बच्चे मन के सच्चे…
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मैं प्रो. विजय सर और विभाकर बाबू के साथ समय से पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया। कार्यक्रम शुरू होने में विलंब था। भागलपुर से आने वाले अतिथियों का इंतजार किया जा रहा था। एक तरफ सभी बुजुर्ग आपस में बातचीत कर रहे थे। दूसरी तरफ बच्चे शोरगुल कर रहे थे। उन बच्चों को एक कार्यकर्ता डरा-धमकाकर शांत करने में लगे हुए थे।
इस बीच मैंने गुरुवर प्रो. मनोज कुमार सर को फोन करके पूछा कि वे लोग कितनी देर में पहुंच रहे हैं? उन्होंने कहा कि हमें पहुंचने में पंद्रह-बीस मिनट लगेगा। तुम तब तक बच्चों के साथ ‘खेलो’।
फिर मैं बच्चों के बीच पहुंचा। उनसे गाँधी के संबंध में बातचीत किया। हमने यह भी पूछा कि उनके पाठ्यक्रम में गांधी कहां-कहां हैं? बच्चे काफी गंभीरता से सोच-समझकर हमें जानकारी देने का प्रयास कर रहे थे। एक बच्चे ने बताया कि उन्होंने पाठ्यक्रम के किसी किताब में गाँधी को पढ़ा है, लेकिन उसे आगे कुछ याद नहीं था। अच्छा हो कि पाठ्यक्रम में ज्यादा-से-ज्यादा गाँधी और अन्य महापुरुषों के बारे में पढ़ाया जाए- “जॉनी-जॉनी यस पापा…” जैसी अनावश्यक चीजों को हटाया जाए।
खैर, मुझे बच्चों के साथ देखकर गुरुवार प्रो. विजय कुमार जी भी वहां आ धमके और उन्होंने आते ही गंभीर माहौल को खुशनुमा कर दिया। उन्होंने दो ऐसे प्रश्न पुछे, जिसका सभी बच्चों ने सही-सही उत्तर दिया (पूरे डिमांस्ट्रेशन के साथ)। पहला प्रश्न था- ‘हंसना आता है?” और दूसरा “‘रोना आता है?”
इसके बाद मैंने बच्चों से उनके नानी-नाना एवं दादी-दादा के बारे में जानकारी किया। जानकार अच्छा लगा कि प्रायः सभी बच्चों को नानी-नाना एवं दादी-दादा से लगाव है। मैंने सबों को कहा कि घर जाकर नानी-नाना एवं दादी-दादा जो भी घर में होंगे, उनको आज गाँधीजी की जयंती के बारे में जानकारी दीजिएगा और आगे कोशिश कीजिएगा कि प्रतिदिन इन लोगों से बातचीत की जाए।
अब तक प्रो. मनोज कुमार सर, श्री राजगोपाल पी. वी., श्री अशोक कुमार सिन्हा जी एवं डॉ. मनोज मीता जी आदि प्रतिमा स्थल पर पहुंच गए। हमने बच्चों से विदा ली। उन्होंने पूरे जोश-खरोश से हमारा अभिवादन किया।
सचमुच हमें बापू (गाँधी) को बच्चों में बीच लेकर जाने की जरूरत है। बच्चे मन के सच्चे….
(गाँधीगाँधी आश्रम, शोभनपुर, अमरपुर ( बाँका)। अवसर : गाँधी उत्सव, दिनांक-03.10.2026)














