Search
Close this search box.

वर्ण, जाति और भारतीय समाज-संस्कृति विषय पर संवाद आयोजित

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

*वर्ण, जाति और भारतीय समाज-संस्कृति विषय पर संवाद आयोजित*

 

दर्शनशास्त्र विभाग, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में गुरुवार को वर्ण, जाति और भारतीय समाज- संस्कृति विषय पर संवाद का आयोजन किया गया।

 

इस अवसर पर मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया की पूर्व अध्यक्ष तथा केएसडीएसयू, दरभंगा के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) नीलिमा सिन्हा ने कहा कि भारतीय संस्कृति सामासिक संस्कृति है। समय-समय पर विभिन्न धर्मों एवं संस्कृतियों के लोग भारत में आए और इसकी मूल संस्कृति में घुलमिल गए।

 

उन्होंने कहा कि भारत एक धर्म प्रधान देश है। यदि भारत को समझना है, तो हमें यहां के धर्म एवं आध्यात्म को समझना होगा।

उन्होंने बताया कि वर्ण गुण एवं कर्म पर आधारित एक आदर्श व्यवस्था है। लेकिन जाति का निर्धारण जन्म से होता है। जाति के ढांचे को तोड़ने के लिए हमें अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना होगा और जाति-आधारित सुविधाएं देनी बंद करनी होंगी।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने बताया कि महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों के व्याख्यानों का आयोजन होता रहता है।

संचालन विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि यह संवाद भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत आयोजित किया गया। यह इस श्रंखला का अंतिम संवाद था।

 

इस अवसर पर डॉ. ईश्वर चंद्र, डॉ. कृष्ण, डॉ मधु सिंह, शिवांगी द्विवेदी, डॉ. चिंकू, डॉ. उमेश, डॉ. बम बम, शोभा, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. दीनानाथ शाह, अजय कुमार, सौरभ चौहान, संजय कुमार, सुखदेव यादव, डॉ. मेघा, अभिषेक कुमार, डॉ. दीनानाथ शाह, डॉ. नरेश कुमार, शर्मा सोनू कुमार, आलोक टंडन, सौरभ द्विवेदी, संतोष कुमार, चंदन कुमार, डॉ. चंद्रशेखर, अनंत पांडे, डॉ. उमेश, डॉ. मिथिलेश कुमार, सी डी ठाकुर, अजय, अनिल कुमार, अनुराग कुमार सिंह, आशीष, अशोक कुमार, चांदनी कुमारी, गोपाल गुप्ता, गुड्डु कुमार, डॉ. हिमांशु शेखर सिंह, कृतिका पाठक, प्रीति सिंह, महेश्वर, मनीष भारद्वाज, राज आनंद, वैष्णवी, सरवन कुमार, साक्षी कुमारी, पवन कुमार, राज राजेश कुमार आदि उपस्थित थे।

READ MORE

बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में प्रस्तावित संशोधन के विरुद्ध विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं शिक्षक हितों की रक्षा के लिए आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (FUTAB) के तत्वावधान में बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक 

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।

[the_ad id="32069"]

READ MORE

बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में प्रस्तावित संशोधन के विरुद्ध विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं शिक्षक हितों की रक्षा के लिए आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (FUTAB) के तत्वावधान में बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक 

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।