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NSS सुधांशु शेखर बने एनएसएस के जिला नोडल पदाधिकारी

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*सुधांशु शेखर बने एनएसएस के जिला नोडल पदाधिकारी*

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का मधेपुरा जिला नोडल पदाधिकारी चुना गया है। इस रूप में वे स्थानीय प्रशासन, नेहरू युवा केंद्र तथा जिला स्थित महाविद्यालयों के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाईयों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और एनएसएस के विशेष कार्यक्रमों को सफल बनाने में अपना योगदान देंगे।

एनएसएस (बिहार एवं झारखंड) के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष परांजपे ने डाॅ. शेखर को पत्र भेजकर इस आशय की सूचना दी है। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत छात्रों के व्यक्तित्व के विकास के लिए समय-समय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए जिला स्तर पर सक्रिय कार्यक्रम पदाधिकारी का जिला नोडल पदाधिकारी के रूप में चयन किया जाता है।

डाॅ. शेखर ने बताया कि वे जनवरी 2018 से ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में एनएसएस की प्रथम इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी तथा रेड रिबन क्लब के नोडल पदाधिकारी हैं और जुलाई 2021 से सेहत केंद्र के नोडल पदाधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनके द्वारा महाविद्यालय में लगातार कई गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसमें कोविड-19 टीकाकरण, स्वैच्छिक रक्तदान, सेहत-संवाद एवं ऑनलाइन वेबिनार कार्यक्रम प्रमुख हैं। दिसंबर 2021 में राष्ट्रीय सेवा योजना का एक सात दिवसीय विशेष शिविर दिसंबर 2020 में आयोजित हुआ और दूसरा इसी माह होने जा रहा है।

डाॅ. शेखर ने बताया कि उनकी सक्रियता के आधार पर इसी माह इन्हें बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना द्वारा सेहत केंद्र का बेस्ट नोडल ऑफिसर के रूप में पुरस्कृत किया गया है। इनके निर्देशन में महाविद्यालय के स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं ने विश्वविद्यालय एवं राज्य स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन किया है। कुछ दिनों पूर्व ही महाविद्यालय की एक छात्रा प्रीति कुमारी को न्यू इंडिया कैंपैन के अंतर्गत विडियो प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर चतुर्थ स्थान प्राप्त हुआ है।

डाॅ. शेखर ने प्रशासनिक दायित्वओं के निर्वहन के अतिरिक्त लेखन, संपादन एवं शोध के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इनकी तीन पुस्तकें ‘सामाजिक न्याय : अंबेडकर विचार और आधुनिक संदर्भ’ (2014), ‘गाँधी- विमर्श’ (2015) एवं ‘भूमंडलीकरण और मानवाधिकार’ (2017) काफी लोकप्रिय हैं। इन्होंने कई पुस्तकों का संपादन किया है और यूजीसी केयर लिस्टेड जर्नल दार्शनिक त्रैमासिक के संपादक मंडल के सदस्य भी हैं। इन्हें अखिल भारतीय दर्शन परिषद् का श्रीमती कमलादेवी जैन स्मृति पुरस्कार एवं डॉ. विजयश्री स्मृति पुरस्कार सहित कई पुरस्कार प्राप्त हैं।

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