*आजाद पुस्तकालय कतराहा के बैनर तले हिंदी पत्रकारिता : कल, आज और कल विषय पर परिचर्चा आयोजित*
*_वक्ताओं ने कहा पत्रकारिता मिशन बने व्यावसाय नहीं_*
*_उचित और अनुचित में भेद करना पत्रकारिता का पहला चरण_*
*_न्यूज और व्यूज को अलग अलग रखना जरूरी_*
*_ब्रेकिंग न्यूज़ समाज को ब्रेक करने वाली वाली नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाली हो_*
*_विकास के साथ डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारों की बढ़ी है जिम्मेदारी*_
आजाद पुस्तकालय, कतराहा के बैनर तले रविवार को हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर में मधेपुरा जिला स्थापनोत्सव विशेष कार्यक्रमों की कड़ी में ‘हिंदी पत्रकारिता कल आज और कल’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें पत्रकारिता के तीनों प्रमुख प्रारूपों प्रिंट, इलेक्ट्रानिक एवं वेब मीडिया से जुड़े प्रमुख पत्रकारों की उपस्थिति रही और सबों ने खुले मन से अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में मानविकी संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पहले पत्रकारिता साहित्य का अंग होती थी और सुधी साहित्यकार ही पत्रकार होते थे। आज यह पैमाना नहीं रहा।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज समाज के सभी क्षेत्रों में नैतिक गिरावट आई है और पत्रकारिता पर भी इसका कुप्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद पत्रकारिता में अभी भी उम्मीद की किरण बची हुई है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसमें कल भी चुनौतियां थीं, आज भी हैं और आगे भी रहेंगी। हमें चुनौतियों के बीच से ही रास्ता बनाने की जरूरत है।
उन्होंने पत्रकारिता में आत्ममूल्यांकन और आचार संहिता के पालन पर जोर दिया। साथ ही इस बात को रेखांकित किया कि आज डिजिटल पत्रकारिता के दौर में मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि पत्रकारिता पहले मिशन हुआ करती थीं। लेकिन आज वह व्यवसाय हो गई है। ऐसे में आने वाले कल में हमारी चुनौतियां और भी बढ़ने वाली हैं।
विशिष्ट अतिथि वरीय पत्रकार राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारिता एक गंभीर कार्य है। इसे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की सिद्धि अथवा लोगों को ऐन-केन-प्रकारेण प्रभावित करने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
विषय प्रवेश करते हुए वरीय पत्रकार मनीष वत्स ने कहा कि आज पत्रकारिता स्वतंत्रता का उदंडता में बदलना दुखद है। आज न्यूज से ज्यादा व्यूज की चाहत पत्रकारिता के चरित्र पर सवाल खड़े कर रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजशास्त्री डॉ. आलोक कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ। सारंग तनय, पत्रकार तुरबसु, प्रशांत कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सबों ने पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत को रेखांकित किया, वर्तमान की दशा एवं दिशा पर प्रकाश डाला और भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करने की कोशिश की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए आजाद पुस्तकालय कतराहा के सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने सबों का आभार जताया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलन एवं मधेपुरा के महापुरुषों की तस्वीर पर पुष्पांजलि के साथ हुई। कार्यक्रम के अंत में आजाद पुस्तकालय की किट , स्मारिका और पुस्तक भेंट कर सभी पत्रकारों को सम्मानित किया गया।
मौके पर कार्यक्रम के सह संयोजक युवा पत्रकार अमित अंशु, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रसन्ना सिंह राठौर, मनीष कुमार, मिराज आलम, गणेश, आदि उपस्थित रहे।














