*राखी भाई – बहन के बीच अपनत्व और अटूट विश्वास को दर्शाने वाला पर्व*
रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर बंधा एक धागा नहीं बल्कि भाई बहन के बीच बचपन की शरारतों, अनगिनत यादों
और उम्रभर साथ निभाने का विश्वास है,रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत भावनात्मक और पवित्र पर्व है। यह केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, स्नेह, जिम्मेदारी और पारिवारिक संबंधों की गरिमा का उत्सव है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और अधिक मजबूत करता है।उक्त बातें आजाद पुस्तकालय के सचिव युवा साहित्यकार डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने रक्षाबंधन पर भाई बहनों को राखी की बधाई देते हुए कही।उन्होंने कहा रक्षाबंधन का अर्थ सिर्फ शारीरिक सुरक्षा नहीं है। यह एक-दूसरे के सम्मान, भावनाओं, अधिकारों और जीवन के सुख-दुःख में साथ खड़े रहने का संकल्प भी है।
*परिवार में सबको जोड़ने वाला पर्व है रक्षाबंधन*
डॉक्टर राठौर ने कहा कि भारतीय पारिवारिक संस्कृति की झलक इस पर्व में देखने को मिलती है दूर रहने वाले भाई-बहन भी इस दिन एक-दूसरे से मिलने या शुभकामनाएँ देने का प्रयास करते हैं। इस तरह यह पर्व रिश्तों में आई दूरियों को कम करता है।
*पौराणिक एवं ऐतिहासिक मह्त्व वाला पर्व है राखी*
रक्षाबंधन से जुड़ी अनेक पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएँ भारतीय परंपरा में प्रचलित हैं। इनमें इंद्र-इंद्राणी, श्रीकृष्ण-द्रौपदी और रानी कर्णावती,हुमायूँ से जुड़ी कथाएँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन कथाओं ने इस पर्व को त्याग, विश्वास और रक्षा की भावना से जोड़ा है।
रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि रिश्ते केवल अधिकार से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और विश्वास से मजबूत होते हैं। राखी का छोटा-सा धागा हमें यह बड़ा संदेश देता है कि प्रेम में सुरक्षा है, विश्वास में शक्ति है और रिश्तों में जीवन की सबसे बड़ी संपदा छिपी है। राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधता,यह दो दिलों के बीच विश्वास और अपनत्व का रिश्ता बाँधता है।
वहीं डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि बच्चों के बीच रक्षाबंधन को लेकर बहन द्वारा आरती करने,राखी बांधने,मिठाई खिलाने और भाई द्वारा उपहार देने की उत्सुकता बचपन के राखी की याद दिलाती है उन्होंने कहा यह भारत का सर्वाधिक पवित्र पर्व है इसका महत्व सदैव बरकरार रहना चाहिए।














