*स्वतंत्रता दिवस को मजाक बनाने का विरोध*
बीएनएमयू, मधेपुरा में 80 वां स्वतंत्रता दिवस का आयोजन काफी फिका रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार इस राष्ट्रीय पर्व को मजाक बनकर रख दिया है।इसको लेकर सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा है कि कुलपति द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ, राग-द्वेष तथा जाति-धर्म आदि संकीर्णताओं से ग्रसित होकर विश्वविद्यालय की स्थापित स्वस्थ परंपराओं के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है। उनकी हठधर्मिता के कारण इस बार स्वतंत्रता दिवस जैसा राष्ट्रीय पर्व भी फिका रहा और इसमें कई तरह की विसंगतियां सामने आईं।
डॉ. शेखर ने कहा कि यह अत्यंत ही दुखद है कि कुलपति ने बीएनएमयू, मधेपुरा जहां के वे स्थायी कुलपति हैं, को छोड़कर टीएमबीयू, भागलपुर में ध्वजारोहण को प्राथमिकता दी। इस बार कुलपति के आवासीय कार्यालय परिसर में, जहां प्रत्येक वर्ष ध्वजारोहण होता था, इस बार ध्वजारोहण नहीं किया गया। यह राष्ट्र-ध्वज का अपमान है।
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुलपति के कार्यालय परिसर में भी ध्वजारोहण कार्यक्रम में कई त्रुटियां रहीं। इसके साथ ही शैक्षणिक परिसर में ध्वजारोहण संकायाध्यक्ष, जो कि सर्वोच्च शैक्षणिक पद हैं कि बजाय कुलसचिव, जो कि एक गैर शैक्षणिक (लिपिकीय) पद है पर आसीन व्यक्ति द्वारा कराया गया। प्रत्येक वर्ष कुलपति कार्यालय परिसर में भी ध्वजारोहण होता था, लेकिन इस बार वहां ध्वजारोहण नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष ध्वजारोहण कार्यक्रम में मधेपुरा महाविद्यालय, मधेपुरा एवं ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के एनसीसी कैडेट्स शामिल होकर संयुक्त रूप से गार्ड ऑफ ऑनर देते थे। लेकिन इस बार सिर्फ ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के एनसीसी पदाधिकारी एवं एनसीसी कैडेट्स को आमंत्रित किया गया।विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कदम अत्यंत ही दुखद है। इससे मधेपुरा महाविद्यालय, मधेपुरा के एनसीसी पदाधिकारी एवं दर्जनों एनसीसी कैडेट्स के मन- मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय पर्व में की गई लापरवाही अक्षम्य है। इस पर राज्यपाल-सह-कुलाधिपति तथा प्रधानमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए।














