आज दिनांक 30 जुलाई 2026 को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की सभी अंगीभूत इकाई, अतिथि शिक्षक संघ और यूनिवर्सिटी डिपार्मेंट के शिक्षकों ने मिलकर बिहार सरकार की विभाजनकारी नितियों के खिलाफ आवाज उठाई, हस्ताक्षर अभियान चलाया और मानव श्रृंखला बनाई. हस्ताक्षर अभियान एवं मानव श्रृंखला में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसका संयोजन सिंडिकेट सदस्य सह टी एन बी महाविद्यालय भागलपुर शिक्षक संघ के सचिव डॉ निर्लेश कुमार ने किया साथ ही मारवाड़ी महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ संगीत कुमार, सचिव डॉ सुपेन्दर यादव ने किया। प्रोफेसर मनोज कुमार, सिंडिकेट सदस्य प्रोफेसर मुश्फिक आलम, सिंडिकेट सदस्य डॉ मुकेश कुमार, यू डी टी ए के अध्यक्ष प्रोफेसर के के मंडल एवं सचिव डॉ अभिषेक आनंद, डॉ अमिताभ चक्रवर्ती, बी एन महाविद्यालय भागलपुर, जे पी महाविद्यालय नारायणपुर , सबौर महाविद्यालय, मुरारका महाविद्यालय सुल्तानगंज, टी एन बी लॅा कालेज के सभी शिक्षकों ने हिस्सा लिया। महिला शिक्षकों ने भी मानव श्रृंखला में बड़ी संख्या में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराकर सरकार की नीतियों का विरोध किया।
सभी शिक्षक बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय परिसर में एकत्रित हुए. उन्होंने प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 एवं पीएचडी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ जमकर नारेबाजी की .
उनका कहना था कि सरकार UG एवं PG के नाम पर हर स्तर पर भेदभाव कर रही है और बाटों तथा राज करो की नीति पर चल रही है जबकि आज तक जितने भी शिक्षक नियुक्त हुए हैं वह विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं,किसी कॉलेज के नहीं.उनकी पदस्थापन कॉलेज या यूनिवर्सिटी डिपार्मेंट कहीं भी हो सकती है. लेकिन सरकार कॉलेज को अलग करके सीधे अपने नियंत्रण में ले रही है और कॉलेज के शिक्षकों को पीएचडी करने का मौका भी नहीं दे रही है.
नतीजा यह होगा एक ही प्रक्रिया के तहत नियुक्त कुछ शिक्षक अपने करियर में आगे बढ़ते चले जाएंगे और कुछ अन्य शिक्षक कॉलेज में पोस्टिंग के नाम पर सरकार की अधीनता झेलेंगे और अकादमिक कार्यों जैसे शोध निरीक्षण से वंचित रह जाएंगे. इससे उनके प्रमोशन में भी बाधा आएगी.
शिक्षकों की राजनीतिक गतिविधियों, आलोचनात्मक चिंतन-लेखन, चुनाव लड़ने इत्यादि पर भी प्रस्तावित अधिनियम में बंदिश लगाने के बात कहीं जा रही है .
इन सब प्रावधानों के खिलाफ राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों की तरह भागलपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक भी आंदोलित हैं और वह इन दमनकारी और विभाजनकारी नितियों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.












