Irtafa की कुशलता हेतु कामना
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बीएनएमयू, मधेपुरा के पूर्व निदेशक (अकादमिक) एवं पूर्व विभागाध्यक्ष (मनोविज्ञान) प्रो. एम. आई. रहमान साहेब के कनिष्ट सुपुत्र Irtafa करीब दस दिन पूर्व अपने शहर मुजफ्फरपुर में मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे चिकित्सा हेतु पटना के मेडाज़ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां चार घंटे तक चली गहन सर्जरी और दस दिनों की देखभाल के बाद उसे एक तरफ से नई जिंदगी मिली है। कल रात वह सुरक्षित पटना से अपने घर (मुजफ्फरपुर) लौट गया है। आज रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मैं Irtafa की कुशलता एवं शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।
यहाँ यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि बीएनएमयू, मधेपुरा में नौ वर्षों की लंबी सेवा के दौरान मेरी सैकड़ों लोगों से जान-पहचान हुई है। इनमें से दर्जनों लोग किसी कारणवश कभी- न-कभी मेरे करीबी रहे हैं और आज भी हैं। लेकिन प्रो. रहमान जैसे चंद लोग ऐसे भी हैं, जिनसे अकारण ही दिल का रिश्ता हो गया है। ऐसे लोगों से मुझे वक्त-बेवक्त में संबल मिलता रहा है और मैं भी स्वाभाविक रूप से इनके सुख-दुख में अपने आपको सहभागी महसूस करता हूँ।
इस पोस्ट के साथ प्रो. रहमान साहेब द्वारा अंग्रेजी में लिखे गए पोस्ट का स्क्रीन सॉट शामिल है, जिसका गुग्गुल द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद है, “अल्लाह का बहुत-बहुत शुक्र है और मैं आप सभी नेक लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ कि अल्लाह, जो इज्जत का मालिक है, ने हम सबकी दुआएं कबूल कीं। अल्लाह ने मेरे छोटे बेटे को नई जिंदगी बख्शी है। मैं पटना के मेडाज़ हॉस्पिटल के सभी डॉक्टरों और वहां के पूरे स्टाफ का शुक्रगुजार हूँ, क्योंकि उनकी सच्ची मेहनत और हमदर्दी की वजह से ही मोटरसाइकिल दुर्घटना के बाद इरताफ़ा ठीक हो पाया है। चार घंटे की सर्जरी और दस दिन तक अस्पताल में रहने से जिंदगी की उम्मीद फिर से जगी, और अल्लाह, जो सबसे बड़ा मददगार है, ने हम सबकी दुआएं सुनीं। मैं आप सभी से आगे भी दुआओं की गुजारिश करता हूँ।
कल रात हम सुरक्षित घर लौट आए। अल्लाह की बेशुमार रहमतें और बहुत- बहुत धन्यवाद।”
पुनश्च, Irtafa पर विशेष कृपा हेतु ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।














