डॉ. हर्षवर्धन के एक फेसबुक पोस्ट के बहाने….
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युवा इतिहासकार एवं आजाद पुस्तकालय, मधेपुरा के सचिव डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौड़ जी लगातार स्थानीय इतिहास के संरक्षण एवं संवर्धन और बीएनएमयू, मधेपुरा के समग्र विकास हेतु अपने सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ-न-कुछ करते रहते हैंं। वे लगातार भूपेन्द्र बाबू के बहाने हम सबों को बीएनएमयू की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराते हैं। इस कड़ी में ‘देख रहे हैं न भूपेन्द्र बाबू’ टैग लाइन के साथ इनके कई पोस्ट अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं।
आज डॉ. हर्षवर्धन जी के देख रहे हैं न भूपेन्द्र बाबू’ टैग वाली एक पोस्ट को पढ़कर अनायास ही मेरे मन में कुछ बातें आईं। इन बातों को मैंने टिप्पणी के रूप में उनके ‘कोमेंट बॉक्स’ में दर्ज किया है। इसे मेरे सभी फेसबुक मित्र पढ़ सकें, इसलिए उनसे अनुमति लेकर अपने वॉल पर उनके पोस्ट के स्क्रीन सॉट के साथ दे रहा हूँ।
टिप्पणी है, “भाई डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौड़ जी! महामना भूपेन्द्र बाबू देख रहे हैं या नहीं, इस संबंध में कुछ कहना कठिन है।लेकिन इतना तो जरूर कहा जा सकता है कि हम लोगों ने आदरणीय गांधारी जी की तरह अपने अंधे ‘पति’ राजा धृतराष्ट्र की ‘धर्मपत्नी’ का व्रत निभाने के लिए अपनी आँखों पर पट्टी बांध लिया है!”
बहुत-बहुत धन्यवाद।














