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BNMU ऑनलाइन प्रभात संगीत संध्या का आयोजन आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है संगीत : डाॅ. सुधांशु

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ऑनलाइन प्रभात संगीत संध्या का आयोजन

आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है संगीत : डाॅ. सुधांशु

संगीत मानवीय भावों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से हम सहज ही एक-दूसरे से जुड़ जाते है।

यह बात ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में दर्शनशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष और बीएनएमयू, मधेपुरा के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने कही।

वे ऑनलाइन प्रभात संगीत संध्या में सम्मानित अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन श्री श्री आनंदमूर्तिजी (श्री प्रभात रंजन सरकार) के शताब्दी जयंती वर्ष पर आनंद मार्ग प्रचारक संघ की सांस्कृतिक इकाई रेनासा आर्टिस्ट एवं राइटर एसोसिएशन (रावा) के तत्वावधान में किया गया था।

डाॅ. शेखर ने कहा कि संगीत की भाषा हमारे तन-मन एवं आत्मा को छूती है। यह एक आत्मा को दूसरी आत्मा से और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि संगीत की भाषा न केवल मनुष्य, बल्कि मनुष्येतर जीव, पेड़-पौधे और पत्थर आदि अजीव भी समझ लेते हैं। इस संदर्भ में प्रभात संगीत का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शास्त्रीय भरतनाट्यम नृत्यांगना सह गणेश नाट्यालय, दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष पद्म विभूषण डाॅ. सरोज वैद्यनाथन ने कहा कि कि प्रभात संगीत एक भक्ति संगीत है, जो हमारे दिल को छू जाता है।

विशिष्ट अतिथि उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने बताया कि आनंदमूर्तिजी ने 5 हजार 18 गीतों की रचना की है, जिन्हें प्रभात संगीत के नाम से जाना जाता है।

सम्मानित अतिथियों में विश्व भारती, शांति निकेतन में दर्शन एवं तुलनात्मक धर्म विभाग के प्रो. सिराजुल इस्लाम ने कहा कि समकालीन सांस्कृतिक दुनिया में फैली असंस्कृति के खिलाफ, प्रभात संगीत एक नए पुनर्जागरण की शुरुआत की  करता है। यह एक नई रोशनी और मानव जाति के लिए आशा के साथ एक पुर्नजागरण का संदेश देता है।

इस अवसर पर उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय, सिलीगुड़ी में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत पाधी, डाॅ. सिंधु पौडयाल आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्य सूत्रधार की भूमिका केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत ने निभाई।

सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात पार्श्व गायक अमर घोष (त्रिपुरा), मिस शोहाना शोम (मुंबई) और श्रीमती सुष्मिता नाग (कूचबिहार) ने दो-दो प्रभात संगीत गीत गाए। प्रसिद्ध कथक नृत्यगंना प्रतीक तेलंगा और जॉयस्मिता बिस्वास ने भरतनाट्यम डांस  प्रभात संगीत पर आधारित एकल नृत्य प्रस्तुत किया। भरतनाट्यम नृत्यंगना दीधिता सिंघा, पूजा दास एवं अतशी कर्मकार ने दो सामूहिक नृत्य किए।  कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज और मनमोहक नृत्य प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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