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त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ

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विश्वविद्यालय गांधी विचार विभाग तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर द्वारा दिनांक 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन विश्वविद्यालय के बहुद्देशीय प्रशाल में 30 सितंबर 2026 को पूर्वाहन 10:30 बजे अखिल भारतीय गांधी अध्ययन समिति के अध्यक्ष प्रो. सुधीर जेना द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रोफेसर रंजना दुबे ने की। इस अवसर पर सम्मानित अतिथि के रूप में काठमांडू नेपाल से श्री पवन थापा मगर मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कृष्ण कुमार सिंह, विशिष्ट अतिथि छात्र कल्याण सह संकायाध्यक्ष, समाज विज्ञान के प्रो. अर्चना शाह, कुलसचिव प्रो. रामाशीष पूर्वे, टी.एन.बी. कॉलेज के प्राचार्य प्रो.दीपो महतो, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. संतोष भदोरिया रविंद्र भारती विश्वविद्यालय कोलकाता से प्रो. हितेंद्र पटेल बिहार नागरिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. रतन मंडल, गांधी विचार विभाग के विभागाध्यक्ष सह सेमिनार संयोजक डॉ अमित रंजन सिंह, सेमिनार के संयोजक डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी, आयोजक सचिव डॉ उमेश प्रसाद नीरज, कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में संरक्षक के रूप में गांधी विचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रभारी कुलपति प्रो. मनोज कुमार एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मंच पर मौजूद थे। मंच का संचालन विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉक्टर राहुल एवं एसएम कॉलेज अंग्रेजी विषय की सहायक प्राध्यापिका डॉ.सुप्रिया ने किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन अखिल भारतीय गांधी अध्ययन समिति के अध्यक्ष सुधीर जेना के साथ मंचासीन अतिथियों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। तत्पश्चात राष्ट्रगीत राष्ट्रगान गया गया। विश्वविद्यालय गांधी विचार की परंपरा के अनुसार गांधी जी के प्रिय भजन-रघुपति राघव राजा राम, सर्वधर्म समभाव का सामूहिक गायन किया गया।
विभागाध्यक्ष डॉक्टर अमित रंजन सिंह ने आगत अतिथियों का स्वागत किया, विषय प्रवेश आयोजक सचिव सह गांधी विचार विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने किया। विषय प्रवेश कराते हुए डॉ.नीरज कहा कि आज गांधी विचारों की प्रासंगिकता पर बात करने से ज्यादा जरूरी यह है कि वर्तमान समस्याओं के समाधान में गांधी के कौन सी दृष्टि आवश्यक है, क्योंकि आज जो समस्या दुनिया के सामने है उसके समाधान का विकल्प दुनिया को ढूंढना पड़ेगा और इस क्रम में सारी दुनिया गांधी विचार की ओर देख रहा है।
“ज्ञान,कौशल और परंपरा:गांधी- दृष्टि का समकालीन परिप्रेक्ष्य” विषय पर सेमिनार आयोजित करने की योजना पिछले 1 वर्षों से प्रो.(डॉ) मनोज कुमार और गांधी विचार विभाग के फैकल्टी मेंबर के साथ चर्चा कर रहे थे। 1925 में चरखा संघ की स्थापना और 1925 में ही गांधी द्वारा आत्मकथा लेखन की शुरुआत की गई थी। इसे देखते हुए और और वर्तमान चुनौतियां और उसके समाधान को ध्यान में रखते हुए इस विषय का चयन किया गया।

रविंद्र भारती विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. हितेंद्र पटेल कहां कि –
हम लोगों को गांधी के पास जाने के अलावा कोई उपाय नहीं है। परंपरा हम लोगों के लिए उपयोगी है।
तकनीक जैन -जी को क्या बना रही है- स्वतंत्र या पराधीन ?
-गांधी जी की सबसे ज्यादा याद आती हैं- नैतिक उत्तरदायित्व के लिए। -आप सत्य के साथ रहना चाहते हैं या वायरल होना। गांधी के प्रश्न विरोध की ऊर्जा को निर्माण की शक्ति में कैसे प्रणित करे।
पवन थापा(नेपाल)बात रखते हुए कहा कि आज के जमाने में महात्मा गांधी के विचार बहुत महत्वपूर्ण है।
मुख्य अतिथि प्रो. कृष्ण कुमार सिंह, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने कहा कि
– हमारी बातें ही बातें हैं सैयद काम करता था हमारी बातें ही बातें हैं सैयद काम करता था ना भूलो फर्क कहने और करने वालों में करने वालों में । करने वालों में गांधी कहने वाले नहीं थे गांधी करने वाले थे ।
-एक तोला सोना और एक तोला आचरण में,इन दोनों में से अगर चुनना हो तो गांधी एक तोला आचरण चुनते।
-श्रुति और स्मृति और स्मृति की परंपरा से ही हमारे यहां संरक्षित हुआ है सुरक्षित रहा है तो अपने उन महान पूर्वजों को भी याद करने का और उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करने का इस तरह का अवसर होता है ।
– हमारी कुशलता को शिक्षा बढ़ती है जो संस्कार हमें मिला हुआ है उसे संपूर्ण संस्कारों में हमें संस्कारवान भी बना है और जैसा कि कहा गया कि गांधी की निगाह में कोई दुश्मन नहीं होता था।
गांधी दृष्टि संवाद को बहुत महत्वपूर्ण मानती हैं।

विश्वविद्यालय गांधी विचार विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार कुमार ने कहा कि-अगर हमारी अंतरात्मा कह रही हैशिक्षा में गड़बड़ है तो इस शिक्षा को बदलने की जिम्मेदारी किसकी लेनी होगी।
-अपने आप में कर्मियों को स्वीकार करना होंगी ।
टीएनबी कॉलेज की अप्राचार्य प्रो. दीपो महतो ने अपने वक्तव्य मेंकहा कि
-गांधी को अपनाइए, जो गांधी को अपनाएगा वह खुद महान हो जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रभारी कुलपति प्रो. रंजना दुबे ने कहा कि –
-हमें राष्ट्र की परंपरा और मूल्य पर विशेष ध्यान देनी होगी।
अल्टीमेट पीएनबी इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ रवि शंकर कुमार चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
भोजन अवकाश के बाद 3:30 बजे अपराह्न से एम बी ए विभाग के कक्ष में ज्ञान कौशल और परंपरा तथा साहित्य संस्कृति और समाज विषय पर दो समानांतर सत्र का आयोजन किया गया। प्राथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. अमरकांत सिंह ने की बीज वक्तव्य प्रोफेसर संतोष भदौरिया, पूर्व निर्देशक गांधी विचार एवं शांति अध्ययन केंद्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय,ने दिया जबकि द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. दीपु महतो प्राचार्य टी एन बी महाविद्यालय ने किया और बीज वक्तव्य प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ,पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र ने दिया। तीसरा सत्र ऑनलाइन मोड में आयोजित हुआ। इन सभी सत्रों में विषय से संबंधित विभिन्न विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और शोध छात्र शामिल हुए और उन्होंने अपने-अपने शोध आलेख प्रस्तुत किया।

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