श्री सत्यनारायण जी को सादर नमन
——-
बिहार राज्य गीत ‘मेरे भारत के कंठहार, तुझको शत-शत वंदन बिहार’ के यशस्वी रचनाकार सुप्रसिद्ध लेखक एवं कवि श्री सत्यनारायण जी का लगभग 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। यह बिहार एवं पूरे भारत के साहित्यिक जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।
श्री सत्यनारायण का जन्म 13 सितंबर, 1935 को तत्कालीन शाहाबाद (अब भोजपुर) जिले के कौलोडिहरी गांव में हुआ था।
आप पटना कालेजिएट के छात्र थे। आपने यहां सन् 1942 में एक काव्य पाठ प्रतियोगिता में जयद्रथ वध के कुछ अंशों का पाठ किया था और उसके लिए पुरस्कृत हुए थे। यहीं से उनका साहित्य के प्रति लगाव पैदा हुआ। इसके बाद ताउम्र साहित्य की सेवा करते रहे।
आप लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के करीबी थे और आपने उनकी अगुवाई में संपूर्ण क्रांति आंदोलन (जेपी आंदोलन) में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान वे लोक जागरण के लिए फणीश्वरनाथ रेणु के नेतृत्व में नुक्कड़ चौराहे पर निरंतर काव्य पाठ करते थे।
आपने साहित्य की प्रायः सभी विधाओं में अपनी लेखनी चलाई। आपकी प्रमुख रचनाओं में सुने प्रजानन, टूटते जल बिम्ब, स्मृतियों में संस्मरण, धरती से जुड़कर, गीत, धार पर हम, समर शेष है आदि है। आपकी रचनाएं धर्मयुग, स्मारिका, आजकल आदि पत्रिकाओं और विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित हुई।
आप हिंदी प्रगति समिति मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा विभाग) के अध्यक्ष थे। आप 1993 में बिहार सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। आपको आपके विशिष्ट साहित्यिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें राजभाषा विभाग बिहार सरकार की ओर से हिंदी सेवा सम्मान के तहत 2020-21 के लिए नागार्जुन सम्मान, 2003 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, प्रकाशन विभाग की ओर से 2003 में भारतेन्दु हरिश्चचंद्र पुरस्कार प्रमुख हैं। इसके अलावा बिहार राष्ट्र भाषा परिषद, बिहार सरकार की ओर से विशिष्ट साहित्य सेवा सम्मान दिया गया था।
यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर 21 मार्च, 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आपके लिखे बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार…’ का विमोचन किया थे।आपको ‘तुम ना नहीं कर सकते’ कविता संग्रह के लिए रमण साहित्य पुरस्कार, ‘टूटते जल बिंब’ पर राजभाषा विभाग बिहार सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ संकलन के लिए गोपाल सिंह नेपाली पुरस्कार, “सभाध्यक्ष हंस रहा है’ पर वाराणसी में डॉ. शंभूनाथ सिंह नवगीत पुरस्कार दिया गया था। आप बिहार सरकार के साहित्यिक पुरस्कारों के लिए निर्णायक मंडल के भी सदस्य रह चुके थे।
आप हिंदी साहित्य सम्मेलन से भी जुड़े रहे। सम्मेलन परिसर में 13 सितंबर 2026 को आपके 92वें जन्म दिवस पर अभिनंदन समारोह और उ
आपकी समग्र रचनावली सत्यनारायण समग्र का विमोचन होना था। लेकिन इसके पहले ही आप अपने भौतिक शरीर को छोड़कर अनंत-यात्रा पर चले गए।

मेरा यह सौभाग्य है कि मुझे एकाध बार श्री सत्यनारायण जी से मिलने और उन्हें सुनने का सुअवसर मिला है। मैंने लगभग 9 वर्ष पूर्व पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में आपको अपनी पुस्तक ‘गांधी-विमर्श’ भेंट की थीं। आपने मेरी भेंट सहर्ष स्वीकार करते हुए मुझे प्रोत्साहित किया था। सादर नमन! विनम्र श्रद्धांजलि!!
🙏🙏🙏🙏🙏















