अग्रज डॉ. तबरेज को बहुत-बहुत बधाई…
———————
मेरे एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल में उर्दू विभाग के अध्यक्ष अग्रज डॉ. तबरेज आलम को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, छातापुर-सुपौल का प्रथम प्रधानाचार्य बनने पर बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
मेरी डॉ. तबरेज सर से पहली मुलाकात 14 मार्च, 2026 को हुई, जब मैं पहली बार महाविद्यालय गया था। यह अवसर था सीनेट चुनाव के लिए अपने प्रचार के शुभारंभ का। इस अवसर पर मैंने शिक्षकों से बातचीत की। बातचीत करते हुए मैंने यह स्वीकार किया कि मुझे लोगों का नाम जल्दी याद नहीं रहता है। इस पर डॉ. तबरेज सर ने मुझे सलाह दिया था कि आपको नाम याद रखना चाहिए। मैं इस दिशा में प्रयास कर रहा हूँ।
मैं पुनः एक सप्ताह बाद चुनाव प्रचार के दूसरे चरण में भी एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल गया। इस दिन मैंने डॉ. तबरेज सर और अन्य शिक्षकों को अपनी पुस्तक भेंट की थीं। यहां के अन्य शिक्षकों के साथ डॉ. तबरेज सर ने भी मुझे काफी शुभकामनाएं दिया था।
डॉ. तबरेज सर सहित सभी शिक्षकों की शुभकामनाओं से मैं सीनेट चुनाव में विजयी होने में सफल रहा। मुझे 30 मार्च, 2026 को विधिवत सीनेट सदस्यता का पत्र भी प्राप्त हो गया।
मेरा यह सौभाग्य है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने टी. पी. कॉलेज, मधेपुरा से स्थानांतरण के बाद मुझे एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल में योगदान का अवसर प्रदान किया। मुझे यह स्वीकार करते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि इस महाविद्यालय के शिक्षकों के बीच आपसी काफी सौहार्द है और यहाँ का शिक्षक संघ भी काफी सक्रिय है। इसी की एक बानगी है कि मेरे योगदान के दिन ही संघ के माध्यम से मेरा स्वागत समारोह आयोजित किया गया।
स्वागत समारोह के पहले मैंने सभी साथियों के बीच मधेपुरा के सुप्रसिद्ध शिवजी सावजी के यहाँ बना शुद्ध घी के लड्डू बांटा और समारोह के बाद संघ के अध्यक्ष डॉ. पंकज शर्मा जी की ओर से हम सबों को चाय पार्टी भी दी गई। इस पूरे कार्यक्रम का हम सबों ने लुत्फ उठाया।
यहां स्वागत समारोह के संबंध में दो खास बातों का जिक्र करना जरूरी है। एक, महाविद्यालय में मेरे सबसे करीबी मित्र, जो आज भी मेरे चंद करीबी मित्रों में शामिल हैं ने मेरे द्वारा उनके मुंह में जबरन लड्डू डालने के बावजूद उसका ‘स्वाद’ नहीं लिया। दूसरे डॉ. तबरेज सर के छुट्टी पर होने के कारण मैं उनका मुंह मीठा नहीं कर सका।
फिर संयोग से एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल में योगदान के बाद से मैं लगातार छुट्टी में हूंँ। ऐसे में अभी तक डॉ. तबरेज सर के साथ महज दो संक्षिप्त मुलाकातों का ही सफर है। लेकिन अभी हमलोगों को कई वर्षों तक इस विश्वविद्यालय की सेवा में रहना है और जाहिर है कि ईश्वर ने चाहा तो और भी मुलाकातें होंगी। “मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी। किसी मोड़ पर तो मुलाकात होगी।”
पुनः डॉ. तबरेज भाई को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं और इस सुदूरवर्ती महाविद्यालय के शिक्षक को भी एक अच्छा अवसर देने के लिए माननीय कुलपति प्रो. बी. एस. झा सर को बहुत-बहुत साधुवाद।
-सुधांशु शेखर, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (दर्शनशास्त्र),
एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर-सुपौल













