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विलक्षण मनीषी थे पण्डित गोपीनाथ कविराज : प्रो अम्बिका दत्त शर्मा

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विलक्षण मनीषी थे पण्डित गोपीनाथ कविराज : प्रो अम्बिका दत्त शर्मा

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में पंडित गोपीनाथ कविराज की सारस्वत साधना‌विषय पर अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अंबिका दत्त शर्मा ने व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि पं. गोपीनाथ कविराज भारतीय ज्ञान- परंपरा में ऐसे विलक्षण मनीषी थे, जिनके व्यक्तित्व में शास्त्र की व्यापक विद्वत्ता और गहन साधना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय दर्शन को केवल बौद्धिक चिंतन का विषय न मानकर जीवन के रूपांतरण और साधना का माध्यम माना।

उन्होंने कहा कि पं. गोपीनाथ कविराज को याद करना केवल एक महान विद्वान को याद करना नहीं है, बल्कि भारत को उसकी अपनी ज्ञान-दृष्टि से समझने की परंपरा को याद करना है। उनके जीवन में शास्त्र, साधना, दर्शन, अनुभूति और समष्टि-कल्याण एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। गौरतलब है कि पं. गोपीनाथ कविराज की विद्वत्ता का विस्तार भारतीय दर्शन की अनेक शाखाओं तक था।‌ यही कारण है कि उनके लेखन में योग, तंत्र, भारतीय साधना, दर्शन तथा साहित्य सहित विविध विषयों पर गंभीर चिंतन मिलता है।

कार्यक्रम में शामिल बीएनएमयू, मधेपुरा के सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर ने प्रो. शर्मा से प्रश्न पूछा कि संप्रति विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र के पाठ्यक्रमों को औपनिवेशिक दृष्टि से मुक्त कैसे करें? इसका प्रो. शर्मा ने काफी उत्तर दिया और दर्शनशास्त्र सहित पूरी भारतीय ज्ञान परंपरा के वि-औपनिवेशिकरण के प्रयासों को रेखांकित किया।

इस अवसर पर केंद्र के निदेशक प्रो. अमित पाण्डेय, डॉ. श्रवण कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

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