Search
Close this search box.

लंदन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विजय शंकर ने प्रस्तुत किया शोध-पत्र l

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

लंदन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विजय शंकर ने प्रस्तुत किया शोध-पत्र l

एआई और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर आयोजित सम्मेलन में 19 देशों के शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने लिया हिस्सा

निर्मली (सुपौल)। बिहार के सुपौल जिले के निर्मली स्थित हरि प्रसाद साह महाविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापक श्री विजय शंकर ने यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) स्थित प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन (London School of Management Education – LSME) द्वारा 28 एवं 29 अक्टूबर, 2026 को आयोजित 13वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ऑनलाइन माध्यम से अपना शोध-पत्र प्रस्तुत कर महाविद्यालय एवं बिहार का नाम अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर गौरवान्वित किया है।

इस वर्ष आयोजित सम्मेलन का मुख्य विषय (Theme) “AI and Quality Education” (कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) था। सम्मेलन में शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने जैसे समसामयिक एवं महत्त्वपूर्ण विषयों पर दुनिया के विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं अकादमिक विशेषज्ञों ने अपने विचार और शोध प्रस्तुत किए।

सम्मेलन में अफ्रीका, एशिया, यूरोप एवं दक्षिण अमेरिका सहित विभिन्न महाद्वीपों के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की भागीदारी रही। इसमें 19 देशों के प्रतिभागियों के कुल 107 शोध-पत्र प्रस्तुति के लिए चयनित किए गए थे।इनमें भारत के कुल 22 शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के शोध-पत्र भी प्रस्तुति के लिए चयनित किए गए थे l इस प्रकार इस सम्मेलन ने विभिन्न देशों के शिक्षाविदों को अपने शोध, अनुभव और नवाचारों के आदान-प्रदान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया।

श्री विजय शंकर की इस उपलब्धि को महाविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनकी सहभागिता से महाविद्यालय के शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय शोध गतिविधियों, अकादमिक लेखन, शोध-पत्र प्रकाशन तथा वैश्विक शैक्षणिक मंचों पर सहभागिता के लिए प्रेरणा मिलेगी। विशेषकर ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए ऐसी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि गुणवत्तापूर्ण शोध और अकादमिक प्रतिभा को भौगोलिक सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता।

READ MORE

[the_ad id="32069"]

READ MORE