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कविता जीवन , संघर्ष और मनुष्यता का आख्यान है

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कविता जीवन , संघर्ष और मनुष्यता का आख्यान है
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भारतीय भाषा परिषद में साहित्य संवाद का आयोजन
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12 सितंबर कोलकाता।

भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए आशीष झुनझुनवाला ने कहा कि हमारी प्राचीन परंपरा में भी संवाद को काफ़ी महत्व दिया गया है। यह आयोजन संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि साहित्य मनुष्य की पीड़ा, संघर्ष और जीवंतता का आख्यान है। यह आयोजन यह आश्वस्त करता है कि काव्य सबके हृदय में बसा हुआ है। इस अवसर पर चर्चित कवि शैलेष गुप्ता ने ‘कुछ भी नहीं रहा निरपेक्ष’, ‘अल्पसंख्यक हूँ मैं भी’, ‘अतिरिक्त अक्षर’, ‘तुम्हारे होने में’, ‘दर्द की शायरी नहीं करता’, ‘सब शुरू से शुरू करे फिर से’, संजय राय ने ‘उबलती हुई चुप्पी’, ‘आवाज़ की अर्द्ध छवियाँ’, ‘आत्महत्या’, ‘बारिश की नींद’, ‘अनसोई रातों की बेचैनियाँ’, ‘ऐसी कार में चाँद और उदास लड़का’, ‘छूटी रह गई चीज़ों की तस्वीर’, ‘मॉब लींचिंग’, ‘लोकतांत्रिक तानाशाह’, ‘पुराने दोस्त’, ‘एक साधारण कथा’, ‘अपने समय की तकनीकी सुविधाओं के बहाने’, ‘एक टुकड़ा शहर’ और युवा कवयित्री सुषमा कुमारी ने ‘रचने आयेंगे’, ‘तुम नहीं जानते’, ‘क्या थे’, ‘घर’, ‘जादू’, ‘तुम्हारा शहर’, ‘चिड़िया’, ‘मेरे गाँव की मोनालिसा’, ‘भ्रम’ शीर्षक कविताओं का पाठ किया। इनकी कविताओं में प्रेम, प्रकृति, समाज और तकनीक के अलग-अलग शेड्स दिखाई दिए। संवाद सत्र के अंतर्गत कवियों से उमा डगमान, मनीषा गुप्ता, निशार अहमद, सत्यम पांडेय, अनूप प्रसाद और संजना जायसवाल ने सवाल किया।
समीक्षा करते हुए मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि आजकल सुनना सौभाग्य की बात है। कविता केवल कहती नहीं है बल्कि दिखाती भी है। कविता में कहानी आ जाए तो कविता लंबे समय तक ज़ेहन में रहती है। संजय जी की छोटी कविताएँ आकार में छोटी लेकिन भाव में कम्पलीट होती हैं। यह उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। सुषमा जी की कविताओं की खासियत यह है कि जो भाव वे देख रही हैं, लिख रही हैं; ये दृश्य पाठक और श्रोता तक हुबहूँ पहुंचते हैं। मॉडरेटर सूर्य देव रॉय ने कहा कि साहित्य संवाद अपने आप में एक अनोखा कार्यक्रम है। हम जानते हैं कि कविताएँ पाठकों से संवाद करती हैं। इस कार्यक्रम में पाठक कवियों से सीधा संवाद कर सकते हैं।
इस अवसर पर कवि परिचय के रूप में श्रद्धा कुमारी, अजय पोद्दार, लक्ष्मी यादव और आदित्य तिवारी ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर परिषद के वित्त मंत्री घनश्याम सुगला,शहर के चर्चित कवि नील कमल, डॉ. वंशीधर शर्मा, पद्माकर व्यास, राजेश कुमार साव, संगीता व्यास,आनंद गुप्ता, मंटू दास, राजेश प्रसाद, अनिल शाह, रूपेश यादव, अर्जुन सार्की, सुमैया सरवत, ईशा गुप्ता, इशरत जहाँ और प्रतिभा साव समेत दर्जनों साहित्यप्रेमी मौजूद थे। इस अवसर पर नैना प्रसाद ने काव्य गायन किया। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए मिशन के महासचिव संजय जायसवाल ने कहा कि इस आयोजन का यह उद्देश्य ही है कि एक रचनात्मक संवाद स्थापित हो। सृजन के साथ हमारी जो यह सहयात्रा है, यह हमारी प्रतिबद्धता का परिचायक है। आपका यह साथ और सहयोग बना रहे ।

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विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों के Ph.D. पंजीयन की प्रक्रिया को समयबद्ध करने तथा विश्वविद्यालयों में नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने पर सेवा-संपुष्टि की कार्रवाई सुनिश्चित करने के संबंध में अनुरोध ।