प्रो. केदारनाथ तिवारी सर को सादर नमन
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तिलकामांझी विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त अध्यक्ष सुप्रसिद्ध दार्शनिक गुरुवर प्रो. (डॉ.) केदारनाथ तिवारी (के. एन. तिवारी) सर का निधन हो गया। यह न केवल दर्शन परिवार, वरन् संपूर्ण शिक्षा-जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।
प्रो. तिवारी बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से एम. ए. स्वर्ण पदक (1959) और मगध विश्वविद्यालय बोधगया से पीएचडी 1967 में किया। अपने शिक्षक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत 1959 ई में देवघर से की और 31 जनवरी, 1996 को भागलपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं मानविकी संकायाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए।
प्रो. तिवारी शिक्षण कैरियर मेंं आपने देश कई प्रमुख विश्वविद्यालयों व्याख्यान दिए हैं। आपके दार्शनिक पत्रिकाओं में कई शोध पत्र और 11 पुस्तकें प्रकाशित किए हैं। इनमें तत्वमीमांसा एवं ज्ञान मीमांसा, तर्कशास्त्र एवं वैज्ञानिक पद्धति, भारतीय तर्कशास्त्र परिचय, आगमन तर्कशास्त्र, प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र, कम्पेरेटिव रीलिजन, क्लासिकल इंडियन इथिकल थाउट, द इंपेक्ट आफ रिजिजश आन गांधीज थाउट आदि प्रमुख हैं। अपने शिक्षण करियर में आपने देश कई प्रमुख विश्वविद्यालयों व्याख्यान दिये हैं।
प्रो. तिवारी ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित 42वें अधिवेशन के प्रधान सभापति रहे हैं। आपको दर्शंन परिषद्, बिहार का सबसे प्रतिष्ठित सोहनराज लक्ष्मीदेवी तातेड़ जोधपुर (राजस्थान) लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
– डॉ. सुधांशु शेखर,
सहसचिव, अखिल भारतीय दर्शन परिषद्
संयुक्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी, दर्शन परिषद्, बिहार












