

साथ ही ‘बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत’ और ‘गाँधी-150 : विमर्श और विकल्प’ विषयक दो संगोष्ठी भी आयोजित की गई है। इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो दर्जन विद्वान वक्ता भाग लेंगे।

इसके अलावा देश के बारह चुने हुए विद्वानों का विशेष व्याख्यान भी होगा। इनमें डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा एवं डॉ. एचएस प्रसाद (नई दिल्ली), डॉ. जटाशंकर (इलाहाबाद), डॉ. सभाजीत मिश्र (गोरखपुर), डॉ. सोहनराज तातेड़ (जोधपुर), डॉ. सरस्वती मिश्रा (राची), डॉ. महेश सिंह (आरा), डॉआइएन सिन्हा, डॉ. एनपी तिवारी एवं डॉ. पूनम सिंह (पटना), डॉ. प्रभु नारायण मंडल एवं डॉ. शंभू प्रसाद सिंह (भागलपुर) के नाम शामिल हैं। व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डॉ. रामजी सिंह (भागलपुर) करेंगे।

*दर्शन परिषद्, बिहार का सम्मेलन 5 मार्च को*

दर्शन परिषद्, बिहार का 42 वां वार्षिक अधिवेशन वर्ष 5-7 मार्च, 2021 को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित किया जाएगा। यह अधिवेशन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा संपोषित है। इसका केंद्रीय विषय ‘शिक्षा, समाज एवं संस्कृति’ है। इस पर देश के कई राज्यों के वरिष्ठ प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी गहन विचार-विमर्श करेंगे। यह जानकारी आयोजन सचिव सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने दी।

उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में पहली बार दर्शन परिषद् का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। साथ ही वर्तमान कुलपति प्रोफेसर डाॅ. राम किशोर प्रसाद रमण एवं प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह के कार्यकाल में आयोजित होने वाला यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। कुछ दिनों पूर्व ही अपने सीनेट अभिभाषण में कुलपति ने इसकी घोषणा की थीं।

*गत वर्ष मार्च में ही होना था अधिवेशन*

मालूम हो कि पूर्व में यह अधिवेशन मार्च 2020 में ही आयोजित होने वाला था और इसके लिए आयोजन समिति ने सभी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं। लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरों के मद्देनजर इसे आखिरी समय में स्थगित करना पड़ा था।

*विचार-विमर्श के बाद तय की गई है तिथि*
डाॅ. शेखर ने बताया कि बीएनएमयू प्रशासन एवं दर्शन परिषद्, बिहार के पदाधिकारियों के बीच विचार-विमर्श बाद 5-7 मार्च की तिथि तय की गई है। इस संबंध में कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने दर्शन परिषद्, बिहार के महामंत्री डॉ. श्यामल किशोर को पत्र भी प्रेषित कर दिया है। आगे विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों में कार्यरत दर्शनशास्त्र के शिक्षकों एवं शोधार्थियों से गहन विचार-विमर्श कर आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी।

*आलेख भेजने की तिथि 31 जनवरी तक*
यह अधिवेशन ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों रूपों में आयोजित होगा। इसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा। मात्र एक सौ अतिथि एवं बाह्य प्रतिभागी ही कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाएँगे। शेष प्रतिभागियों को उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से निःशुल्क स्मारिका एवं सर्टिफिकेट भेज दी जाएगी। सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन गूगल फार्म भरना होगा। जिन प्रतिभागियों ने पूर्व में पंजीयन करा लिया है, उनके लिए भी गूगल फार्म भरना ज़रूरी होगा। ऑनलाइन पंजीकरण और आलेख एवं शोध-सारांश भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी, 2021 तक निर्धारित की गई है।

*कार्यक्रम विवरण*
अधिवेशन का केंद्रीय विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति है। इसके प्रधान सभापति तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. केदारनाथ तिवारी होंगे। साथ ही अधिवेशन में पाँच विभागों यथा- तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, समाज दर्शन, धर्म दर्शन एवं नीति दर्शन के अंतर्गत शोध-पत्र की प्रस्तुति होगी। बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाँच विद्वान इन विभागों की अध्यक्षता करेंगे।

साथ ही ‘बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत’ और ‘गाँधी-150 : विमर्श और विकल्प’ विषयक दो संगोष्ठी भी आयोजित की गई है। इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो दर्जन विद्वान वक्ता भाग लेंगे।

इसके अलावा देश के बारह चुने हुए विद्वानों का विशेष व्याख्यान भी होगा। इनमें डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा एवं डॉ. एचएस प्रसाद (नई दिल्ली), डॉ. जटाशंकर (इलाहाबाद), डॉ. सभाजीत मिश्र (गोरखपुर), डॉ. सोहनराज तातेड़ (जोधपुर), डॉ. सरस्वती मिश्रा (राची), डॉ. महेश सिंह (आरा), डॉआइएन सिन्हा, डॉ. एनपी तिवारी एवं डॉ. पूनम सिंह (पटना), डॉ. प्रभु नारायण मंडल एवं डॉ. शंभू प्रसाद सिंह (भागलपुर) के नाम शामिल हैं। व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डॉ. रामजी सिंह (भागलपुर) करेंगे।

BNMU। वार्षिक कैलेंडर एवं कार्यक्रम तालिका

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वार्षिक कैलेंडर एवं कार्यक्रम तालिका
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राष्ट्रीय सेवा योजना, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा की ओर से पहली बार यह कैलेन्डर प्रकाशित किया गया है। बहुत-बहुत धन्यवाद।
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————————–कार्यक्रम तालिका—————-

:- जनवरी – :
03 सावित्रीबाई फुले जयंती, 10 विश्वविद्यालय स्थापना दिवस, 12-18 युवा सप्ताह, 20 गुरूगोविंद सिंह जयंती, 23 सुभाषचंद्र बोस, 30 गाँधी शहादत दिवस

:- फरवरी -:
01 भूपेंद्र नारायण मंडल जयंती, 11 पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति दिवस, 12 स्वामी दयानंद जयंती, 21 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, 27 संत रविदास जयंती, 28 राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

:- मार्च -:
07 महाविद्यालय संस्थापक कीर्ति नारायण मंडल पुण्यतिथि, 08-14 अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह, 22 बिहार दिवस

:- अप्रैल -:
07-13 विश्व स्वास्थ्य सप्ताह, 14 डाॅ. अंबेडकर जयंती, 25 महावीर जयंती

:- मई -:
01 मजदूर दिवस, 21 आतंकवाद निरोध दिवस, 26 बुद्ध जयंती, 31 तम्बाकू निरोध दिवस

:- जून -:
05 विश्व पर्यावरण दिवस, 21 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 24 कबीर जयंती

:- जुलाई -:
01-07 वन महोत्सव, 04 विवेकानंद स्मृति दिवस, 11 विश्व जनसंख्या दिवस

:- अगस्त -: 07 महाविद्यालय संस्थापक कीर्ति नारायण मंडल जयंती, 15 स्वतंत्रता दिवस, 20 सदभावना दिवस, 28 मद्य निषेध दिवस

:- सितंबर -:
01-07 राष्ट्रीय पोषण सप्ताह, 05 शिक्षक दिवस, 08 अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 11 अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस, 24 राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस

:- अक्तूबर -:
01 रक्तदान दिवस, 02 गाँधी जयंती, 31 राष्ट्रीय एकता दिवस

:- नवंबर -:
11 शिक्षा दिवस, 14 बाल दिवस, 19-25 क़ौमी एकता सप्ताह, 26 संविधान दिवस

:- दिसंबर -:
01 एड्स दिवस, 03 डाॅ. राजेंद्र प्रसाद जयंती, 06 डाॅ. अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस, 10 विश्व मानवाधिकार दिवस, 25- सुशासन दिवस

BNMU। बारह मालिक पूंजी नाश!

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बारह मालिक पूंजी नाश!
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मेरा बचपन मेरे नानी घर माधवपुर, खगड़िया (बिहार) में बीता है और स्वाभाविक रूप से ननिहाल परिवार का मेरे जीवन-दर्शन पर अमिट छाप है।

विशेष रूप से स्वतंत्रता सेनानी नाना जी (राम नारायण सिंह) द्वारा सुनाई गई धर्मग्रंथों के किस्से एवं स्वतंत्रता आंदोलन की कहानियाँ और नानी माय (सिया देवी) की कहावतों का मेरे ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा है। इन किस्से- कहानियों एवं कहावतों में मुझे जीवन एवं जगत को समझने का सूत्र मिलता है।

मैंने लाॅकडाउन के दौरान नानी की दर्जनों कहावतों को वर्णानुक्रम से लिखा था, लेकिन मोबाइल की तकनीकी खराबी के कारण वह मिट गया। फिर से लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। तैयार होने पर, आप सबों की सेवा में प्रस्तुत करूँगा।

अभी आज मुझे नानी जी की एक कहावत याद आ रही है, “बारह मालिक पूंजी नाश।” आशय स्पष्ट है! शेष आप सभी समझदार हैं, विस्तार अनपेक्षित है!!

संदर्भ : घर-परिवार, संस्था-संस्थान, राज्य-राष्ट्र।
चित्र : मैं नानी माय के साथ भागलपुर में। तब इनकी तबियत ठीक नहीं थी। कुछ ही दिनों बात उनका महापरिनिर्वाण हो गया।

BNMU। विवेकानन्द जयंती पर कार्यक्रम

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महान दार्शनिक, वेदांत दर्शन के पुरोधा, मातृभूमि के उपासक, विरले कर्मीयोगी, करोड़ों युवाओं के प्रेरणा स्रोत व प्रेरणा-पुंज स्वामी विवेकानंद की 158 वी जयंती समारोह राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में दिनांक 12 जनवरी, मंगलवार को के.पी महाविद्यालय प्रांगण में एनएसएस इकाई द्वारा काफी धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार मल्लिक ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार केवल भारतीय समाज ही नहीं बल्कि समूची दुनिया के लिए मार्गदर्शक हैं। वे अपने विचारों मेें  मानवता और अध्यात्म के जिन स्वरूपों की व्याख्या करते हैं, वे अतुलनीय हैं। आज इस पुण्यात्मा की जयंती पर उन्हें स्मरण करने का सबसे अच्छा अच्छा तरीका यही होगा कि हम उनकी कही बातें आत्मसात करने का संकल्प लें।

वही महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी, डॉ अमरेंद्र कुमार ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी और उनसे जुड़े मुख्य पहलू पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रतीक कुमार ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक महेंद्र मंडल, डॉ. प्रतीक कुमार, डॉ. चंद्रशेखर आजाद, डॉ. रविंदर कुमार, डॉ. मोहम्मद अली मंसूरी, डॉ. त्रिदेव निराला, डॉ. सुशांत, डॉ. विजय पटेल, डॉ. संजय कुमार, प्रधान सहायक नीरज कुमार निराला, संत, राजीव, अभिमन्यु, पिंटू, सुनील, मनीष, साहिन आदि उपस्थित थे।

BNMU। अधिषद् की बैठक संपन्न। कुलपति ने प्रस्तुत किया अध्यक्षीय अभिभाषण एवं प्रगति प्रतिवेदन। प्रति कुलपति ने प्रस्तुत किया बजट

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*विश्वविद्यालय हमारा मंदिर : कुलपति*
पिछले एक वर्ष से पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना से ग्रस्त और त्रस्त है। इसका शिक्षा व्यवस्था पर भी काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद हम विश्वविद्यालय के समग्र विकास एवं शैक्षणिक उन्नयन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। यह विश्वविद्यालय ही हमारे लिए मंदिर है। विश्वविद्यालय है, तो हम हैं। यह बात बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति प्रोफेसर डॉ. राम किशोर प्रसाद रमण ने कही। वे मंगलवार को 21 वें अधिषद् अधिवेशन के अवसर पर अध्यक्षीय अभिभाषण एवं प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहे थे।

कुलपति ने कहा कि 10 जनवरी, 1992 को इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थीं और गत 18 मार्च, 2018 में इसे विभाजित कर पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया का गठन किया गया है और अब हमारे विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र कोसी प्रमंडल के तीन जिलों मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल तक ही है। 1992 से अब तक विश्वविद्यालय की विकास यात्रा में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। मैंने इस विकास यात्रा को करीब से देखा है और आप सभी ने भी इसे देखा-सुना है। हमसे भी अधिक यह सदन इस विकास यात्रा का साक्षी है।इस विश्वविद्यालय को बेहतर से बेहतर बनाया जाए।

कुलपति ने कहा कि  विश्वविद्यालय अधिनियम की पुस्तक ही हमारी गीता है- बाइबिल है और कुरान है। हम इसी पुस्तक को साक्षी मानकर नियम-परिनियम के अनुरूप कार्य करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। तदनुसार सभी निर्णय सम्बन्धित समितियों एवं निकायों की सहमति से किए जा रहे हैं। हम वित्तीय स्वच्छता एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के आदर्शों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।

अंत में कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक उन्नयन हेतु विद्यार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान एवं उन्हें पुनः कक्षा तक लाना, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र निष्पादन और अभिभावकों का विश्वविश्वविद्यालय एवं इसकी कार्य-संस्कृति में विश्वास जगाना ही उनका सर्वोच्च लक्ष्य है। यही उनका दायित्व है और यही उनका कर्तव्य भी है। उन्होंने इसमें सबों से समवेत रूप से इसमें सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से भी अपील की कि वे सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को निभाएँ और अपने-अपने स्वधर्म का पालन करें। जो जहाँ हैं, वहाँ विश्वविद्यालय के बारे में सोचें और विश्वविद्यालय के हित में काम करें। हम सब मिलकर काम करेंगे, तो विश्वविद्यालय की यश, कीर्ति एवं ख्याति दूर-दूर तक जाएगी।

*अध्यक्षीय अभिभाषण की मुख्य बातें*

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु हम नैक से मूल्यांकन कराने हेतु प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए सभी काॅलेजों को विश्वविद्यालय की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर में नामांकन का अधिकाधिक अवसर देने हेतु सीट वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। स्नातकोत्तर इतिहास,  अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, हिंदी एवं अंग्रेजी आदि विषयों में  भी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पद-सृजन हेतु प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मुख्यालय एवं स्नातकोत्तर पश्चिमी परिसर, सहरसा में शेष कुछ विषयों जिला मुख्यालयों अवस्थित अंगीभूत    महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर कुछ विषयों की पढ़ाई शुरू करने हेतु अभिषद् से स्वीकृति प्राप्त है। व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है। हम कई नए पाठ्यक्रमों की शुरूआत करने जा रहे हैं। एम. बी. ए. एवं एम. सी. ए. की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में त्वरित कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर गाँधी विचार की पढ़ाई करने हेतु पूर्व निर्णय के आलोक में नियम-परिनियम एवं पाठ्यक्रम निर्माण समिति का गठन किया जाएगा। पी. जी. डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एण्ड मास कम्यूनिकेशन, पी. जी. डिप्लोमा इन योगा थेरेपी, पी. जी. डिप्लोमा इन स्ट्रेस मैनेजमेन्ट तथा पी. जी. डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेन्ट कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया को गति देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही पी. जी. डिप्लोमा इन हाउसिंग सेक्टर एण्ड अर्बन डेवलपमेंट स्टडीज कोर्स शुरू करने की भी योजना है। गायत्री शक्ति पीठ, सहरसा से ह्यूमन काॅन्शसनेश, योगा एंड अल्टरनेटिव थेरेपी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि शोध की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। राजभवन के निदेशानुसार स्थापना काल से लेकर अब तक के शोध/ पी-एच. डी. उपाधि से संबंधित विस्तृत सूचनाएँ और उनका सारांश विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाना है। शोध गुणवत्ता को बरकरार रखने हेतु विश्वविद्यालय में ‘प्लेगरिजम डिटेक्शन सेंटर’ का गठन किया गया है। शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘रिसर्च प्रमोशन सेल’ का भी पुनर्गठन किया जाएगा। सभी योग्य पी-एच. डी. डिग्रीधारकों को नियमानुसार पाँच बिन्दु प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

उन्होंने कहा कि शीघ्र ही शिक्षकों एवं शोधार्थियों को शैक्षणिक उन्नयन का अवसर देने हेतु आईएसएसएन युक्त त्रैमासिक शोध-पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा। स्नातक एवं स्नातकोत्तर में नियमित ऑफलाइन एवं ऑनलाइन  कक्षाओं का संचालन जारी है। इसे और बेहतर किया जाएगा। ऑनलाइन एजुकेशन के समुचित संचालन हेतु आवश्यकतानुसार स्मार्ट क्लास रूम बनाया जाएगा। ऑनलाइन एजुकेशन  मोंनिटरिंग कमिटी के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। अब राजभवन से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का भी आदेश प्राप्त हो गया है। सभी शिक्षकों से अपील है कि वे पूरी तैयारी के साथ कक्षा में जाएँ और विद्यार्थियों से भी अपील की  है कि वे नियमित रूप से कक्षा में आएँ; क्योंकि कक्षा एवं किताब के बिना ज्ञान संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि सभी अंगीभूत महाविद्यालयों के लिए एकसमान तथा सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों के लिए एक समान विकास शुल्क निर्धारित किया जाएगा। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण परीक्षाओं का संचालन बाधित रहा है। इसके बावजूद विगत दिनों 13 परीक्षाएँ आयोजित की गईं। शेष परीक्षाओं की तिथि भी घोषित कर दी गई हैं। परीक्षा विभाग को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है और सत्र-नियमितिकरण हेतु हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नार्थ कैम्पस की सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। परीक्षा भवन के बगल में अर्थशास्त्र भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नए परिसर तक जाने के लिए सड़क की बेहतर व्यवस्था हेतु जिला प्रशासन से बातचीत हुई है और  बिहार सरकार के प्रधान सचिव से भी सकारात्मक सहयोग का आश्वासन मिला है। कैम्पस की स्वच्छता के साथ-साथ उसके सौंदर्यीकरण पल भी ध्यान दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के वृक्षों से गिरने वाले पत्तों एवं अन्य कचरों से कम्पोस्ट बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सभी बुनियादी सुविधाएँ बहाल करने की ओर ध्यान दिया जा रहा है। पुराने परिसर में बने महिला छात्रावास को शुरू किया जा रहा है। इसके पूर्व छात्राओं के लिए भोजन, चिकित्सा एवं सुरक्षा आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। विश्वविद्यालय में पुलिस चौकी बनाने हेतु प्रयास किया जा रहा है।

कुलपति विश्वविद्यालय अपने सभी शिक्षकों को नियमानुकूल प्रोन्नति का लाभ देने हेतु तत्पर है। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की अनुशंसा के आलोक में नियुक्त 51 शिक्षकों की सेवासंपुष्टि हो गई है। शेष शिक्षकों की सेवासंपुष्टि की प्रक्रियाधीन है। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षकों की कमी कुछ हद तक दूर हुई और पठन-पाठन में सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि सभी सेवानिवृत्त  शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति-लाभांश का भुगतान अद्यतन हो चुका है। सेवानिवृत्त विश्वविद्यालय पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों को सम्मानित करने की परंपरा शुरू की गई है। विश्वविद्यालय के विभिन्न को सक्रिय किया गया है। सभी न्यायालयी मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु ठोस प्रयास किया जा रहा है। केंद्रीय पुस्तकालय एवं विभागीय पुस्तकालयों  को सुसज्जित एवं आधुनिक तकनिकी से लैश किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नए परिसर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘खेलो इंडिया’ के तहत एक मल्टीपर्पस हाॅल एवं एक सिंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। विश्वविद्यालय एनएसएस एवं एनसीसी की सक्रियता बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में विश्वविद्यालय में लगातार कई वेबिनार आयोजित किए गए। आगे 27-28 जनवरी, 2021 को मधेपुरा काॅलेज, मधेपुरा में शिक्षा के बदलते परिदृश्य एवं चुनौतियां विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन सुनिश्चित है। दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में मार्च 2021 में बिहार दर्शन-परिषद् का वार्षिक अधिवेशन और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विविध आयाम’ विषयक एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस और एक फरवरी को भूपेंद्र नारायण मंडल जयंती समारोहपूर्वक मनाया जाता है।  इस वर्ष इन दोनों तिथियों को विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर में विशेषरूप से प्रकाशित किया गया है।

उन्होंने कहा कि राजभवन सचिवालय के निदेशानुसार शीघ्र ही चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय में दो बार छात्र संवाद का आयोजन किया गया है और उसमें प्राप्त सुझावों पर नियमानुसार क्रियान्वयन किया जाएगा। विश्वविद्यालय के समग्र विकास और विशेषकर विद्यार्थियों को कक्षा तक लाने में अभिभावकों से भी सहयोग लिया जाएगा। कक्षाओं के सुचारू संचालन के क्रम में स्नातकोत्तर विभागों एवं महाविद्यालयों में समय-समय पर अभिभावक-शिक्षक संवाद का आयोजन किया जाएगा।

*सदन की पूरी कार्यवाई*
अध्यक्षीय अभिभाषण पर विभिन्न सदस्यों ने अपनी बात रखी। साथ ही सदस्यों ने अपने-अपने प्रश्न भी सदन में रखा।

प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. आभा सिंह ने बजट भाषण प्रस्तुत किया। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिये छह सौ साठ करोड़ चौरासी लाख एकतिस हजार तीन सौ पैंसठ रूपए का प्रस्तावित बजट पारित किया गया।

हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. उषा सिन्हा द्वारा गत अधिषद् की बैठक (22. 02. 2020) की कार्रवाई की सम्पुष्टि प्रस्ताव रखा। डीएसडब्लू डाॅ. अशोक कुमार यादव गत अधिषद् की बैठक में लिए गए निर्णय का अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बीएनएमभी काॅलेज, मधेपुरा के प्रधानाचार्य डाॅ. के. एस. ओझा वार्षिक प्रतिवेदन (2019-2020) के अनुमोदन का प्रस्ताव रखा। भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-2020 के वास्तविक आय-व्यय का लेखा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। एमएलटी काॅलेज, सहरसा के प्रधानाचार्य डाॅ. डी. एन. साह द्वारा विभिन्न प्राधिकारों/निकायों/ समितियों के कार्यवृत का अनुमोदन प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। मैथिली विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. रामनरेश सिंह विभिन्न महाविद्यालयों के संबंधन, नवसंबंधन, संबंधन दीर्घीकरण एवं पदसृजन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। डाॅ. जवाहर पासवान  द्वारा अधिषद् सदस्यों से प्राप्त प्रश्नों के उत्तर की प्रस्तुति की। अंत में लेफ्टिनेंट गौतम कुमार द्वारा शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। संचालन कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने किया।

इसके पूर्व कुलपति के अभिभाषण पर विभिन्न सदस्यों ने धन्यवाद प्रस्ताव  रखा। बैठक में गत बैठक की सम्पुष्टि, गत बैठक में लिए गए निर्णय का अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इस पर विभिन्न सदस्यों ने गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीपप्रज्ज्वलन के साथ हुई। तदुपरांत कुलगीत गायन हुआ। अंत में राष्ट्रीय  गान जन-गण-मन के सामूहिक गायन के साथ बैठक संपन्न  हुई।

बैठक में विधायक द्वय गुंजेश्वर साह एवं नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’,  विधान पार्षद डाॅ. संजीव कुमार सिंह, डाॅ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, डाॅ. के. पी. यादव, डाॅ. राजीव सिन्हा, डाॅ. रेणु सिंह, डाॅ. अशोक कुमार सिंह, डाॅ. नरेश कुमार, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, डाॅ. लम्बोदर झा, डाॅ. कमलेश कुमार सिंह, डाॅ. विपिन कुमार सिंह, भवेश कुमार, शोभाकांत कुमार, डाॅ. रीता सिंह, मनीषा रंजन, रंजन कुमार आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम के आयोजन में अकादमिक निदेशक प्रोफेसर डॉ. एम. आई. रहमान, महाविद्यालय निरीक्षक विज्ञान डाॅ. उदयकृष्ण, डाॅ. अभय कुमार, डाॅ. अबुल फजल, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, उपकुलसचिव अकादमिक डॉ. सुधांशु शेखर, कुुलपति  के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, डाॅ. राजेश्वर राय, डाॅ. विनोद कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी, बिमल कुमार आदि ने सहयोग किया।

BNMU। 21 वां अभिषद् अधिवेशन। विश्वविद्यालय ही हमारे लिए मंदिर है- कुलपति।

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पिछले एक वर्ष से पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना से ग्रस्त और त्रस्त है। इसका शिक्षा व्यवस्था पर भी काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद हम विश्वविद्यालय के समग्र विकास एवं शैक्षणिक उन्नयन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। यह विश्वविद्यालय ही हमारे लिए मंदिर है। विश्वविद्यालय है, तो हम हैं। यह बात बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति प्रोफेसर डॉ. राम किशोर प्रसाद रमण ने कही। वे मंगलवार को 21 वें अधिषद् अधिवेशन के अवसर पर अध्यक्षीय अभिभाषण एवं प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहे थे।

कुलपति ने कहा कि 10 जनवरी, 1992 को इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थीं और गत 18 मार्च, 2018 में इसे विभाजित कर पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया का गठन किया गया है और अब हमारे विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र कोसी प्रमंडल के तीन जिलों मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल तक ही है। 1992 से अब तक विश्वविद्यालय की विकास यात्रा में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। मैंने इस विकास यात्रा को करीब से देखा है और आप सभी ने भी इसे देखा-सुना है। हमसे भी अधिक यह सदन इस विकास यात्रा का साक्षी है।इस विश्वविद्यालय को बेहतर से बेहतर बनाया जाए।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के 29 वें वर्ष में विश्वविद्यालय प्रगति प्रतिवेदन एवं कार्ययोजनाओं को निम्न 29 बिंदुओं में प्रस्तुत किया-

1. *नियम-परिनियम के अनुरूप काम* : विश्वविद्यालय अधिनियम की पुस्तक ही हमारी गीता है- बाइबिल है और कुरान है। हम इसी पुस्तक को साक्षी मानकर नियम-परिनियम के अनुरूप कार्य करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। तदनुसार सभी निर्णय सम्बन्धित समितियों एवं निकायों की सहमति से किए जा रहे हैं। सिंडिकेट, एकेडमिक काॅउंसिल, परीक्षा-समिति, विकास-समिति, वित्त-समिति, भवन- निर्माण समिति, क्रय-विक्रय समिति आदि की बैठकें नियमित रूप से हो रही हैं। जनवरी माह में सिंडिकेट की दो बैठकें आयोजित की गई हैं। हमारे कार्यकाल में सीनेट की यह पहली बैठक है।

2. *वित्तीय स्वच्छता एवं प्रशासनिक पारदर्शिता* : हम वित्तीय स्वच्छता एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के आदर्शों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। सभी महाविद्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों को ससमय उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा करने और विभिन्न प्रकार के अग्रिम भुगतानों का सामंजन कराने का आदेश दिया जा चुका है।

3. *नैक मूल्याकंन* : विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु हम नैक से मूल्यांकन कराने हेतु प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए सभी काॅलेजों को विश्वविद्यालय की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

4. *सीट वृद्धि का प्रयास* : विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर में नामांकन का अधिकाधिक अवसर देने हेतु सीट वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातकोेत्तर विभागों के साथ-साथ स्नातक स्तर पर भी सीट वृद्धि की आवश्यकता है। पूरे मामले के सभी पहलुओं के सम्यक् अध्ययन हेतु एक समिति गठित है और इस समिति की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार को सीट वृद्धि का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

5. *पद सृजन का प्रयास* : अभी विश्वविद्यालय के सिर्फ 9 विभागों यथा- भौतिकी, रसायनशास्त्र, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, गृह विज्ञान, मनोविज्ञान, भूगोल, राजनीति विज्ञान एवं वाणिज्य में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पद सृजित हैं। हम शेष विभागों यथा- इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, हिंदी एवं अंग्रेजी आदि विषयों में भी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पद-सृजन हेतु प्रयासरत हैं।

6. *स्नातकोत्तर पढ़ाई शुरू करने का प्रस्ताव* : विश्वविद्यालय मुख्यालय एवं स्नातकोत्तर पश्चिमी परिसर, सहरसा में शेष कुछ विषयों जिला मुख्यालयों अवस्थित अंगीभूत महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर कुछ विषयों की पढ़ाई शुरू करने हेतु अभिषद् से स्वीकृति प्राप्त है। इस संबंध में स्नातकोत्तर अध्यापन के औचित्य एवं उपादेयता की जाँच हेतु अभिषद् के निर्णय के आलोक में त्रिसदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है। समिति की अनुशंसा के आलोक में अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

7. *व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का संचालन* : व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है। हम कई नए पाठ्यक्रमों की शुरूआत करने जा रहे हैं। एम. बी. ए. एवं एम. सी. ए. की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में त्वरित कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर गाँधी विचार की पढ़ाई करने हेतु पूर्व निर्णय के आलोक में नियम-परिनियम एवं पाठ्यक्रम निर्माण समिति का गठन किया जाएगा। पी. जी. डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एण्ड मास कम्यूनिकेशन, पी. जी. डिप्लोमा इन योगा थेरेपी, पी. जी. डिप्लोमा इन स्ट्रेस मैनेजमेन्ट तथा पी. जी. डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेन्ट कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया को गति देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही पी. जी. डिप्लोमा इन हाउसिंग सेक्टर एण्ड अर्बन डेवलपमेंट स्टडीज कोर्स शुरू करने की भी योजना है। गायत्री शक्ति पीठ, सहरसा से ह्यूमन काॅन्शसनेश, योगा एंड अल्टरनेटिव थेरेपी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।

8. *शोध की गुणवत्ता पर ध्यान* : शोध की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। राजभवन के निदेशानुसार स्थापना काल से लेकर अब तक के शोध/ पी-एच. डी. उपाधि से संबंधित विस्तृत सूचनाएँ और उनका सारांश विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाना है। शोध गुणवत्ता को बरकरार रखने हेतु विश्वविद्यालय में ‘प्लेगरिजम डिटेक्शन सेंटर’ का गठन किया गया है। शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘रिसर्च प्रमोशन सेल’ का भी पुनर्गठन किया जाएगा। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि सभी योग्य पी-एच. डी. डिग्रीधारकों को नियमानुसार पाँच बिन्दु प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

9. *शोध-पत्रिका के प्रकाशन का निर्णय* : शीघ्र ही शिक्षकों एवं शोधार्थियों को शैक्षणिक उन्नयन का अवसर देने हेतु आईएसएसएन युक्त त्रैमासिक शोध-पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा।

10. *ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कक्षाएं* : स्नातक एवं स्नातकोत्तर में नियमित ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन जारी है। इसे और बेहतर किया जाएगा। ऑनलाइन एजुकेशन के समुचित संचालन हेतु आवश्यकतानुसार स्मार्ट क्लास रूम बनाया जाएगा। ऑनलाइन एजुकेशन मोंनिटरिंग कमिटी के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। अब राजभवन से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का भी आदेश प्राप्त हो गया है। सभी शिक्षकों से अपील है कि वे पूरी तैयारी के साथ कक्षा में जाएँ और विद्यार्थियों से भी अपील की है कि वे नियमित रूप से कक्षा में आएँ; क्योंकि कक्षा एवं किताब के बिना ज्ञान संभव नहीं है।

11. *विकास शुल्क में एकरूपता* : सभी अंगीभूत एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में स्नातक नामांकन हेतु निर्धारित विकास शुल्क में एकरूपता लाने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार विश्वविद्यालय स्तर से सभी अंगीभूत महाविद्यालयों के लिए एकसमान तथा सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों के लिए एक समान विकास शुल्क निर्धारित किया जाएगा।

12. *परीक्षा एवं परिणाम* : वैश्विक महामारी कोरोना के कारण परीक्षाओं का संचालन बाधित रहा है। इसके बावजूद विगत दिनों 13 परीक्षाएँ आयोजित की गईं। शेष परीक्षाओं की तिथि भी घोषित कर दी गई हैं। परीक्षा विभाग को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है और सत्र-नियमितिकरण हेतु हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

13. *नार्थ कैम्पस की समस्याओं का समाधान* : आप सबों को यह बताना समीचीन प्रतीत होता है कि जब मैं विश्वविद्यालय में विकास पदाधिकारी था, उसी दौरान नए परिसर का अधिग्रहण किया गया था। मैं उस परिसर के एक-एक चप्पे-चप्पे से परिचित हूँ और वहाँ की समस्याओं से भी अवगत हूँ। वहाँ की सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। परीक्षा भवन के बगल में अर्थशास्त्र भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नए परिसर तक जाने के लिए सड़क की बेहतर व्यवस्था हेतु जिला प्रशासन से बातचीत हुई है और बिहार सरकार के प्रधान सचिव से भी सकारात्मक सहयोग का आश्वासन मिला है।

14. *सौंदर्यीकरण एवं पौधारोपण* : कैम्पस की स्वच्छता के साथ-साथ उसके सौंदर्यीकरण पल भी ध्यान दिया जा रहा है। ‘हर परिसर, हरा परिसर’ योजना और ‘माई बर्थ, माई अर्थ’ योजना के तहत नार्थ कैम्पस में दो हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं। प्रत्येक भवन के आगे एक-एक वाटिका बनाई गई है और विज्ञान भवन के पीछे ‘महावीर वाटिका’ का भी निर्माण कराया गया है। साउथ कैम्पस स्थित ‘कीर्ति वाटिका’ एवं ‘चुल्हाय पार्क’ को भी सुसज्जित किया जा रहा है। गत सिंडिकेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि विश्वविद्यालय के वृक्षों से गिरने वाले पत्तों एवं अन्य कचरों से कम्पोस्ट बनाया जाएगा।

15. *बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान* : विश्वविद्यालय में सभी बुनियादी सुविधाएँ बहाल करने की ओर ध्यान दिया जा रहा है। पुराने परिसर में बने महिला छात्रावास को शुरू किया जा रहा है। इसके लिए छात्रावास अधीक्षक की नियुक्ति की जा चुकी है और उन्होंने योगदान भी कर लिया है। शीघ्र ही इच्छुक छात्राओं से आवेदन आमंत्रित किया जाएगा। इसके पूर्व छात्राओं के लिए भोजन, चिकित्सा एवं सुरक्षा आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। विश्वविद्यालय में पुलिस चौकी बनाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक, मधेपुरा से सकारात्मक बातचीत हुई है।

16. *शिक्षकों की प्रोन्नति* : विश्वविद्यालय अपने सभी शिक्षकों को नियमानुकूल प्रोन्नति का लाभ देने हेतु तत्पर है। शिक्षकों की प्रोन्नति की प्रक्रिया जारी है। इस हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में शीघ्र अग्रेतर कार्रवाई करते हुए ससमय यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

17. *नवनियुक्त शिक्षकों की सेवासंपुष्टि* : बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की अनुशंसा के आलोक में नियुक्त 51 शिक्षकों की सेवासंपुष्टि हो गई है। शेष शिक्षकों की सेवासंपुष्टि की प्रक्रियाधीन है।

18. *अतिथि शिक्षक* : अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षकों की कमी कुछ हद तक दूर हुई और पठन-पाठन में सहयोग मिल रहा है।

19. *पेंशनरों की समस्याओं का समाधान* : सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति-लाभांश का भुगतान अद्यतन हो चुका है। सेवानिवृत्त विश्वविद्यालय पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों को सम्मानित करने की परंपरा शुरू की गई है।

20. *विभिन्न कोषांगों की सक्रियता* : हम चाहते हैं कि हमारे शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को बेवजह न्यायालय की शरण नहीं लेना पड़े। विश्वविद्यालय के विभिन्न को सक्रिय किया गया है। सभी न्यायालयी मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु ठोस प्रयास किया जा रहा है।

21. *पुस्तकालय का आधुनिकीकरण* : केंद्रीय पुस्तकालय एवं विभागीय पुस्तकालयों को सुसज्जित एवं आधुनिक तकनिकी से लैश किया जा रहा है। इससे हमारे शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी इसका सुगमतापूर्वक लाभ ले सकेंगे।

22. *खेल गतिविधियों को बढ़ावा* : विद्यार्थियों के समग्र विकास में खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वैसे कोरोना काल में ये गतिविधियाँ थम-सी गई थीं, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे गति देने का प्रयास किया जा रहा है। नए परिसर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘खेलो इंडिया’ के तहत एक मल्टीपर्पस हाॅल एवं एक सिंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है।

23. *एनएसएस एवं एनसीसी की सक्रियता* : विश्वविद्यालय एनएसएस एवं एनसीसी की सक्रियता बढ़ी है। हमारे एनएसएस स्वयंसेवकों ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग एवं श्री-श्री विश्वविद्यालय, कटक में आयोजित राष्ट्रीय एकीकरण शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्वयंसेवकों ने आगरा में आयोजित पूर्व-गणतंत्र दिवस परेड में भी भागीदारी निभाई। युवा संचार प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए हमारे स्वयंसेवकों को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के हाथों पुरस्कार मिला। एनएसएस स्वयंसेवकों एवं एनसीसी कैडेट के माध्यम से स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। विश्व योग दिवस और कोरोना संक्रमण से बचाव में स्वयंसेवकों ने महती भूमिका निभाई है।

24. *सेमिनारों का आयोजन* : कोरोना काल में विश्वविद्यालय में लगातार कई वेबिनार आयोजित किए गए। शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति से संबंधित वेबिनार का आयोजन किया गया। ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में एक अंतरराष्ट्रीय एवं दस राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किए गए। बीएनएमभी काॅलेज, मधेपुरा, एमएलटी काॅलेज, सहरसा, आर. एम. काॅलेज, सहरसा, आरजेएम काॅलेज, सहरसा आदि में भी वेबिनारों का आयोजन किया गया।27-28 जनवरी, 2021 को मधेपुरा काॅलेज, मधेपुरा में शिक्षा के बदलते परिदृश्य एवं चुनौतियां विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन सुनिश्चित है। दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में मार्च 2021 में बिहार दर्शन-परिषद् का वार्षिक अधिवेशन और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विविध आयाम’ विषयक एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।

25. *विश्वविद्यालय स्थापना दिवस और भूपेंद्र नारायण मंडल जयंती* : हमने प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस और एक फरवरी को भूपेंद्र नारायण मंडल जयंती समारोहपूर्वक मनाया जाता है। इस वर्ष इन दोनों तिथियों को विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर में विशेषरूप से प्रकाशित किया गया है।

26. *दीक्षांत समारोह* : राजभवन सचिवालय के निदेशानुसार शीघ्र ही चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। हम इसकी तैयारियों में लगे हैं और इसमें आप सभी माननीय सदस्यों के विशेष सहयोग की अपेक्षा करते हैं।

27. *एनईटी में सफलता* : विश्वविद्यालय के हिन्दी, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, रसायनशास्त्र आदि विषयों के कई विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) में सफलता प्राप्त की हैं और कुछ विद्यार्थी जेआरएफ बनने में भी सफल हुए हैं। मैं इन सभी विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

28. *छात्र संवाद* : विद्यार्थी समाज एवं राष्ट्र के भविष्य हैं। विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैंने कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बैठक विश्वविद्यालय छात्र संघ के पदाधिकारियों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ की थी। अभी हाल में भी हमने छात्र-युवा संगठनों के प्रतिनिधियों से विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं के संदर्भ में विचार-विमर्श किया है। हमें उन सबों के द्वारा कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, जो विश्वविद्यालय के विकास में सहायक हैं। ऐसे सुझावों पर नियमानुसार क्रियान्वयन किया जाएगा।

29. *अभिभावक-शिक्षक संवाद* : विश्वविद्यालय के समग्र विकास और विशेषकर विद्यार्थियों को कक्षा तक लाने में अभिभावकों से भी सहयोग लिया जाएगा। कक्षाओं के सुचारू संचालन के क्रम में स्नातकोत्तर विभागों एवं महाविद्यालयों में समय-समय पर अभिभावक-शिक्षक संवाद का आयोजन किया जाएगा।

अंत में कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक उन्नयन हेतु विद्यार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान एवं उन्हें पुनः कक्षा तक लाना, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र निष्पादन और अभिभावकों का विश्वविश्वविद्यालय एवं इसकी कार्य-संस्कृति में विश्वास जगाना ही उनका सर्वोच्च लक्ष्य है। यही उनका दायित्व है और यही उनका कर्तव्य भी है। उन्होंने इसमें सबों से समवेत रूप से इसमें सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से भी अपील की कि वे सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को निभाएँ और अपने-अपने स्वधर्म का पालन करें। जो जहाँ हैं, वहाँ विश्वविद्यालय के बारे में सोचें और विश्वविद्यालय के हित में काम करें। हम सब मिलकर काम करेंगे, तो विश्वविद्यालय की यश, कीर्ति एवं ख्याति दूर-दूर तक जाएगी।

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