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प्रो. केदारनाथ तिवारी का निधन 

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प्रो. केदारनाथ तिवारी का निधन 

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दर्शनशास्त्र विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के सेवानिवृत्त अध्यक्ष सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रो. (डॉ.) केदारनाथ तिवारी (के. एन. तिवारी) का 13 अक्टूबर, 2026 (मंगलवार) को निधन हो गया। वे लगभग 90 वर्ष के थे। इनके तीन पुत्र एवं कई पोते-पोतियां बड़े-बडे़ पदों पर कार्य कर रहे हैं। एक सुपुत्र प्रो. राजेश रंजन तिवारी भी दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं।

दर्शनशास्त्र विभाग के वर्तमान अध्यक्ष एवं दार्शनिक त्रैमासिक के संपादक प्रो. पूर्णेन्दु शेखर ने बताया कि प्रो. तिवारी ने बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से एम. ए. स्वर्ण पदक (1959) एवं मगध विश्वविद्यालय बोधगया से पीएचडी (1967) की डिग्री प्राप्त की थी। आपने शिक्षक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत 1959 ई में देवघर से की और 31 जनवरी, 1996 को भागलपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं मानविकी संकायाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए। 

पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. नीलिमा कुमारी ने बताया कि प्रो. तिवारी की दर्शनशास्त्र के विद्वान के रूप में पूरे देश मेंं ख्याति थी। आपने देश कई प्रमुख विश्वविद्यालयों व्याख्यान दिए हैं। आपके दार्शनिक पत्रिकाओं में कई शोध पत्र और 11 पुस्तकें प्रकाशित किए हैं। इनमें तत्वमीमांसा एवं ज्ञान मीमांसा, तर्कशास्त्र एवं वैज्ञानिक पद्धति, भारतीय तर्कशास्त्र परिचय, आगमन तर्कशास्त्र, प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र, कम्पेरेटिव रीलिजन, क्लासिकल इंडियन इथिकल थाउट, द इंपेक्ट आफ रिजिजश आन गांधीज थाउट आदि प्रमुख हैं।

बीएनएमयू, मधेपुरा के सीनेटर तथा अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सहसचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि प्रो. तिवारी को कई पुरस्कार एवं सम्मान मिला है। इसमें दर्शंन परिषद्, बिहार का सबसे प्रतिष्ठित सोहनराज लक्ष्मीदेवी तातेड़ जोधपुर (राजस्थान) लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित अन्य पुरस्कार शामिल हैं। आप बीएनएमयू, मधेपुरा में आयोजित परिषद् के 42वें अधिवेशन के प्रधान सभापति भी रहे।

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