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BNMUयाद किए गए प्रेमचंद। प्रेमचंद विश्व के श्रेष्ठतम उपन्यासकारों में एक : डाॅ. उषा

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*याद किए गए प्रेमचंद*

*प्रेमचंद विश्व के श्रेष्ठतम उपन्यासकारों में एक : डाॅ. उषा*

प्रेमचंद न केवल हिंदी साहित्य, वरन् विश्व साहित्य के श्रेष्ठतम उपन्यासकारों में एक हैं। उनकी रचनाएँ कालजयी हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं।

यह बात विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. उषा सिन्हा ने कही। वे प्रेमचंद की 141वीं जयंती पर विभाग में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपना पूरा जीवन लेखन में झोंक दिया और जीवन के अंतिम समय में भी लिखना नहीं छोड़ा। वे कहते थे कि वे कलम के मजदूर हैं और बिना काम किए उन्हें भोजन का अधिकार नहीं है। इससे हम सहज ही मानव जीवन में कर्म के महत्व का अंदाजा लगा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने तीन सौ से अधिक कहानियाँ और एक दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे। उनके लेखन का उत्कर्ष उनके सुप्रसिद्ध उपन्यास गोदान में देखने को मिलता है। वर्षों बाद आज भी गोदान के पात्रों को हम अपने आस-पास देख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी कथा-साहित्य को यथार्थ की भावभूमि पर अवस्थित किया। उनके कथा-साहित्य का तत्कालीन यथार्थ आज भी हमारे समाज का यथार्थ है। उन्होंने तत्कालीन भारतीय समाज एवं ग्रामीण संस्कृति का जो सूक्ष्म विश्लेषण किया है, वह वर्तमान समय में भी सटीक बैठता है।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के जरिए भारतीय जनमानस की कथा- व्यथा को विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त किया। उन्होंने किसानों, मजदूरों, दलितों एवं स्त्रियों की पीड़ाओं को स्वर दिया और वे शोषित-पीड़ित जनता की आवाज बनकर सामने आए। इस तरह उन्होंने सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र-निर्माण की भी नींव रखी।

इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि प्रेमचंद लोकजीवन के कथाकार हैं। उनके पात्र साधारणत्व में भी वैशिष्ट्य लिए हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. पूजा गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने पाठकों के बीच सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना का प्रसार किया।

इस अवसर पर डाॅ. विवेक कुमार, विभिषण कुमार, संजीव कुमार पासवान, चंदन कुमार, जुगनू कुमार, मनीषा कुमारी, नंदन कुमार, सुनील, राजकिशोर आदि उपस्थित थे।

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