सहायक प्राध्यापक भर्ती पर बड़ा फैसला: 2026 का परिनियम स्थगित, 15 दिन में बनेगी समीक्षा समिति
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लोक भवन में राज्यपाल से आंदोलनकारी छात्रों की दो घंटे वार्ता के बाद बनी सहमति; संशोधन तक नियमित और संविदा नियुक्तियों पर रोक
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खबर का सार : गर्दनीबाग में 21 दिनों से जारी अनशन के बीच लोक भवन में राज्यपाल और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की दो घंटे वार्ता के बाद सहमति बनी। 2026 के सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम को संशोधन तक स्थगित रखने और 15 दिनों में उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर सहमति हुई।
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बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति को लेकर चल रहे आंदोलन ने सोमवार को निर्णायक मोड़ ले लिया। गर्दनीबाग में 21 दिनों से अनशन कर रहे छात्रों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से राज्यपाल ने लोक भवन में करीब दो घंटे तक वार्ता की, जिसके बाद सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम, 2026 की समीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। वार्ता के बाद अनशनकारी छात्रों ने अपना अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया।
राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, 2026 के परिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाने तक उसके आधार पर सहायक प्राध्यापकों की किसी भी प्रकार की नियमित अथवा संविदा नियुक्ति नहीं की जाएगी। तब तक इस परिनियम को स्थगित रखा जाएगा।
15 दिनों में बनेगी समिति
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आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर विचार के लिए 15 दिनों के भीतर एक समिति गठित की जाएगी। राज्यपाल मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद इस समिति का गठन करेंगे।
समिति में बिहार के प्रमुख शिक्षाविदों के साथ ऐसे प्रशासकों को भी शामिल किया जाएगा, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का अनुभव हो।
यह समिति उम्र सीमा, लिखित परीक्षा, API, शोध प्रकाशन, अनुभव और अतिथि सहायक प्राध्यापकों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेगी।
55 वर्ष अधिकतम उम्र सीमा पर विचार
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समिति के सामने सहायक प्राध्यापक पद के लिए अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष किए जाने की मांग रखी जाएगी।
इसके साथ ही आंदोलनकारी छात्रों के उस सुझाव पर भी विचार होगा कि अधिकतम उम्र सीमा को एक साथ कम करने के बजाय धीरे-धीरे कम किया जाए। इस दौरान सहायक प्राध्यापकों की बहाली प्रत्येक वर्ष रिक्तियों के विरुद्ध नियमित रूप से किए जाने का भी सुझाव है।
लिखित परीक्षा और API से बने मेरिट
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समिति इस बात पर विचार करेगी कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा आयोजित हो, लेकिन वह वस्तुनिष्ठ प्रकृति की हो।
लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के API की गणना की जाए और लिखित परीक्षा के प्राप्तांक तथा API को जोड़कर समेकित मेरिट लिस्ट तैयार की जाए। इसी मेरिट के आधार पर निर्धारित संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाने का प्रस्ताव है।
इंटरव्यू में टीचिंग डेमो भी शामिल करने पर विचार होगा।
API में PhD को अधिक महत्व देने की मांग
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API को लेकर भी आंदोलनकारी छात्रों की कई मांगों पर समिति विचार करेगी।
इसके तहत—
#API में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के अंकों की गणना नहीं की जाए;
#NET और JRF की अधिमानता को 11 तक रखा जा सकता है;
#PhD की अधिमानता 30 से कम नहीं हो;
#शोध प्रकाशन और अनुभव को भी API स्कोर में शामिल किया जाए।
साथ ही शोध प्रकाशन और अनुभव को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की मांग है, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे और प्रावधान का गलत लाभ नहीं उठाया जा सके।
अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मुद्दे पर भी विचार
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वार्ता में अतिथि सहायक प्राध्यापकों की मांगों को भी शामिल किया गया है।
समिति इस मांग पर विचार करेगी कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों को वर्तमान में बहाल संविदा सहायक प्राध्यापकों की तरह न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता दिया जाए।
इसके अलावा सभी विश्वविद्यालयों में उनके नवीकरण की प्रक्रिया एक समान रखने तथा उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र और अनुभव की समुचित जांच के बाद उन्हें 65 वर्ष तक कार्य करने का अवसर देने की मांग पर भी विचार होगा।
21 दिन के आंदोलन के बाद बनी सहमति
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गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से जारी अनशन के बाद हुई यह वार्ता आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, इसे सभी मांगों की तत्काल स्वीकृति के रूप में देखना सही नहीं होगा।
मुख्य मांगों पर विचार, परिनियम में आवश्यक संशोधन और उसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। उम्र सीमा, API में अंकों का निर्धारण, परीक्षा का स्वरूप, टीचिंग डेमो और अतिथि सहायक प्राध्यापकों से संबंधित मांगों पर अंतिम निर्णय समिति की प्रक्रिया के बाद होगा।
इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण होगा कि अगले 15 दिनों में समिति का गठन होता है या नहीं और उसके बाद भर्ती परिनियम में क्या बदलाव किए जाते हैं।
लोक भवन में हुआ निर्णायक संवाद
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इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को लोक भवन में राज्यपाल के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला और वहीं दो घंटे की वार्ता के बाद सहमति बनी।
यानी गर्दनीबाग का 21 दिन पुराना आंदोलन अंततः राजभवन स्तर की बातचीत तक पहुंचा और उसके बाद सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमों की समीक्षा का औपचारिक रास्ता खुला।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहे
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राज्यपाल से वार्ता करने वाले छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में एमएलसी (शिक्षक प्रतिनिधि) जीवन कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) कुंदन सिंह, उमेश कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) विभा रानी तथा शोध छात्र आशीष कुमार और मोनू कुमार राय शामिल थे।
अब असली नजर 15 दिनों पर है—समिति का गठन कितनी जल्दी होता है और 2026 के भर्ती परिनियम में किन प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश की जाती है।
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