*कवि सम्मेलनों एवं मुशायरों की इज्जत रहे शायर एहसान शाम*
प्रगतिशील लेखक संघ मधेपुरा ने तीस सितंबर को पटना में बिहार के प्रसिद्ध और वरिष्ठ उर्दू शायर प्रोफ़ेसर अहसान शाम के निधन को साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। प्रलेस मधेपुरा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार चौधरी ने उन्हें कवि सम्मेलनों एवं मुशायरों की इज्जत बताते हुए कहा कि यूं तो वो भागलपुर के थे लेकिन शिक्षण सेवा में सहरसा आए तो यही के होकर रह गए। वे कोसी क्षेत्र और पूरे देश के मुशायरों में अपनी अनूठी मखमली आवाज, संजीदा लहजे और बेहतरीन कलाम के लिए बेहद लोकप्रिय थे।उनकी रचनाएं एक ओर जहां गजल संग्रह “धूप का सफर” के रूप में प्रकाशित हुई वहीं उनके ही सम्पादन में कोसी अंचल के रचनाकारों पर केंद्रित “रेत के रशगीत” नामक संग्रह पाठकों में खासी पसंद की गई साथ ही दर्जनों पुस्तकों एवं पत्रिकाओं ने उनकी रचनाओं को बड़े सम्मान से जगह दी।
उनकी कुछ मशहूर पंक्तियां जो मुशायरों में काफी पसंद की जाती थीं:
” उस चमन को चमन नहीं कहते जिस चमन में कोई गुलाब नहीं, यूं तो भारत की हर सुबह है हंसी अपनी उर्दू का पर जवाब नहीं ” उनके उर्दू प्रेम को दिखाता था।
प्रलेस मधेपुरा के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने उन्हें याद करते हुए कहा कि जिस समय उन्होंने साहित्यिक गलियारे में कदम रखा है उसी समय से मशहूर शायर एहसान शाम को जानने और सुनने का अवसर मिला।उनकी लाइन _”मिलजुलकर नफ़रतों को मिटाने को आए हैं, हम अमन का चिराग जलाने को आए हैं ,मुस्लिम हो, सिख,ईसाई के हिंदू कोई भी हो,अपने गले को लगाने को आए हैं”_ देश की आपसी भाई चारा के प्रति उनके लगाव को दर्शाती थी।उनका निधन उर्दू अदब, काव्य जगत के लिए एक बड़ा झटका है। कुछ साल पहले उनकी बेगम रियाज बानों फातमी का भी इंतकाल हो गया था जो खुद एक चर्चित शायर थी, दोनों शेरो शायरी की दुनिया की खूबसूरत जोड़ी के रूप में अपनी अलग पहचान रखते थे। सचिव डॉक्टर राठौर ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ छ नवंबर को चर्चित साहित्यकार स्मृतिशेष दशरथ प्रसाद कुलिश के साथ मशहूर शायर एहसान शाम के सम्मान में श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद करते हुए उनसे जुड़े लोगों को एकत्रित करने का काम करेगी।
*एहसान शाम का निधन साहित्यिक गलियारे ,मुशायरों को सुना कर गया*
उनके निधन पर संरक्षक मंडल सदस्य प्रो सचिन्द्र महतो, श्यामल पथिक कवि जी,मणिभूषण वर्मा, अरविंद श्रीवास्तव,डॉक्टर आलोक कुमार,उपाध्यक्ष रमन कुमार, चंद्रशेखर, कोषाध्यक्ष अबू जफर ,कार्यकारिणी सदस्य प्रो फिरोज मंसूरी, प्रो. प्रसन्ना ,सोनम आजाद आदि ने भी प्रो. एहसान शाम के निधन को साहित्यिक गलियारे ,मुशायरों को सुना करने वाला बताया।














