विषय : बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-निर्माण, शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं एकरूपता तथा शैक्षणिक शोध एवं नवाचार को सुदृढ़ करने हेतु पृथक् “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” की स्थापना के संबंध में अनुरोध।
सविनय निवेदन है कि किसी भी राज्य की शिक्षा-व्यवस्था की गुणवत्ता का मूल आधार उसके विद्यालय, संसाधन अथवा तकनीक मात्र नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण, दक्ष एवं नवाचारी शिक्षक होते हैं। शिक्षक जितना सक्षम होगा, भावी पीढ़ी का ज्ञान, कौशल, चिंतन और व्यक्तित्व उतना ही समृद्ध होगा। अतः गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शिक्षक-शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दिया जाना आवश्यक है।
राज्य में कौशल, खेल, अभियंत्रण, चिकित्सा, विधि, कृषि, पशु विज्ञान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए पृथक् विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। यह राज्य की बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक सराहनीय पहल है। किंतु शिक्षा की संपूर्ण व्यवस्था को दिशा देने वाले शिक्षक के वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं आधुनिक प्रशिक्षण के लिए राज्य में अभी तक कोई समर्पित विश्वविद्यालय नहीं है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-शिक्षा को विशेष महत्व देते हुए शिक्षक-प्रशिक्षण की गुणवत्ता, बहुविषयक अध्ययन, शोध, नवाचार एवं 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड. कार्यक्रम को बढ़ावा देने की स्पष्ट दिशा निर्धारित की गई है। वर्तमान में राज्य के शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थान/महाविद्यालय विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबद्ध होकर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षक-शिक्षा के लिए एक विशेषीकृत एवं समर्पित विश्वविद्यालय की आवश्यकता और अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
प्रस्तावित “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” केवल एक नया विश्वविद्यालय न होकर बिहार में शिक्षक-निर्माण का उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) बनाया जा सकता है, जिसके माध्यम से शिक्षक-शिक्षा को एक समान अकादमिक दिशा, आधुनिक प्रशिक्षण, सतत व्यावसायिक विकास, शैक्षणिक शोध एवं नवाचार से जोड़ा जा सके।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रमुख उपयोगिता
1. शिक्षक-शिक्षा में गुणवत्ता एवं एकरूपता सुनिश्चित करते हुए पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, परीक्षा, मूल्यांकन एवं शैक्षणिक मानकों को समग्र रूप से विकसित किया जा सकेगा।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप आधुनिक, बहुविषयक एवं तकनीक-सक्षम शिक्षक-प्रशिक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
3. शिक्षक-प्रशिक्षुओं एवं कार्यरत शिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास, शोध, नवाचार एवं उन्नत प्रशिक्षण का राज्यस्तरीय समर्पित मंच उपलब्ध होगा।
4. विद्यालयी शिक्षा की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित शैक्षणिक अनुसंधान एवं स्थानीय नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिहार की अपनी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी मॉडल विकसित किए जा सकेंगे।
5. बिहार की प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी को शिक्षक बनने से आगे बढ़कर उत्कृष्ट शिक्षक, प्रशिक्षक, शोधकर्ता एवं शैक्षणिक नेतृत्वकर्ता बनने के लिए एक समर्पित संस्थागत मंच प्राप्त होगा।
इस प्रकार यह विश्वविद्यालय राज्य में शिक्षक-प्रशिक्षण की मात्र औपचारिक आवश्यकता पूरी करने वाला संस्थान न होकर “श्रेष्ठ शिक्षक-श्रेष्ठ शिक्षण-श्रेष्ठ विद्यार्थी-श्रेष्ठ बिहार” की परिकल्पना को साकार करने वाला विशिष्ट शैक्षणिक संस्थान बन सकता है। यह बिहार की मेधा एवं प्रतिभा को तराशने, उसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी कौशल से जोड़ने तथा देश के लिए उत्कृष्ट शिक्षक-मानव संसाधन तैयार करने में अन्य सामान्य विश्वविद्यालयों से अपनी विशिष्ट उपयोगिता एवं सार्थकता सिद्ध कर सकेगा।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को दृष्टिगत रखते हुए “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” की स्थापना के प्रस्ताव पर उच्चस्तरीय विचार करते हुए आवश्यक नीति-निर्णय एवं अग्रेतर कार्रवाई हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित करने की कृपा की जाए। साथ ही, शिक्षक-समुदाय के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता एवं सम्मान के प्रतीक के रूप में आगामी 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” की स्थापना की घोषणा किए जाने की कृपा की जाए, जो बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-निर्माण की दिशा में एक दूरगामी एवं महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।
आदर सहित।
(संजीव कुमार सिंह) स. वि. प.














