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दो नए विश्वविद्यालयों की आड़ में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम थोपने की कोशिश का पुरजोर विरोध

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दो नए विश्वविद्यालयों की आड़ में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम थोपने की कोशिश का पुरजोर विरोध

पटना, 26 सितंबर 2026।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी ने राज्य सरकार द्वारा दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की आड़ में पूर्व में विवादित रहे प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम को चोरदरवाजे से लागू करने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा
बिहार के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी इस बात को स्पष्ट रूप से समझते हैं कि नए विश्वविद्यालयों की स्थापना एक अलग विषय है और पूरे उच्च शिक्षा तंत्र पर नया अधिनियम थोपना पूरी तरह अलग विषय। दोनों को आपस में जोड़कर देखने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।

सरकार यदि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय, बेगूसराय तथा माता सीता महिला विश्वविद्यालय, पटना की स्थापना करना चाहती है तो उसका स्वागत है। लेकिन इन नए विश्वविद्यालयों के नाम पर राज्य के पारंपरिक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों पर ऐसे प्रावधान थोपने की कोशिश की गई, जिनका शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संगठनों ने पहले ही विरोध किया है, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

“नए विश्वविद्यालय बनाइए, लेकिन पुराने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता मत छीनिए”

विश्वविद्यालय केवल भवन और कार्यालय का नाम नहीं है। विश्वविद्यालय की पहचान उसकी शैक्षणिक स्वायत्तता, लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था और अकादमिक स्वतंत्रता से होती है। यदि किसी नए कानून के माध्यम से इन मूलभूत व्यवस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया तो शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी एकजुट होकर इसका Electricity तरीके से प्रतिरोध करेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में प्रस्तावित अधिनियम को स्थगित किए जाने के निर्णय का शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी समुदाय ने स्वागत किया था। अब उसी व्यवस्था को किसी दूसरे रास्ते से वापस लाने का प्रयास किया गया तो यह पूरे उच्च शिक्षा समुदाय के साथ विश्वास का प्रश्न खड़ा करेगा।

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