*आजाद पुस्तकालय द्वारा होली मिलन सह कवि सम्मेलन प्रस्तुति से माहौल फगुआमय*
*कविता,गीत,गजल,फगुआ,अबीर,गुलाल से दिया गया सामाजिक समरसता का संदेश*
रविवार को देर शाम तक सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर होली के इंद्रधनुषी रंगों में डूबा नजर आया। मौका था आजाद पुस्तकालय द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह सह कवि सम्मेलन का ।अध्यक्ष प्रो. डॉक्टर विनय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन चर्चित साहित्यकार एवं पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी राजन बालन,मुख्य अतिथि प्रो सचिंद्र महतो प्रो भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी,परमेश्वरी प्रसाद यादव,प्रो अमोल राय,प्रो अरुण कुमार, प्रो विश्वनाथ विवेका,शंभू शरण भारतीय,पूर्व वार्ड पार्षद ध्यानी यादव आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।अपने उद्घाटन संबोधन में आजाद पुस्तकालय के सामाजिक , साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना करते हुए राजन बालन ने कहा कि ऐसे आयोजन जहां लोगों को एक मंच पर लाने का साधन बनते हैं वहीं होली जैसे पर्व आपसी भाईचारे को प्रगाढ़ बनाने का काम करती है।इस अवसर पर भारतीय रेल के अनुभव पर आधारित प्रस्तुति देकर राजन बालन ने उपस्थित श्रोताओं का जहां खूब मनोरंजन किया वहीं हकीकत को बयां किया।

*हवा को हवा से बैर है,दवा को दवा से बैर है*
काव्य सम्मेलन की शुरुआत युवा कवियों के नाम रही आशीष सत्यार्थी ने हवा को हवा से बैर है,दर्द को दवा से बैर है ,नफरत ने कुछ इस तरह निगला है रिश्ते को की प्रस्तुति देकर दर्द को बयां किया।शिवानी सिंह ने सब कुछ बहता चला गया,बोला नहीं कुछ सहता चला गया से जीवन के हकीकत को उकेरा।

मिथुन गुप्ता ने *यह साथ नहीं है रंगों का ,सब अपने पराए मिलते थे,मन में क्लेश भरा हो जितना,इसी दिन सब सिलते थे* की प्रस्तुति देते हुए होली के जमीनी महत्व को जीवंत कर दिया।सोनम आजाद ने उसे बिंदी पसंद थी मेरे माथे पर,बिंदी सजाने के सारे सबब अपने साथ ले गया की प्रस्तुति दे शहादत का दर्द दिखाया। गायक सुरेश कुमार शशि ने गजल बदलते इस दौर में सबका ही बुरा हाल है,आदमी बेहाल है की प्रस्तुति से हालिया तस्वीर को दिखाया।

*पूर्व कुलसचिव प्रो शचींद्र की फगुआ बनी आयोजन का मुख्य आकर्षण*
कवि सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों से जुड़ी प्रस्तुतियों से माहौल पल पल अलग अलग रंगों में ढल रही थी इसी बीच मुख्य अतिथि प्रो शचींद्र महतो ने सर पर मुराठा बांध झूम झूमकर ऐसा फगुआ गाया कि पूरा माहौल ही बदल गया और आलम ऐसा उपस्थिति श्रोताओं में क्या बच्चे क्या बड़े बूढ़े सब ने खूब जी खोलकर मनोरंजन किया उसके बाद तो होली गाने की मानों खुमारी सी बढ़ गई।

इस अवसर पर भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी, प्रो अमोल राय,प्रो रामचंद्र मंडल, प्रो सिद्धेश्वर कश्यप,प्रो विश्वनाथ विवेका,शंभू शरण भारतीय,मणिभूषण वर्मा,सियाराम यादव मयंक,डॉक्टर आलोक कुमार,कामरेड रमन कुमार, प्रो तंद्राशरण,डॉक्टर इंदु कुमारी,सुभाष कुमार आदि ने अपनी इंद्रधनुषी प्रस्तुति से कवि सम्मेलन को यादगार बनाया।मौके पर समाजसेवी विनीता भारती,प्रो प्रसन्ना सिंह राठौर,डॉक्टर अजय अंकोला ,इंजिनियर मुरारी,विनीत कुमार,चंद्रहास कुमार,डॉक्टर संजय परमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंतिम सत्र में आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन राठौर ने सबों को अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाई और शुभकामनाएं दी,अन्य लोगों ने भी एक दूसरे को अबीर गुलाल लगा होली की शुभकामनाएं दी ।















