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ICPR : योग विश्व को भारत की बहुमूल्य देन : डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा

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आईसीपीआर प्रायोजित व्याख्यान माला संपन्न
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योग विश्व को भारत की बहुमूल्य देन : रमेशचन्द्र सिन्हा
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योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक बहुमूल्य उपहार है। यह महज एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण विज्ञान है।

यह बात भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर) के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रोफेसर डाॅ. रमेशचन्द्र सिन्हा ने कही।

वे दर्शनशास्त्र विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यानमाला की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम के आयोजन हेतु आईसीपीआर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस योजना के अंतर्गत अनुदान प्राप्त हुआ था।

उन्होंने कहा कि सदियों से दर्शन एवं योग के कारण भारत विश्वगुरू रहा है। संप्रति योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भारत सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बधाई एवं प्रशंसा के पात्र हैं। प्रधानमंत्री के ही प्रस्ताव पर 2015 से वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरूआत हुई है।

*आईसीपीआर भी भारत सरकार के साथ*

उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जरूरत बताई थी। भा,त के इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया गया।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार और आईसीपीआ दर्शनशास्त्र और योग को लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर सक्रिय है। इसी कड़ी में योग की महत्ता को वैश्विक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन हेतु आईसीपीआर अनुदान भी देती है, जिसके माध्यम से वर्ष भर योग की चर्चा होती रहती है।

हेमवतीनंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर-गढ़वाल की प्रोफेसर डाॅ. इंदु पाण्डेय खंडूरी ने कहा कि योग मन एवं शरीर की एकता और मनुष्य एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। योग से हमारा शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक कल्याण होता है।

उन्होंने कहा कि कर्मों में कुशलता योग है। आपका मानसिक संतुलन हर परिस्थिति में बना हुआ है, वह भी योग है। आपकी चित्तवृति संतुलित रहेगी, तभी कर्मों में कुशलता आएगी। चित्तवृतियों पर नियंत्रण से ही समान भाव की स्थापना होगी।

उन्होंने बताया कि योग के आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

उन्होंने बताया कि योग में नियमों का पालन बहुत महत्वपूर्ण है। युवा वर्ग के लिए हर क्षेत्र में नियमों का पालन करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। योग दर्शन नियमों का अनुपालन करना है। सही दिशा में आपको जो नियंत्रित करता है, वह योग है। कोई भी कार्य व्यक्ति को सकारात्मक मार्ग की ओर ले जाता है वह योग है।

नव नालंदा महाविहार, नालंदा के प्रोफेसर डाॅ. सुशीम दुबे ने कहा कि योग के द्वारा भारत ने विश्व को स्वास्थ्य एवं सर्व कल्याण का संदेश दिया है। योग में मानव मात्र के कल्याण का मार्ग संरक्षित एवं सन्निहित है।

उन्होंने कहा कि योग भारत सरकार के आयुष (AYUSH) मंत्रालय में आयुष अर्थात् आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, योग एवं नेचुरोपैथी एक साथ है। विभिन्न राज्यों में भी आयुष या स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत योग सन्निहित है।

उन्होंने कहा कि योग तनाव तथा तनाव जनित मनोदैहिक स्थितियों एवं इनके अग्रगामी परिणामों के उपचार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

उन्होंने कहा कि योग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और हमें समग्र स्वास्थ्य और दुखनिरोध की ओर ले जाता है।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. अमोल राय ने कहा कि हम योग से अपनी मानसिक शक्ति का विकास कर सकते हैं और इससे हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। अतः हम सबों को योग को अपने जीवन में अपनाने की जरूरत है।

*नैक मूल्यांकन में मदद*
अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रधानाचार्य डॉ
के. पी. यादव ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हेतु आईसीपीआर से अनुदान मिलना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। इस आयोजन से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ेगा और इससे नैक मूल्यांकन में भी मदद मिलेगी।

*पहले भी मिला था अनुदान*
दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष शोभाकांत कुमार ने कहा कि आईसीपीआर, नई दिल्ली से पहले भी अन्य आयोजनों के लिए अनुदान मिल चुका है। बीएनएमयू, मधेपुरा जैसे साधनविहीन विश्वविद्यालय को विभिन्न आयोजनों के लिए अनुदान स्वीकृत करने हेतु आईसीपीआर साधुवाद का पात्र हैं।

विषय प्रवेश एनसीसी पदाधिकारी लेफ्टिनेंट गुड्डु कुमार ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य डाॅ. के. पी. यादव ने किया।

संचालन जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने की। धन्यवाद ज्ञापन सिंडिकेट सदस्य डॉ. जवाहर पासवान ने किया।

योगगुरू राकेश कुमार भारती ने सबों को सामान्य योगाभ्यास कराया और सबों ने मिलकर देशभक्ति नारे लगाए। वंदेमातरम का सामूहिक गायन भी हुआ। अंत में चराचर जगत के कल्याणार्थ मंत्रोच्चार किया गया- “ॐ सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत्। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।”

कार्यक्रम के आयोजन ने शोधार्थी द्वय सारंग तनय एवं सौरभ कुमार चौहान ने सहयोग किया।

इस अवसर पर हिमांशु राज, सतीश कुमार, आलोक, अमरजीत, अमित यादव, अंशु कुमार, अन्नू प्रिया, दीपमाला कुमारी वीना, जुही राज, ज्योति गुप्ता, निखिल कुमार, सौरभ कुमार, सुजीत, सिंधु कुमारी, अन्नू राज, अरिजीत गुप्ता, आशीष कुमार, भानु कुमार, डेविड यादव, डॉ. विजया कुमारी, डॉ. शालिग्राम, अन्नूश्री, इंदु खंडरू, जय सिंह, जितेंद्र कुमार, ललन, लक्ष्मण, मनीष, नंदन, नीतीश, राहुल राज, राजा, राजेश, राकेश कुमारी भारती, रूपम कुमारी, सपना जायसवाल, गौरव यादव, शेखर प्रसाद चौधरी, सोनू, सुशीम दुबे, उषा अग्रवाल, आर्यन गुप्ता, भानु गुप्ता, भवेश, बुलबुल कुमारी, सूर्या सिंह, सशि भूषण, सुशील आदि की ऑफलाइन- ऑनलाइन उपस्थित रही।

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