Search
Close this search box.

विदा रीवा : आस उस दर से टूटती ही नहीं; जाके देखा, न जाके देख लिया…

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

विदा रीवा : आस उस दर से टूटती ही नहीं; जाके देखा, न जाके देख लिया…

31 जुलाई, 2026, दिन शुक्रवार। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय,रीवा मध्य प्रदेश के हिन्दी विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं अध्यक्ष पद से अपराह्न सेवा निवृत्त होकर कार्य मुक्त हुआ।

दिनभर आयोजनों का सिलसिला चला। तकरीबन पांच सौ लोग नगर और विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अन्य नगरों से आये थे।मेरे शोध निर्देशन में कुल 46 छात्र-छात्राओं ने पी-एच.डी की उपाधि प्राप्त की। उनमें सत्ताईस लोग विभिन्न जगहों से आये थे। 

आज पांचवें दिन कुछ खाली हुआ हूं। अपने प्रति लोगों का प्यार,दुलार , आदर देखकर अभिभूत हूं। कैबिनेट मंत्री, विधायक, मित्रों का हूजूम। आज शाम तक तांता लगा रहा। कल सुबह गुरु जी काशीनाथ सिंह के पास जा रहा हूं।

अब उफनते ज्वार का आवेग मद्धम हो चला है        यह शिला पिघले न पिघले रास्ता नम हो चला है       यह लड़ाई जो कि अपने आप से मैंने लड़ी है           यह घुटन यह यातना केवल किताबों में पढ़ी है        यह चढ़ाई पांव क्या चढ़ते इरादों ने चढ़ी है             अब दरीचे ही बनेंगे द्वार                                     अब तो पथ यही है।

मित्रो! रीवा में लगभग तैंतीस साल कैसे फुर्र हुए पता ही नहीं चला। तेईस साल तो विभागाध्यक्ष ही रहा।शायद देश के किसी विश्वविद्यालय के किसी भी प्रोफेसर का सबसे बड़ा कार्यकाल। यही मेरा सौभाग्य था और दुर्भाग्य भी।घर और लेखन दोनों छूट गये। बहुतों ने काम निकल जाने पर कन्नी काट ली। अजनबी हो गये।

मैं कहीं भूल जाऊं न तुमको कि कई अहद तुमने लिए थे.                                                                  फिर तेरा इस कदर भूल जाना जैसे हम तेरे कुछ भी नहीं थे।

ख़ैर। बहुत खोया,बहुत पाया। ख़ुद अपने आप को रास नहीं आया।

ये बज़्म ए मयख़ाना,लाहौल बिला क़ूबत                और हज़रत ए मौलाना, लाहौल बिला क़ूबत।

अब वर्षा वास बिताकर भोपाल जाना है।शेष जीवन वहीं और गांव में बीतेगा।परलोक क्या सुधारूंगा अपने को कुछ लिखने पढ़ने में लगाऊंगा। देह और मन को कसूंगा।जो बरसों से तन मन से चिपका है उसे एक ही दिन में नोंच कर फेंक तो नहीं दूंगा। बहुत याद आयेंगे रीवा के दोस्त। बहुत याद आयेगा रीवा,सीधी,सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, पन्ना , छतरपुर, ओरछा सिंगरौली।वे सभी प्यारे लोग जो मुझे आंखों और दिल में बसा लिए थे उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। राही मासूम रज़ा ने कभी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छोड़कर मुंबई को अपना कर्म क्षेत्र बना लिया था। वे उसे याद करते हुए कहते हैं-

जिनसे हम छूट गये,अब वो जहां कैसे हैं              शाखे गुल कैसी है, ख़ुशबू के मकां कैसे हैं                 ऐ सबा तू तो उधर ही से गुज़रती होगी                  अब उस गली में इन क़दमों के निशां कैसे हैं।

-सुप्रसिद्ध कवि प्रो. दिनेश कुशवाहा जी के फेसबुक वॉल से साभार।

READ MORE

अनशनकारी छात्रों के साथ राज्यपाल की वार्ता के उपरान्त बनी सहमति पटना 24 अगस्त, 2026-अनशनकारी छात्रों के साथ माननीय राज्यपाल, बिहार के साथ वार्ता के उपरान्त सहमति बनी। ऑल पीएच.डी. होल्डर्स एण्ड रिसर्च एसोसिएशन के बैनर तले गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे छात्रों के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिगडल के साथ माननाय राज्यपाल, बिहार का 02 घट का वाता के उपरान्त अनशनकाच छात्रा जपना वापस लेने का आश्वासन दिया।

मेरे गांव राधानगर के शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है ओर हो भी क्यों ना जब मेरे गांव का नामकरण (राधानगर) ही एक राष्ट्रपति अवॉर्डी शिक्षक श्री राधारमण जी के नाम पर किया गया हो ।

[the_ad id="32069"]

READ MORE

अनशनकारी छात्रों के साथ राज्यपाल की वार्ता के उपरान्त बनी सहमति पटना 24 अगस्त, 2026-अनशनकारी छात्रों के साथ माननीय राज्यपाल, बिहार के साथ वार्ता के उपरान्त सहमति बनी। ऑल पीएच.डी. होल्डर्स एण्ड रिसर्च एसोसिएशन के बैनर तले गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे छात्रों के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिगडल के साथ माननाय राज्यपाल, बिहार का 02 घट का वाता के उपरान्त अनशनकाच छात्रा जपना वापस लेने का आश्वासन दिया।

मेरे गांव राधानगर के शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है ओर हो भी क्यों ना जब मेरे गांव का नामकरण (राधानगर) ही एक राष्ट्रपति अवॉर्डी शिक्षक श्री राधारमण जी के नाम पर किया गया हो ।

राज्यपाल सचिवालय, बिहार लोक भवन, पटना से प्राप्त सूचना के आलोक में बापू सभागार, गाँधी मैदान, पटना में दिनांक 25.08.2026 को आयोजित होने वाली उन्मुखीकरण कार्यक्रम (Orientation Programme) अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है।