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बिहार राज्य गीत के रचनाकार सत्यनारायण जी का निधन बिहार की अपूरणीय क्षति

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*बिहार राज्य गीत के रचनाकार सत्यनारायण जी का निधन बिहार की अपूरणीय क्षति*

बिहार राज्य गीत मेरे भारत के कंठहार,तुझको शत शत वंदन बिहार के रचियता कवि सत्यनारायण के 92 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को पटना में निधन पर आजाद पुस्तकालय कतराहा परिवार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।आजाद पुस्तकालय के अध्यक्ष प्रो विनय कुमार चौधरी,जिला स्थापना दिवस विशेष कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर सुधांशु शेखर,सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर,सह संयोजक अमित अंशु,परामर्शी प्रो प्रसन्ना कुमारी ने इसे अपूरणीय क्षति बताते हुए पुस्तकालय की ओर श्रद्धांजलि दी है।आजाद पुस्तकालय , कतराहा की ओर से जारी विज्ञप्ति में अध्यक्ष प्रो विनय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार राज्य स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दिनांक 31 मार्च 2012 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के मंत्री परिषद से स्वीकृत बिहार राज्य के लिए ‘राज्य गीत’ एवं ‘राज्य प्रार्थना’ का लोकार्पण किया था उस बिहार राज्य गीत को प्रसिद्ध कवि सत्य नारायण जी ने लिखा और मशहूर संगीतज्ञ शिव कुमार शर्मा एवं हरि प्रसाद चौरसिया ने इस गीत को संगीत दिया था। बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक उदित नारायण एवं गायिका साधना सरगम ने बिहार राज्य गीत को अपनी आवाज़ दी है।बिहार को खूबसूरत ,गौरव का भान कराने वाली राज्य गीत देकर वो अमर हो गए।


आजाद पुस्तकालय के कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर सुधांशु शेखर ने कहा कि ” मेरे भारत के कंठहार तुझको शत-शत बंदन बिहार …में कवि श्रद्धेय सत्यनारायण जी ने जिस प्रकार बिहार का बखान और भविष्य के लक्ष्य का सुंदर शब्द चित्रण किया है वो अद्भुत है।बिहार उनके सम्मान को सदैव बड़े सादर के साथ सम्मान देगा।वहीं सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर,सह संयोजक अमित अंशु, परामर्शी प्रो प्रसन्ना कुमारी ने कहा कि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य गीत की घोषणा के उपरांत सत्यनारायण जी द्वारा रचित मेरे भारत के कंठहार बिहार के पहचान के रूप में स्थापित हो चुका है। वहीं इधर के दिनों राज्य सरकार द्वारा सूबे में सरकारी कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर राज्य गीत मेरे भारत के कंठहार …की प्रस्तुति को अनिवार्य करना इस गीत के महत्व और ऊंचाई को दिखाता है।जब जब ये गीत बजेगा तब तब इसकी धुन और आवाज में कवि स्मृतिशेष सत्यनारायण जी की छवि आकार लेती नजर आएगी ।जारी प्रेस विज्ञप्ति में आजाद पुस्तकालय ने उनके निधन को एक हस्ती के साथ साथ साहित्य की भी क्षति बताया है।

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