बीसीए की प्रायोगिक परीक्षा में बीसीए के शिक्षकों को ही बाह्य परीक्षक एवं आंतरिक परीक्षक नियुक्त करने की मांग
बीएनएमयू, मधेपुरा में बीसीए के विभिन्न सेमेस्टरों की प्रायोगिक परीक्षा निर्धारित केन्द्रों पर दो से चार मई तक निर्धारित है। लेकिन इसमें पॉलिटेक्निक कॉलेज एवं इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षकों को बाह्य परीक्षक एवं आंतरिक परीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने इसका विरोध करते हुए कुलसचिव को पत्र प्रेषित किया है। ।
डॉ. शेखर ने कहा है कि भौतिकी, रसायनशास्त्र, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, मनोविज्ञान आदि पारंपरिक विषयों की प्रायोगिक परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा में भी विश्वविद्यालय के शिक्षक ही परीक्षक होते हैं। पूर्व में बीसीए की प्रायोगिक परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा में बीसीए के शिक्षकों को ही आंतरिक परीक्षक एवं बाह्य परीक्षक बनाया जाता रहा है। लेकिन संप्रति बीसीए प्रथम सेमेस्टर दिसंबर 2025, बीसीए तृतीय सेमेस्टर दिसंबर 2025, बीसीए पंचम सेमेस्टर दिसंबर 2025 की प्रायोगिक परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा में पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग के शिक्षकों को परीक्षक बना दिया गया है।
उन्होंने कहा है कि बीसीए की प्रायोगिक एवं मौखिक परीक्षा में विश्वविद्यालय के बाहर के शिक्षकों की नियुक्ति भेदभावपूर्ण एवं दुर्भावना से ग्रसित है। विश्वविद्यालय ने ऐसे लोगों को परीक्षक बना दिया है, जो बीसीए के शिक्षक हैं ही नहीं। इससे परीक्षा संचालन में काफी परेशानी होगी और विद्यार्थियों को भी कठिनाइयां का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने मांग किया है कि बीसीए की प्रायोगिक परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा में बीसीए के शिक्षकों को ही बाह्य परीक्षक एवं आंतरिक परीक्षक नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही परीक्षा पर होने वाला खर्च महाविद्यालय द्वारा नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाए, क्योंकि विश्वविद्यालय द्वारा इस मद में विद्यार्थियों से शुल्क लिया जाता है।













