LNMU ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का 54वां स्थापना दिवस समारोह भव्य रूप से जुबिली हॉल में आयोजित

भारतीय उच्च शिक्षा : परिवर्तन का एक दशक’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में प्रो बिमलेन्दु शेखर झा तथा प्रो एनके अग्रवाल आदि ने रखें महत्वपूर्ण विचार
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का 54 वां स्थापना दिवस समारोह भव्य रूप में जुबिली हॉल में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति प्रो बिमलेन्दु शेखर झा, विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक प्रो नवीन कुमार अग्रवाल, वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो एचके सिंह, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार चौधरी, डीएसडब्ल्यू प्रो अशोक कुमार मेहता, कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हंसदा तथा कार्यक्रम संयोजक प्रो विजय कुमार यादव आदि ने संबोधित किया। सर्वप्रथम अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित महात्मा गांधी सहित अन्य महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात जुबिली हॉल में दीप प्रज्वलन से समारोह की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति हुई। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मिथिला पेंटिंग्स, पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो आदि से किया गया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी कुलपति के रूप में प्रो अशोक कुमार मेहता ने कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी का लिखित संदेश पढ़ते हुए कहा कि मिथिला की पावन एवं ज्ञान की भूमि दरभंगा स्थित हमारा विश्वविद्यालय नित्य नए कृतिमान स्थापित कर रहा है। विगत दो वर्षों का काल विश्वविद्यालय के लिए व्यापक परिवर्तन का रहा है। इस दौरान 426 से अधिक नए शिक्षकों की नियुक्ति हुई है तथा कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति भी हो रही है। सामाजिक विज्ञान हेतु अलग जी प्लस 3 शैक्षणिक भवन, खेल निदेशालय एवं डेढ़ सौ छात्रों के लिए हॉस्टल निर्माणाधीन है। इसी सत्र से फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई शुरू हो रही है। अन्य ख्याति प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं एवं प्रसिद्ध एनजीओ के साथ एमओयू हस्ताक्षरित हुए हैं। हमारे शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार छात्रों को तैयार कर रहे हैं। खेलकूद एवं संस्कृति, एनएसएस तथा एनसीसी आदि में हमारा विश्वविद्यालय पूरे भारतवर्ष में लोहा बनवाया है। हमारे विश्वविद्यालय का लक्ष्य अच्छी पढ़ाई के साथ ही शोध, नवाचार, उद्यमिता एवं मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। हम सब विश्वविद्यालय को उच्चतर स्थान तक पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित हैं।

प्रो विमलेन्दु शेखर झा ने 1947 से ही विश्वविद्यालय की स्थापना के इतिहास को विस्तार से बताते हुए यहां अपने छात्र जीवन एवं शिक्षकीय कार्य अनुभव को बताया। उन्होंने अपने को इस विश्वविद्यालय का अंग मानते हुए प्रसन्नता व्यक्त किया और उच्च शिक्षा में विगत 10 वर्षों में हुई प्रगति को पॉइंट वाइज रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य का विकास शिक्षा स्वास्थ्य एवं कृषि पर निर्भर है। सरकार का लक्ष्य 2035 कम से कम 50% युवाओं को उच्च शिक्षा में लाना है। विश्व के टॉप विश्वविद्यालयों में अब भारतीय विश्वविद्यालय भी आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को औद्योगिक क्षेत्र से भी अधिक से अधिक एमओयू करना होगा, वहीं हमारा अंतिम लक्ष्य समाज कल्याण होना चाहिए। कहा कि आज के दिन हमें विचार करना चाहिए कि हम कहां पहुंचे और हमें आगे क्या करना चाहिए?
प्रो नवीन कुमार अग्रवाल ने कहा कि गत एक दशक में भारतीय उच्च शिक्षा में काफी परिवर्तन आया है जो सिर्फ सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि शिक्षक-कर्मी, छात्र-छात्राओं एवं समाज का सामूहिक प्रयास से हुआ है। हाल में राज्य सरकार द्वारा खोले गए 211 कॉलेजों का उद्देश्य प्रत्येक छात्र को उच्च शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज शिक्षा सिर्फ परीक्षा एवं डिग्री के लिए नहीं, बल्कि नवाचार, शोध, चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास है। आज शिक्षा में लचीलापन आया है जो बहुविषयक भी है, इसके प्रति छात्रों को जागरूक होने की जरूरत है। छात्र केवल परिवार की आशा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की मूल पूंजी भी हैं।
परिश्रमी, ईमानदार एवं अनुशासित छात्र जीवन में अवश्य सफल होते हैं।
प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने 5 अगस्त, 1972 को स्थापित मिथिला विश्वविद्यालय के प्रारंभिक स्थिति का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि 1975 में ललित बाबू के देहावसान के बाद किसका नाम ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय रखा गया। प्रो एचके सिंह ने कहा कि आज विश्वविद्यालय अनेक क्षेत्रों में आगे स्थान पर मौजूद है। यह धरती विश्व का मार्गदर्शन रहा है और आज पुन: यह विश्वविद्यालय बिहार में सबसे आगे है। उन्होंने आग्रह किया कि स्थापना दिवस के लिए यह हाल अब छोटा पड़ रहा है। आगे से खुली जगह में हो, ताकि आम लोग एवं छात्र-छात्राएं भी आकर विचार-विमर्श करें और समस्याओं को रखें, ताकि उनका निदान भी हो सके। इस अवसर पर गत दो एवं तीन अगस्त को आयोजित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र मेडल एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रियंका राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो विजय कुमार यादव ने किया।













