श्री राजगोपाल को पुस्तक भेंट
बीएनएमयू, मधेपुरा के सीनेटर तथा दर्शनशास्त्र विभाग, एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर ने सुप्रसिद्ध गाँधीवादी विचारक एवं जननेता श्री राजगोपाल पी. वी. को अपनी दो पुस्तकें ‘सामाजिक न्याय : अंबेडकर-विचार और आधुनिक संदर्भ’ (2014) तथा ‘गाँधी-विमर्श’ (2015) भेंट कीं। इस अवसर पर महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज कुमार, गाँधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार आदि उपस्थित थे।
यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मैंने कुछ वर्ष पहले भी श्री राजगोपाल जी को अपनी एक पुस्तक ‘गाँधी-विमर्श’ भेंट की थी। लेकिन उस समय दूसरी पुस्तक ‘सामाजिक न्याय : अंबेडकर-विचार और आधुनिक संदर्भ’ उपलब्ध नहीं रहने के कारण मैं उन्हें भेंट नहीं कर सका था।
संयोग से इस बार उनसे लगातार तीन दिन उनके साथ काफी देर तक रहने का सुअवसर मिला। लेकिन पहले एवं दूसरे दिन मेरे पास ‘सामाजिक न्याय : अंबेडकर-विचार और आधुनिक संदर्भ’ पुस्तक उपलब्ध नहीं थीं। लेकिन तीसरे दिन मेरे पास ‘सामाजिक न्याय : अंबेडकर-विचार और आधुनिक संदर्भ’ के साथ-साथ ‘गाँधी-विमर्श’ पुस्तक भी उपलब्ध थी। इसलिए मैंने उन्हें दोनों पुस्तकें भेंट की। उन्होंने ‘गाँधी-विमर्श’ को देखते ही कहा, “यह तो मैंने पढ़ी है।” उनके इस एक पंक्ति की टिप्पणी से मुझे आत्मिक प्रसन्नता हुई। बहुत-बहुत आभार।












