*राष्ट्रीय लेखक दिवस पर प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा स्थानीय साहित्य पर काम करने का संकल्प*
*प्रलेस, मधेपुरा स्थानीय साहित्य के अतीत,वर्तमान और भविष्य को जोड़ने की करेगा पहल*
राष्ट्रीय लेखक दिवस ,रविवार एक नवंबर की पूर्व संध्या पर प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), मधेपुरा ने जिले के स्थानीय साहित्य, साहित्यकारों एवं रचनात्मक प्रतिभाओं को उचित मंच और पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है।
संघ के अध्यक्ष एवं वरीय साहित्यकार प्रो. विनय कुमार चौधरी तथा सचिव, युवा साहित्यकार एवं इतिहासकार डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने संगठन की ओर से संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रलेस मधेपुरा स्थानीय साहित्यिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और रचनाकारों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि संघ के आगामी कार्यक्रमों में स्थानीय रचनाकारों की प्रमुख रचनाओं पर व्याख्यान एवं परिचर्चा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही किसी विशिष्ट कवि की रचनात्मकता, साहित्यिक अवदान और काव्य-संसार को केंद्र में रखकर कवि विशेष एकल काव्य पाठ का आयोजन भी किया जाएगा।अध्यक्ष और सचिव द्वारा जारी
बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि साहित्य की दुनिया को अपनी लेखनी, साधना और समर्पण से सींचने वाले स्थानीय साहित्यकारों की रचनाओं पर व्याख्यान,गोष्ठी संग विशिष्ट कड़ी को सम्मानित करना संघ के आगामी कार्यक्रमों का अहम हिस्सा होगा। ऐसे साहित्यकारों के योगदान को सामने लाना और नई पीढ़ी को उनकी रचनात्मक विरासत से परिचित कराना संघ अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानता है।दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि मधेपुरा की साहित्यिक धरती पर रचनात्मकता और प्रतिभा की समृद्ध परंपरा रही है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय रचनाकारों की महत्वपूर्ण कृतियों और उनके साहित्यिक योगदान को व्यापक विमर्श का हिस्सा बनाया जाए। प्रगतिशील लेखक संघ, मधेपुरा इस दिशा में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाएगा तथा स्थानीय साहित्य एवं साहित्यकारों को मुख्यधारा से जोड़ने की हर संभव कोशिश करेगा।
राष्ट्रीय लेखक दिवस पर संघ की यह घोषणा स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देने और साहित्यकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक सार्थक पहल है।प्रगतिशील लेखक संघ मधेपुरा ने राष्ट्रीय लेखक दिवस पर साहित्यकारों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है अतीत से मिले साहित्यिक विरासत को ईमानदारी से सींचते हुए भविष्य को समृद्ध उपहार देने वर्तमान पीढ़ी के साहित्यकार हर संभव प्रयास को तत्पर होंगे।














