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कीर्ति नारायण मंडल की जयंती

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कीर्ति नारायण मंडल की जयंती
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यह मानव जीवन नश्वर है। लेकिन जो सत्कर्म करते हैं, वे अजर- अमर हो जाते हैं। व्यक्ति की यश एवं कीर्ति उन्हें अमर बना देती है। महामना कीर्ति नारायण मंडल भी अपनी यश एवं कीर्ति से अमर हो गए गए हैं।

यह बात कुलपति डॉ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही। वे ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित कीर्ति नारायण मंडल जयंती समारोह में उद्घाटनकर्ता के रूप में बोल रहे थे।

कुलपति ने कहा कि कृति बाबू कर्म पर विश्वास करते थे। उन्होंने उन्होंने गीता की कर्मयोग के संदेश को अपने जीवन में उतार लिया था। वे निरंतर जन कल्याण के लिए कर्म करते थे, फल की चिंता नहीं करते थे। उन्होंने समाज के उत्थान के लिए कर्म किया।

उनकी कीर्ति आज भी जिंदा है और सदियों तक इस समाज को आलोकित करती रहेगी। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तब मानी जाएगी, जब उनके विचारों के अनुरूप सभी शैक्षणिक संस्थान कार्य करें। हम सकारात्मक एवं सृजनात्मक सोच को आगे बढ़ाएं।

प्रधानाचार्य डॉ. के. पी. यादव ने कहा कि कीर्ति को पढ़ना आसान है, समझना मुश्किल है। कीर्ति के कार्यों को जीवन में उतारना और भी मुश्किल है।

पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. परमानंद यादव ने कहा कि कीर्ति बाबू दधीची थे। उन्होंने शिक्षा के उन्नयन के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया। मधेपुरा में सैद्धांतिक महान लोगों की कमी नहीं है। लेकिन कृति नारायण मंडल व्यवहारिक रूप से महान व्यक्ति थे।

कुलसचिव डॉ. कपिल देव प्रसाद ने कहा कि हम सबों को कीर्ति बाबू के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

मुख्य वक्ता बीएनमुस्टा के महासचिव डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल महात्मा बुद्ध के जैसे गृहत्यागी थे। उनमें कबीर के जैसे अपने कार्य के प्रति फक्कड़पन था। वे महात्मा गाँधी के जैसे दृढ़ निश्चय के साथ सत्य, अहिंसा एवं सत्याग्रह के बल पर अपने समाज एवं राष्ट्र को आगे ले जाने का एक मजबूत मनोबल रखते थे। उनमें मदन मोहन मालवीय की तरह शिक्षा के प्रचार-प्रसार की भावना थी। उन्होंने समाज को शिक्षित करने के लिए एक नहीं दर्जनों शैक्षणिक संस्थान का निर्माण किया। उनके बनाए शिक्षण संस्थानों से आज हजारों छात्र पढ़ लिखकर अच्छे-अच्छे पदों पर देश की तरक्की में लगे हुए हैं।

एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल का हम सबों पर ऋण है।

सिंडिकेट सदस्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि वही व्यक्ति महान होता है, जो कुछ ऐसा करे ल ्््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््

इस अवसर पर शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आर. पी.    राजेश, सचिव डॉ. मनोज कुमार मनोरंजन, डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन, डॉ. गजेद्र कुमार, डॉ. रतनदीप, डॉ. आशुतोष झा, अमित कुमार, स्नेहा, विनीत राज, डॉ. कुंदन कुमार, विवेकानंद, मणीष कुमार, सुनील कुमार आदि उपस्थित थे।

एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल का हम सबों पर ऋण है।

सिंडिकेट सदस्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि वही व्यक्ति महान होता है, जो कुछ ऐसा करे जो लिखने लायक हो या कुछ वैसा लिखे, जो याद रखने लायक हो। कीर्ति बाबू वैसे ही महान व्यक्ति थे। उनकी कीर्ति इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

इस अवसर पर शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आर. पी. राजेश, सचिव डॉ. मनोज कुमार मनोरंजन, डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन, डॉ. गजेद्र कुमार, डॉ. रतनदीप, डॉ. आशुतोष झा, अमित कुमार, स्नेहा, विनीत राज, डॉ. कुंदन कुमार, विवेकानंद, मणीष कुमार, सुनील कुमार आदि उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम का संचालन पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर ने किया धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. रतनदीप ने किया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस का नाम कीर्ति नारायण मंडल कैंपस रखा जाए और महाविद्यालय के बी. एड. भवन का नाम भी कीर्तिमान मंडल भवन हो। इसे सदन ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया। कुलपति ने प्रधानाचार्य को यह निर्देश दिया कि महाविद्यालय स्तर से इस आशय का प्रस्ताव विश्वविद्यालय को समर्पित किया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन कीर्ति नगर मंडल के सम्मान के अनुरूप शीघ्र निर्णय लेगी। इस अवसर पर कीर्ति बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक पुस्तक का भी प्रकाशन किया जाएगा।

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