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BNMU। लालजी टंडन को श्रद्धांजलि

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मनुष्य चला जाता है, लेकिन उसकी कीर्ति यहां रह जाती है। जो कुछ कीर्ति करके जाते हैं, वे हमेशा जीवित रहते हैं। लालजी टंडन की कृतियां भी उन्हें हमेशा जीवित रखेंगी‌।

यह बात कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही। वे बुधवार को कुलपति कार्यालय परिसर में बिहार के पूर्व राज्यपाल सह कुलाधिपति एवं मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के सम्मान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे।


कुलपति ने कहा कि जाने-माने राजनेता श्री लालजी टंडन का 21 जुलाई 2020 को निधन हो गया। यह हमारे लिए अत्यंत ही दुखद है। इनको अगस्त, 2018 को बिहार के राज्यपाल बनाया गया था। यहाँ राज्यपाल के रूप में इन्होंने काफी सराहनीय काम किया। यहाँ से इन्हें जुलाई, 2019 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई थी और संप्रति वे इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे थे।

कुलपति ने बताया कि लालजी टंडन ने राज्यपाल सह कुलाधिपति के रूप में बिहार में उच्च शिक्षा के विकास के लिए काफी सराहनीय कार्य किया है। इस कड़ी में उनके मार्गदर्शन में मई 2019 में पटना में आयोजित शोध उन्मुखीकरण कार्यशाला मील का पत्थर साबित होगी। इस कार्यशाला में शोध को गति देने, उसकी गुणवत्ता में सुधार और शोध को भारतीय जीवन दृष्टि से जोड़ने पर बल दिया गया था।

कुलपति ने बताया कि लालजी टंडन दिसंबर 2018 में बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा आए थे। उन्होंने यहाँ दीक्षांत समारोह में प्रेरणादायी भाषण दिया था।

इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी सुरेशचंद्र दास, कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद, बीएओ डाॅ. एम. एस. पाठक, आरपीएम कॉलेज के डाॅ. सत्यजीत यादव, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव आदि उपस्थित थे।

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