*कोर्स वर्क परीक्षा प्रपत्र शुल्क पंद्रह सौ पर पंद्रह हजार विलंब शुल्क तुगलकी फरमान*
*पूर्व एआईएसएफ प्रभारी ने जताया ऐतराज,लिखा पत्र*
6 अगस्त, 2026 (गुरुवार) को बीएनएमयू, मधेपुरा के परीक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में पंद्रह सौ शुल्क जमा करने हेतु पंद्रह हजार फाइन के निर्णय पर चर्चा का बाजार गर्म है इस संबंध में वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कुलपति को पत्र लिख कड़ी आपत्ति जताते हुए उसे तुगलकी फरमान बताया ।लिखे पत्र में पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी डॉक्टर राठौर ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय शैक्षिणिक उपलब्धियों ,गतिविधियों के बजाय अपने अजब गजब फैसलों से सुर्खियों में रहने लगा है।ताजा उदाहरण आज यानि छह अगस्त को परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से जारी परीक्षा गो 835/26 पत्रांक वाले पत्र में माननीय के आदेशानुसार पीएचडी कोर्स वर्क 2024 एवं 2025 के परीक्षा प्रपत्र भरने से वंचित हुए छात्र छात्राओं के लिए एक दिन का समय बढ़ाते हुए अतिरिक्त विलम्ब शुल्क के रूप में *पंद्रह हजार रुपए* निर्धारित किया गया है जो सीधे तौर पर तुगलकी फरमान है।ज्ञातव्य हो कि परीक्षा प्रपत्र भरने का शुल्क *पंद्रह सौ* है फिर उसके जमा करने के लिए मात्र *एक दिन का विलंब शुल्क पंद्रह हजार* कैसे हो सकता है।यह कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।ऐसे फैसले कभी छात्रहित के नहीं हो सकते ,यह सीधे सीधे तुगलकी फरमान ही नहीं बल्कि छात्रों की आर्थिक,मानसिक हत्या करने जैसा अपराध है।कुलपति को लिखे पत्र में राठौर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि बड़े दुख के साथ कहना है कि आपके कार्यकाल के फैसले विश्वविद्यालय को पूरी तरह तहस नहस कर चुका है जहां छात्र,शिक्षक,कर्मचारी सभी त्राही त्राहि कर रहे हैं।
*अविलंब फैसला वापस लेने की मांग अन्यथा कुलाधिपति से शिकायत और महापंचायत की चेतावनी*
लिखे पत्र में राठौर ने बीएनएमयू कुलपति से सीधे शब्दों में आग्रह किया कि अविलंब इस तुगलकी फरमान को वापस ले और नीतिगत तरीके से फार्म भरने की प्रक्रिया अपनाए अन्यथा इस संबंध में माननीय कुलाधिपति सह राज्यपाल महोदय से मिलकर शिकायत और स्थानीय स्तर पर आमजन के बीच जाकर विश्वविद्यालय की वर्तमान कुव्यवस्था के खिलाफ महापंचायत का रास्ता अपनाया जाएगा।डॉक्टर राठौर ने विश्वविद्यालय के हालिया प्रशानिक कार्यशैली पर चिंता जताते हुए कहा है कि आज विश्वविद्यालय मानों अपने स्थापना के लक्ष्य से भटक सा गया है।वहीं पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी ने पत्र की प्रतिलिपि कुलाधिपति सह राज्यपाल को भी भेजी है।














