*कीर्ति नारायण मंडल जैसा कोई नहीं : प्रो. विनय*
महामना कीर्ति नारायण मंडल (7 अगस्त, 1911 से 7 मार्च, 1997) न केवल मधेपुरा एवं कोसी, वरन् बिहार एवं भारत के भी अद्वितीय व्यक्तित्व हैं।पूरे भारतीय इतिहास में कीर्ति बाबू जैसा कोई नहीं है। हमें गर्व है कि शिक्षण संस्थान खोलने के प्रति नि:स्वार्थ भाव से समर्पित इस महामना ने हमारे क्षेत्र में जन्म लिया।
यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कही। वे आजाद पुस्तकालय के तत्वावधान में शुक्रवार को सार्क इंटरनेशनल स्कूल, मधेपुरा में आयोजित कीर्ति नारायण मंडल के 126वें जन्मोत्सव समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।
प्रो. चौधरी ने कहा कि कीर्ति बाबू का जीवन त्याग की मिशाल है। जमींदार परिवार से आने के बाद भी उन्होंने संन्यासी सा जीवन बिताया। वे वस्त्र के नाम पर महज एक धोती पहनते-ओढ़ते थे और महिनों सिर्फ उबला आलू एवं शकरकंद खाकर रह जाते थे।
उन्होंने कहा कि महामना कीर्ति नारायण मंडल कोसी के मदन मोहन मालवीय थे। उन्होंने इस क्षेत्र में शिक्षा के उन्नयन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। उनके द्वारा खोले गए शिक्षण संस्थानों के कारण मधेपुरा को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान मिली।
उन्होंने बताया कि कीर्ति बाबू ने शिक्षकों के चयन में कभी भी जाति, धर्म एवं पैरवी-पैसे को महत्व नहीं दिया। उन्होंने हमेशा हमेशा योग्यता एवं क्षमता को प्राथमिकता दिया। यही कारण है कि उनके द्वारा चयनित एवं नियुक्त किए गए शिक्षक ऊँचे-ऊँचे मुकाम पर गए। 
*कीर्ति बाबू में थे कई महापुरुषों के गुण*
मुख्य वक्ता कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षक को आचार्य कहा गया है, जिसका अर्थ है अपने आचरण से शिक्षा देने वाले। कीर्ति नारायण मंडल भी एक आदर्श आचार्य थे। उनके पास स्कूल-कॉलेज की बड़ी-बडी़ डिग्री नहीं थी, लेकिन उनकी साधना की ताकत एवं उनका चरित्र-बल अद्भुत था।
उन्होंने कहा कि अपने चिंतन एवं चरित्र के बल पर कीर्ति बाबू ने कई महापुरुषों के गुणों को एक साथ धारण कर लिया था। वे महात्मा बुद्ध की तरह गृहत्यागी होकर शिक्षा के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। उन्होंने दधिचि की तरह अपना सर्वस्व समाज-हित के लिए समर्पित कर दिया। जरूरत पड़ी तो पिता के समक्ष भी महात्मा गाँधी की तरह सत्याग्रह करने से नहीं हिचके।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि कीर्ति बाबू इस क्षेत्र के गौरव हैं। युवा पीढ़ी को उनके बारे में जानना चाहिए। हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा सहित जीवन के सभी क्षेत्र में महारथ हासिल कर सकते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों एवं छात्र छात्राओं ने कीर्ति नारायण मंडल की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कीर्ति नारायण मंडल पर पुस्तकें लिखकर उनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं को सहेजने वाले वरीय साहित्यकार प्रो. विनय कुमार चौधरी को विशेष सम्मान से सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर शिक्षिका प्रसन्ना कुमारी, शिक्षक कृष्ण कुमार, डॉ. सौरव कुमार चौहान, भारतेंदु कुमार सहित कई अतिथियों तथा दर्जनों की संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।
*निबंध प्रतियोगिता में प्रणव रहे प्रथम*
आजाद पुस्तकालय की ओर से चल रहे मधेपुरा जिला स्थापना दिवस उत्सव के अंतर्गत महामना कीर्ति नारायण मंडल की जयंती के अवसर पर सार्क इंटरनेशनल स्कूल, मधेपुरा में नवम एवं दशम के छात्र-छात्राओं के बीच एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसका विषय “हमारे जीवन में शिक्षा का महत्व” था। इसमें लगभग तीस प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें से वर्ग नवम के प्रणव कंठ प्रथम, वर्ग दशम की सुनैजिया शकील द्वितीय एवं आकिब शेख को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
इन प्रतिभागियों को आजाद पुस्तकालय द्वारा मेडल तथा कीर्ति बाबू पर केंद्रित विशेष स्मारिका भेंटकर सम्मानित किया गया। निर्णायक मंडल की संयोजक प्रसन्ना कुमारी ने कहा कि सभी बच्चों ने निबंध प्रतियोगिता में बेहतर करने का प्रयास किया था। ऐसी प्रतियोगिताएं उन्हें मानसिक कसरत का अवसर देती है।













