पिछली बार राजगोपाल जी जौरा के खादी – भंडार में मिले थे। इस बार मुरैना में स्टेशन रोड के खादी भंडार पर। वे दिल्ली से चलकर सुबह ग्यारह बजे समता एक्सप्रेस से यहां पहुंचे। श्रीमती जिल कार हैरिस भी इस यात्रा में साथ हैं, उनकी जीवनसंगिनी और ‘ एकता महिला मंच ‘ की प्रमुख। एक समय वे संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण संबंधी कार्यक्रमों से जुड़ी रहीं।
खादी पर लंबी चर्चा हुई और शांति की दिशा में चल रहे स्थानीय और वैश्विक प्रयासों पर भी। बताया कि योरप के जिनेवा और ज्यूरिख जैसे शहरों में महात्मा गांधी और शांति को लेकर कई समूह और महानुभाव सक्रिय हैं। कुछ ही समय पहले प्रवास के समय राजगोपाल जी ने नेल्सन मंडेला की आत्मकथा पढ़ी – long walk to freedom.
जौरा के खादी भंडार ने एक नये रंग- रूप के गमछे की बुनाई शुरू की है। साबुन , शेम्पू से लेकर प्रसाधन में इस्तेमाल होने वाली चीजें घर में और गांव में ही कैसे बनें और बाजार से न खरीदनी पड़ें, इस दिशा में कुछ योजना बनाने पर भी चर्चा हुई।
महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव श्री दिलीप जैन, प्रबंधक श्री प्रफुल्ल श्रीवास्तव, एकता परिषद के कार्यकर्ता श्री उदयभान सिंह, खादी ग्रामोद्योग से जुड़े रहे श्री जगदीश सरघना, मुरैना खादी भंडार के प्रबंधक श्री कमल गुप्ता , श्री दिनेश सिकरवार, पत्रकार आनंद त्रिवेदी , फिल्म – मेकर श्री शशांक डंडोतिया, श्री योगेश श्रीवास्तव भी इस चर्चा के भागीदार बने।
समाजवादी विचारक प्रो. जयंत सिंह तोमर जी के फेसबुक वॉल से साभार।














