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BNMU पर्व-त्योहार मनाते समय सभी धर्मों के मूल उद्देश्यों को याद रखें : डाॅ. एम. आई. रहमान

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धर्म एक जीवन-पद्धति है। सभी धर्म मूल रूप से मानव जीवन के आदर्शों एवं मूल्यों का निर्धारण करते हैं। अतः हमें हमेशा पर्व-त्योहार मनाते समय सभी धर्मों के मूल उद्देश्यों को याद रखना चाहिए।

यह बात स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय के अकादमिक निदेशक डॉ. एम. आई. रहमान ने कही। वे सोमवार को त्योहार, मनोविज्ञान एवं समाज विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन सेहत केंद्र, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में किया गया।

डाॅ. रहमान ने बताया कि सभी धर्मों प्रेम एवं सदाचार की शिक्षा देते हैं। सभी धर्मों की मूल भावना सामाजिक उत्थान और संपूर्ण मानवता की कल्याण है। लेकिन लोग धर्मों की मूल भावना को छोड़कर अपने कुत्सित स्वार्थवश धर्म के नाम पर वैमनस्य फैलाते हैं। हमें ऐसी अधार्मिक प्रवृतियों को रोकना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धर्म हमें भेदभाव को भूलकर एक साथ रहने की शिक्षा देते हैं। हमारे त्योहारों में छोटे-बड़े का भेदभाव खत्म हो जाता है।

उन्होंने बताया कि भारतवर्ष त्योहारों का देश है। यहाँ हम सभी मिलकर विभिन्न धर्मों के त्योहार मनाते हैं। होली, दीपावली, दशहरा, ईद, क्रिसमस आदि हमारे मुख्य त्योहार हैं। सभी त्योहार सत्य, प्रेम एवं न्याय पर चलने की सीख देते हैं।

उन्होंने कहा कि त्योहार हमारे मन की निरसता को कम करते हैं और हमारे जीवन में खुशियाँ लाते हैं। हम एक-दूसरे  के बीच खुशियाँ बांटते हैं।

उन्होंने कहा कि त्योहार हमारे आंतरिक एवं बाह्य दोनों शुद्धि का एक अवसर है। त्योहारों की साधना के द्वारा हमारे शरीर एवं मन दोनों का शुद्धिकरण होता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने किया। संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थी सारंग तनय ने किया।

इस अवसर पर डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. शंकर कुमार मिश्र, डॉ. कुमारी रंजीता, अब्दुर रहमान, लक्ष्मण कुमार, हिमांशु राज, जूही राज, जया ज्योति, राजकिशोर कुमार, निशु कुमारी, सूरज प्रताप, सोनू कुमार, डॉ. राजीव रंजन, राहुल विशाल, धीरज कुमार, प्रिंस कुमार, आशीष कुमार, उपस्थित थे।

डाॅ. शेखर ने बताया कि मंगलवार को एड्स : मनोवैज्ञानिक एवं समाजिक आयाम और बुधवार को युवाओं की मानसिक समस्याएँ और समाधान विषयक व्याख्यान होगा।

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