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BNMU। नेहरू युवा केन्द्र में संविधान दिवस का आयोजन

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संविधान हमें जीने की आजादी देती है : हुश्न जहाँ             नेहरू युवा केन्द्र संगठन, मधेपुरा द्वारा गौतम इंफोटेक में संविधान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया एवं संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के तैलीय चित्र पर पुष्प अर्पित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित युवाओं को सम्बोधित करते हुए नेयुके की जिला युवा समन्वयक हुश्न जहाँ एवं अधिवक्ता सह भाजयुमो के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राहुल यादव ने कहा कि आजादी मिलते ही देश को चलाने के लिए संविधान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया। इसी कड़ी में 29 अगस्त 1947 को भारतीय संविधान के निर्माण के लिए प्रारूप समिति की स्थापना की गई और इसके अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर को जिम्मेदारी सौंपी गई। दुनिया भर के तमाम संविधानों को बारीकी से देखने-परखने के बाद डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार कर लिया। 26 नवंबर 1949 को इसे भारतीय संविधान सभा के समक्ष लाया गया। इसी दिन संविधान सभा ने इसे अपना लिया। यही वजह है कि देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
सिंडिकेट सदस्य डॉ जवाहर पासवान एवं पीआरओ डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसी आधार पर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र कहा जाता है। भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां शामिल हैं। यह 2 साल 11 महीने 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था। जनवरी 1948 में संविधान का पहला प्रारूप चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। 4 नवंबर 1948 से शुरू हुई यह चर्चा तकरीबन 32 दिनों तक चली थी। इस अवधि के दौरान 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए जिनमें से 2,473 पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर जिला अधिवक्ता संघ के सचिव संजीव कुमार एवं गौतम इंफोटेक के निदेशक अमित कुमार ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को लागू होने के बाद संविधान सभा के 284 सदस्यों मे 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद 26 जनवरी को इसे लागू कर दिया गया। बताते हैं कि जिस दिन संविधान पर हस्ताक्षर हो रहे थे उस दिन खूब जोर की बारिश हो रही थी। इसे शुभ संकेत के तौर पर माना गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन पूर्व एनवाईसी सुधांशु कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन लेखपाल कैलाश महंती ने किया।
इस अवसर पर तुरबसू, अशोक कुमार, एनवाईसी प्रियंका कुमारी, अभिमन्यु कुमार, अभिनंदन कुमार, विजय कुमार, मुकेश कुमार, राहुल कुमार, विजय कुमार, प्रमोद कुमार, मुकेश कुमार, साधना कुमारी, काजल कुमारी आदि उपस्थित थे।

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दिनांक 15 अगस्त को शिक्षा विभाग से संबंधित उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषित पहल के संदर्भ में समिति के व्यापक कार्यादेश एवं कार्यक्षेत्र में राज्य की संपूर्ण स्कूली एवं उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नीतिगत, संरचनात्मक एवं सेवा-संबंधी विषयों को समाहित किए जाने के संबंध में।

वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति के उपरांत परीक्षाफल आधारित वेतनानुदान से आच्छादित माध्यमिक, इंटरमीडिएट एवं डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के बकाया वेतनानुदान के एकमुश्त भुगतान तथा सम्मानजनक नियमित वेतन-संरचना निर्धारित किए जाने के संबंध में अनुरोध ।

बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-निर्माण, शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं एकरूपता तथा शैक्षणिक शोध एवं नवाचार को सुदृढ़ करने हेतु पृथक् “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” की स्थापना के संबंध में अनुरोध।

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