ससमय सेवा-संपुष्टि करने की मांग
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बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों की परीक्षयमान अवधि दो वर्ष की है। इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा सेवा-संपुष्टि की अधिसूचना जारी करने का प्रावधान है। लेकिन बीएनएमयू, मधेपुरा में सही समय पर सेवा-संपुष्टि नहीं हो पा रहा है। इस पर सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने निराश व्यक्त की है। उन्होंने शनिवार को कुलसचिव को पत्र लिखकर सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा-संपुष्टि ससमय करने की मांग की है।
डॉ. शेखर ने कुलसचिव से अनुरोध किया है कि वैसे सभी असिस्टेंट प्रोफेसर जिनकी दो वर्षों की सेवा (परीक्षयमान अवधि) पूरी हो चुकी है, उन सबों की सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया अविलंब पूरी करते हुए अधिसूचना जारी की जाए। इसके अतिरिक्त जिन शिक्षकों की परीक्षयमान अवधि अभी पूरी नहीं हुई है, वैसे शिक्षकों की सेवा संपुष्टि के संबंध में भी ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि परीक्षयमान अवधि पूरी होने के साथ ही उनकी सेवा-संपुष्टि हो सके।
डॉ. शेखर ने बताया कि बीएनएमयू, मधेपुरा में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी), पटना की अनुशंसा पर विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों एवं महाविद्यालयों में दर्जनों असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति हुई है। लेकिन उनमें से हिंदी विषय को छोड़कर अन्य किसी भी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा संपुष्टि नहीं हो सकी है। इससे दर्जनों शिक्षक विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक एवं आर्थिक लाभों से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में बीएसयूएससी के माध्यम से नियुक्त मनोविज्ञान एवं अर्थशास्त्र विषय के असिस्टेंट प्रोफेसरों की दो वर्षों की सेवा (परीक्षयमान अवधि) पूरी हो चुकी है, जबकि अगस्त 2026 में मैथिली एवं गणित विषय के असिस्टेंट प्रोफेसरों की दो वर्षों की सेवा-अवधि भी पूरी हो जाएगी। इन सभी शिक्षकों की सेवा-संपुष्टि की प्रक्रिया अविलंब शुरू करने की जरूरत है। इसके साथ ही ऐसी ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि नियमित रूप से ससमय सेवा-संपुष्टि होती रहे।














