BNMU अतिथि प्राध्यापकों को 11 माह से नहीं मिला है एक भी रुपया
भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर, मधेपुरा के विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर विभागों तथा विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को विगत ग्यारह महीने से मानदेय के रूप में एक भी रुपया नहीं मिला है। ऐसे में लगभग दो सौ शिक्षक गंभीर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मानदेय भुगतान की मांग को लेकर 12 अगस्त, 2026 (बुधवार) को अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय परिसर में बैठक की। इसके बाद कुलपति को ज्ञापन सौंपकर जल्द-से-जल्द लंबित मानदेय का भुगतान कराने की मांग की गई।
अतिथि प्राध्यापकों ने बताया कि विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर विभागों और विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में सितंबर 2025 से करीब 200 अतिथि सहायक प्राध्यापक कार्यरत हैं। ये शिक्षक नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं और संबंधित संस्थानों द्वारा सौंपे गए अन्य शैक्षणिक कार्यों का भी निष्पादन कर रहे हैं। बावजूद इसके अब तक उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है।
प्राध्यापकों ने बताया कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। मकान मालिक और किराना दुकानदार भी अब उधार देने से मना करने लगे हैं। बच्चों की पढ़ाई, परिवार के भरण-पोषण और इलाज जैसे जरूरी खर्चों को पूरा करने में भी परेशानी हो रही है। कई प्राध्यापक आर्थिक संकट के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
आंतरिक स्रोत से पारिश्रमिक का भुगतान करें
अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने कहा कि यदि राज्य सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को मानदेय की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो विश्वविद्यालय अपने आंतरिक स्रोत से लंबित मानदेय राशि का भुगतान करे।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रोत से अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मानदेय का भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में वर्तमान में भी आंतरिक स्रोत से भुगतान कर आर्थिक संकट से जूझ रहे प्राध्यापकों को राहत दी जा सकती है।
बैठक में प्रभु कुमार सिंह, गोपाल झा, डॉ. नंदकिशोर, डॉ. लक्ष्मण कुमार, डॉ. श्वेता शरण, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मनीष रंजन सैनी समेत बड़ी संख्या में अतिथि सहायक प्राध्यापक मौजूद थे।














