मैं कोलकाता के नेशनल लाइब्रेरी में पहली बार 1987 ईसवी में आया था।तब यहाँ के छात्रावास में एक माह रहा भी था।अब बहुत कुछ बदल गया है। मुख्य भवन से पुस्तकालय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन में शिफ़्ट हो गया है। निःशुल्क सदस्यता और स्वाध्याय की सुलभता असाधारण है। पिछले जुलाई से मुख्य भवन भारत की विरासत को खास कर, प्राचीन पाण्डुलिपियों, सिक्कों,भाषा ,साहित्य,पत्रिका,शिक्षण संस्थानों, प्रिंटिंग प्रेस आदि विषयों को सचित्र दिखाया गया है।यह अद्भुत और प्रशंसनीय पहल है।वर्तमान केंद्र और सभी राज्य सरकारें समवेत रूप से इसी तरह भारत के गौरवपूर्ण इतिहास से वर्तमान पीढ़ी को जोड़े तो भला हो।मां काली का दर्शन हुआ। बहुत सुंदर व्यवस्था।
प्रो. सुभाष राय के फेसबुक वॉल से साभार।

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