अंग नगरी वाले नागरमल बाजोरिया उर्फ धरतीपकड़
-कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर
भारतीय चुनाव इतिहास के सबसे चर्चित निर्दलीय उम्मीदवारों में से एक थे। उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ले ली। उन्हें ईश्वर स्वर्ग में स्थान दे…सादर नमन
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संक्षिप्त परिचय
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नाम धरतीपकड़ कैसे पड़ा
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आजादी के समय इनका परिवार पाकिस्तान से भारत आया और भटकते हुए भागलपुर में बस गया। जिस मोहल्ले में रहते थे वहाँ पानी की किल्लत थी। नागरमल ने अपने पास से 250 रुपये खर्च कर नलकूप लगवाया। धरती फाड़ कर पानी निकला तो लोग इन्हें ‘धरती फाड़’ कहने लगे, जो बाद में इनकी चुनावी यात्रा के साथ ‘धरतीपकड़’ बन गया।
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चुनावी रिकॉर्ड
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– कुल नामांकन: 284 बार, चुनाव लड़े: 281 बार – 3 बार इनका नामांकन रद्द हुआ।
– एक अन्य रिकॉर्ड के अनुसार इन्होंने 278 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और प्रचार के लिए गधे का प्रयोग किया।
– कभी जीते नहीं, हर जगह पराजय का सामना किया फिर भी लड़ने की जिद नहीं छोड़ी।
इन बड़े नेताओं के खिलाफ लड़े
– पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से
– राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से
– राष्ट्रपति चुनाव में ज्ञानी जैल सिंह से लेकर प्रणब मुखर्जी तक के खिलाफ नामांकन किया। 2012 में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ वाला नामांकन रद्द हो गया था।
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आखिरी चुनाव
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2019 लोकसभा चुनाव स्वास्थ्य कारणों से नहीं लड़ सके और 2020 विधानसभा में भी चुनावी दौड़ से बाहर रहे।
इनका कहना था – चुनाव जीतने की तमन्ना नहीं, लोकतंत्र में सभी की भागीदारी को चरितार्थ करना ही उद्देश्य है।
चुनाव के अलावा समाज सेवा में भी इनका नाम है – कब्रिस्तान से श्मशान तक, धर्मशाला से मुसाफिरखाना तक 2500 से ज्यादा चापाकल लगवाए और कई सामूहिक शादियां करवाई थी।
वरिष्ठ पत्रकार श्री कौशल किशोर मिश्र जी के फेसबुक वॉल से साभार।














