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नाना पाटेकर के निधन से एक शानदार बेबाक आवाज खामोश हो गई

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*नाना पाटेकर के निधन से एक शानदार बेबाक आवाज खामोश हो गई*

भारतीय सिनेमा के सशक्त अभिनेता, रंगकर्मी, संवेदनशील कलाकार और अपने बेबाक एवं निर्भीक अंदाज के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखने वाले नाना पाटेकर के निधन से कला और सिनेमा जगत में शोक की गहरी लहर है। उनके निधन पर आजाद पुस्तकालय, कतराहा, मधेपुरा ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
आजाद पुस्तकालय के अध्यक्ष एवं वरीय साहित्यकार प्रो. विनय कुमार चौधरी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर तथा सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ,सह संयोजक अमित अंशु,परामर्शी प्रो प्रसन्ना कुमारी,ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि नाना पाटेकर का निधन केवल एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि अभिनय की उस बुलंद और बेबाक आवाज का खामोश हो जाना है, जिसने दशकों तक भारतीय दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अभिनय को केवल पर्दे पर ही नहीं निभाया नहीं, बल्कि उसे जिया। उनकी संवाद अदायगी में आक्रोश भी था, संवेदना भी; उनकी आंखों में पीड़ा भी दिखती थी और संघर्ष की आग भी। उन्होंने अपने सहज, स्वाभाविक और प्रभावशाली अभिनय से यह साबित किया कि महान अभिनेता बनने के लिए केवल संवाद बोलना नहीं, बल्कि चरित्र की आत्मा को महसूस करना आवश्यक है।
अध्यक्ष प्रो. चौधरी ने कहा कि नाना पाटेकर की पहचान उनकी फिल्मों और किरदारों तक सीमित नहीं थी। उनकी साफगोई, निर्भीकता और सत्ता-सामाजिक विसंगतियों पर बेबाक बोलने का साहस उन्हें विशिष्ट बनाता था। कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर सुधांशु शेखर ने कहा कि नाना पाटेकर ऐसे शख्स थे जिन्हें फिल्मों में दिलचस्पी भी नहीं रहती थी वो भी उन्हें पसंद करते थे।वे उन कलाकारों में थे, जिन्होंने लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचकर भी अपनी जमीन और अपनी आवाज नहीं छोड़ी।
सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा को अनेक यादगार किरदार दिए। उनके अभिनय की तीव्रता, संवादों की धार और भावाभिव्यक्ति की गहराई आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उनका जाना सिनेमा जगत की ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
आजाद पुस्तकालय इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि देते हुए मानता है कि कलाकार शरीर से विदा होता है, लेकिन उसकी कला और उसकी आवाज समाज की स्मृति में लंबे समय तक जीवित रहती है। नाना पाटेकर भी अपने अभिनय, अपने विचारों और अपने बेबाक व्यक्तित्व के माध्यम से सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगे।आजाद पुस्तकालय, कतराहा, मधेपुरा की ओर से महान कलाकार नाना पाटेकर को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।
नाना के लिए बस इतना ही आपकी आवाज खामोश हुई है,
आपकी कला नहीं।
आपके किरदारों में आप हमेशा जीवित रहेंगे।”

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