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गांधी शांति प्रतिष्ठान एवं बापू टावर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित व्याख्यान*

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*गांधी शांति प्रतिष्ठान एवं बापू टावर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित व्याख्यान*

गांधी शांति प्रतिष्ठान एवं बापू टावर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित *”आज से आगे के गांधी जी”* विषयक व्याख्यान के मुख्य वक्ता गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष *कुमार प्रशांत* ने कहा कि अच्छा आदमी वही है, जो दूसरे की पीड़ा को समझे।

उन्होंने कहा कि हर आदमी की मौत के साथ कहानी खत्म हो जाती है, लेकिन गांधी की मौत के बाद कहानी शुरू होती है। जब तक अच्छा रचने की कामना रहेगी, तब तक गांधी की मृत्यु हो ही नहीं सकती।

जेन-जी ने उम्मीद जगाई है। सत्ता के रुख से हम सभी हतप्रभ थे, लेकिन अचानक चुप्पी टूटी है। जो सवाल करते हैं, वे आगे का रास्ता क्या हो, यह भी खोज लेते हैं। सत्याग्रही दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते हैं।

लोकतंत्र में सवाल खड़े होने ही चाहिए। जिस सत्याग्रह में दूसरे की पीड़ा न हो, वह सत्याग्रह नहीं हो सकती। बदलते समय में अभिव्यक्तियाँ बदली हैं, नारे बदले हैं, लेकिन लक्ष्य नहीं बदलना चाहिए। साधन और साध्य में तालमेल होना चाहिए। जवाबदेही तय करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वोट चोरी का रास्ता चुन लिया है। लोकतंत्र हमारा है, यहाँ सिर्फ जनता का शासन चलेगा। आजाद भारत में जनमत से सरकार चलेगी। जेन-जी ने यह कर दिखाया है। रास्ते मिल सकते हैं, यह जेन-जी ने बताया है। गांधी साधन और साध्य के बीच तालमेल पर बल देते थे। युवाओं ने इसका ध्यान रखा है।

जेन-जी सच दिखा रहे हैं। अकाउंटेबिलिटी तो सुनिश्चित होनी ही चाहिए। जनमत की ताकत कैसे पैदा की जा सकती है, यह जेन-जी ने सिखा दिया। यदि मत देने का अधिकार ही खत्म हो जाएगा, तो फिर लोकतंत्र किस काम का रह जाएगा।

गांधी विकल्पों में छिपे हुए हैं। गांधी ने बहुत सारे विकल्पों को खोलकर रख दिया, लेकिन उनको विस्तार नहीं मिला। उन्होंने कांग्रेस को समाप्त करने और फिर नई पार्टियों के गठन की बात कही थी, लेकिन यह नहीं हुआ। गांधी की संसदीय लोकतंत्र को लेकर अच्छी राय नहीं थी।

न्यायालय अब अपना चेहरा बदलने का प्रयास कर रहा है। न्यायालय को संविधान के पन्ने पलटने पड़ रहे हैं। सरकार की ताकत कम करने और लोकशाही की ताकत बढ़ाने की जरूरत है। गांधी प्रयोग पर बल देते थे। जाति-धर्म से ऊपर उठती लहरों को पहचानने की जरूरत है, उन लहरों को पहचान कर आत्मसात करने की आवश्यकता है। जब तंत्र दावानल बन जाए, तो लोक को भी अपना स्वरूप बदलना चाहिए। लोक हमेशा रहेगा, तंत्र बदलता रहेगा।

इस व्याख्यान के मुख्य अतिथि *अमित तिवारी, कुलपति, सी. वी. रमण विश्वविद्यालय, वैशाली*, विशिष्ट अतिथि *अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) मनोज कुमार* तथा लेखक एवं गांधी विचारक *भैरव लाल दास* ने गांधी विचार की प्रासंगिकता पर अपने विचारघ रखे।

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