बतरस के पहले दिन साक्षी हैं शब्द और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
…………………
मनुष्यता और प्रतिरोध का आख्यान रचती हैं कविताएं
…………………….
23 अक्टूबर रायबरेली। प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था बतरस की ओर से प्रज्ञा भवन में ‘साक्षी हैं शब्द’ (रचना पाठ, समीक्षा और परिचर्चा), ‘सांस्कृतिक संध्या’ और ‘अनौपचारिक बतरस’ का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर बैसवाड़े के वरिष्ठ कवि राम करन सिंह, अंजनी कुमार सिंह, उमेश पंकज और कवि-पत्रकार कौशल किशोर ने अपनी कविताओं का पाठ किया।इन कवियों ने अपने समय के सच को अपनी कविताओं के केंद्र में रखा है।प्रेम, प्रकृति और प्रतिरोध की जमीन पर खड़ी कविताओं में जीवन के कई सवाल मौजूद हैं।इन चारों वरिष्ठ कवियों की कविताओं पर समीक्षक ब्रजेश सिंह,आशीष मिश्रा, अजीत प्रियदर्शी और आशीष सिंह ने अर्थपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया।
स्वागत भाषण देते हुए डॉ शालिनी शाहू ने कहा कि बतरस संस्था देश भर से आए रचनाकारों और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करती है। बतरस का परिचय देते हुए राज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बतरस की योजना दस लोगों को सात साल पहले बनी। तब से लेकर अब तक बतरस की प्रतिष्ठा और स्वीकार्यता बढ़ी है।यह संस्था मतभेद का स्वागत करती है मनभेद को नहीं।कार्यक्रम के संयोजक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा शब्द भाव और विचार का वाहक है।यह शोषकों के खिलाफ एक प्रतिरोध है। कविता में तर्कशीलता और मनुष्यता का भाव होना चाहिए।इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में मानस चौधरी, रोहित मिश्र, रोहित अवस्थी। रवि सिंह, सविता सिंह, सुनील सरगम, हंसराज, अशोक मिश्र ने हिस्सा लिया। इसका संयोजन यज्ञदत्त शुक्ल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन रमन सिंह ने दिया।
बतरस के साथियों की बतकही में संजय जायसवाल, असित कुमार पांडेय, अंकुश कुमार, कृति बरनवाल, मंटू दास, मधु प्रिया, पूजा गुप्ता और राज कुमार श्रीवास्तव ने हिस्सा लिया। विशिष्ट वक्ता के रूप में वक्तव्य देते हुए मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा बतरस का यह मंच आपसी संवाद के अलावा युवाओं और शिशुओं के लिए एक बड़ा अवसर है। 
इस अवसर पर हंसराज के संपादन में बतरस पत्रिका का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डाॅ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, शिवा शंकर श्रीवास्तव सहित दर्जनों सदस्यों का विशेष सहयोग मिला।कार्यक्रम का सफल संचालन दीप अमन और धन्यवाद ज्ञापन अभिषेक सिंह अंकुर ने दिया।













